Delhi car explosion: दिल्ली में कार विस्फोट से जुड़े जांच में चौकाने वाला खुलासा! आतंकी मॉड्यूल ग्लोबल कॉफी चेन के आउटलेट्स को बनाना चाहता था निशाना

दिल्ली और देश के अन्य प्रमुख महानगरों में अंतरराष्ट्रीय कॉफी चेन आउटलेट्स को निशाना बनाने की एक कथित आतंकी साजिश का खुलासा हुआ है. अधिकारियों के अनुसार, इस योजना का उद्देश्य इजरायल की तरफ से गाजा में की जा रही सैन्य कार्रवाई के खिलाफ एक प्रतीकात्मक और हिंसक संदेश देना था. जांच एजेंसियों का कहना है कि हमलों के जरिए वैश्विक स्तर पर ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की जा रही थी.
सरकारी सूत्रों ने ABP न्यूज को बताया कि इस साजिश के पीछे एक संगठित आतंकी नेटवर्क काम कर रहा था, जिसे जांच एजेंसियां सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल के रूप में देख रही हैं. बताया जा रहा है कि इस नेटवर्क में पढ़े-लिखे और प्रोफेशनल बैकग्राउंड से जुड़े लोग शामिल थे, जो अपनी सामाजिक पहचान की आड़ में गतिविधियां चला रहे थे.
डॉक्टरों की गिरफ्तारी और आत्मघाती हमले से जुड़ा मामला
इस मामले में गिरफ्तार किए गए लोगों में डॉक्टरों का एक समूह भी शामिल है. ये वही लोग बताए जा रहे हैं, जिन्हें पहले दिल्ली बम ब्लास्ट आत्मघाती हमले के सिलसिले में हिरासत में लिया गया था, जिसमें एक दर्जन से अधिक लोगों की जान गई थी. जांच एजेंसियों के अनुसार, पूछताछ के दौरान सामने आया कि यह समूह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मौजूद एक ग्लोबल कॉफी रेंज के आउटलेट्स पर बमबारी की योजना बना रहा था. सरकारी सूत्रों का कहना है कि जिस कॉफी चेन को निशाना बनाने की तैयारी थी, उसके संस्थापक यहूदी समुदाय से जुड़े बताए जाते हैं. अधिकारियों के अनुसार, इस योजना का मकसद किसी एक व्यक्ति या देश को नुकसान पहुंचाने से ज्यादा एक वैचारिक और राजनीतिक संदेश देना था. सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ABP न्यूज को यह जानकारी दी.
चार साल से सक्रिय था कथित सफेदपोश आतंकी नेटवर्क
जांच एजेंसियों के अनुसार, यह कथित आतंकी मॉड्यूल पिछले करीब चार वर्षों से सक्रिय था. इस दौरान इसके सदस्य अपने पेशे और सामाजिक स्थिति का इस्तेमाल कर सुरक्षा एजेंसियों की शुरुआती निगरानी से बचते रहे. अधिकारियों का कहना है कि नेटवर्क ने अपनी गतिविधियों को बेहद गोपनीय तरीके से संचालित किया. सूत्रों के मुताबिक, मॉड्यूल के सदस्य संचार, फंडिंग और आपसी संपर्क के लिए एन्क्रिप्टेड डिजिटल प्लेटफॉर्म और कोडेड भाषा का इस्तेमाल कर रहे थे. इसी वजह से लंबे समय तक उनकी गतिविधियां जांच एजेंसियों की पकड़ से बाहर रहीं.
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