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यूपी में पंचायती राज विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को राहत, योगी सरकार ने लिया ये बड़ा फैसला

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव से पहले प्रदेश के योगी आदित्यनाथ सरकार ने पंचायती राज विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के हित लिए बड़ा फैसला लिया है. शासन ने स्पष्ट कर दिया है कि जिला पंचायत अध्यक्षों को अधिकारियों या कर्मचारियों का वेतन रोकने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है. इस संबंध में पंचायती राज विभाग ने सभी जिला पंचायत अध्यक्षों को पत्र लिखकर सख्त निर्देश जारी किए हैं.

पंचायती राज विभाग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि सेंट्रल ट्रांसफरेबल कैडर (केन्द्रीय संक्राम्य संवर्ग) के कर्मियों का नियुक्ति प्राधिकारी स्वयं शासन (राज्य सरकार) है. नियमानुसार, जिस पद का नियुक्ति प्राधिकारी शासन है, उस पद पर तैनात अधिकारी या कर्मचारी का वेतन रोकने या दंडात्मक कार्रवाई करने का अधिकार जिला पंचायत अध्यक्ष के पास नहीं है.

अधिकारी या कर्मचारी का नहीं रोका जा सकता वेतन

शासन की ओर से जारी निर्देशों में कहा गया कि, बिना किसी ठोस कानूनी आधार के महीनों तक वेतन रोकना मानवीय दृष्टिकोण से भी अनुचित है. शासन ने सख्त रूप अपनाते हुए कहा है कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध कोई गंभीर शिकायत है तो जिला पंचायत अध्यक्ष उसे तत्काल साक्ष्यों के साथ शासन को भेजें. संबंधित पर कार्रवाई का निर्णय शासन स्तर पर लिया जाएगा, न कि स्थानीय स्तर पर वेतन रोककर उन्हें प्रताड़ित किया जाएगा.

आखिर क्यों लिया गया ये फैसला?

दरअसल, शासन ने यह कदम विशेष रूप से लखनऊ और कौशांबी जिलों से आई शिकायतों के बाद उठाया है. लखनऊ में जिला पंचायत अध्यक्ष द्वारा पिछले करीब चार महीनों से कुछ कर्मचारियों का वेतन रोके जाने का मामला सामने आया था. इसी तरह की शिकायत कौशांबी से भी सामने आई थी. पंचायती राज विभाग के इस निर्णय से पूरे प्रदेश के जिला पंचायत कार्यालयों में तैनात हजारों कर्मचारियों ने राहत की सांस ली है.

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AZMI DESK

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