लॉन्ग मार्च: CM देवेंद्र फडणवीस से हुई मुलाकात, किसान सभा की मांगों पर सरकार ने क्या-क्या माना?

अखिल भारतीय किसान सभा के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार (27 जनवरी) को मंत्रालय में हुई बैठक में किसानों का पक्ष रखा. प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि वनाधिकार कानून का क्रियान्वयन किया जाए. समुद्र में बह जाने वाले पानी का उपयोग स्थानीय लोगों तथा महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए किया जाए. वहीं पेसा के अंतर्गत भर्ती शुरू कर रोजगार उपलब्ध कराया जाए तथा अन्य मांगों को लेकर लॉन्ग मार्च की पृष्ठभूमि में किसानों की बात रखी गई.
इस बैठक में राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले, जलसंपदा मंत्री गिरीश महाजन, आदिवासी विकास मंत्री अशोक उइके, स्कूल शिक्षा मंत्री दादासाहेब भुसे, वन मंत्री गणेश नाईक, मुख्य सचिव तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे. किसान सभा के प्रतिनिधिमंडल ने दो घंटे तक विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की.
प्रतिनिधिमंडल ने सीएम आवास पर की मुलाकात
इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने वर्षा स्थित मुख्यमंत्री निवास पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की. इस बैठक में निम्नलिखित मांगें स्वीकार की गईं. स्वीकार की गई सभी मांगों के क्रियान्वयन की पूरी गारंटी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ली. क्रियान्वयन में कोई त्रुटि न रहे, इसके लिए मंत्री स्तर पर निरंतर निगरानी और फॉलो-अप का आश्वासन दिया गया.
वनाधिकार कानून से जुड़े निर्णय
वनाधिकार कानून के अंतर्गत दावा करने वाले सभी दावेदारों के वन अधिकार दावों की पुनः जांच करने पर सहमति बनी. नामांतरण के लिए पात्र खेती और वास्तविक कब्जे के बीच जो अंतर वन विभाग की गलत रिपोर्ट के कारण बढ़ा है, उससे हजारों किसानों को नुकसान हुआ है.
इस अन्याय को दूर करने के लिए प्रत्येक जिले में सभी दावों की दोबारा जांच का निर्णय लिया गया. इसके लिए प्रत्येक जिले में उपविभागीय अधिकारी की अध्यक्षता में समितियां गठित की जाएंगी. अगले तीन महीनों में यह प्रक्रिया पूरी कर वन भूमि धारकों को न्याय दिलाया जाएगा.
इस कार्य को गति देने के लिए मंत्रियों को शामिल करते हुए एक क्रियान्वयन समिति भी गठित की गई है. वन भूमि पर फसल निरीक्षण (पीक पाहणी) कर सभी सरकारी योजनाओं का लाभ वन भूमि धारकों को देने की घोषणा की गई. इस संबंध में आदिवासी विकास मंत्री ने आवश्यक आदेश जारी किए हैं.
कृषि उपज व योजनाओं से जुड़े निर्णय
वन भूमि जोतने वाले किसानों की धान खरीद तथा वरई, नागली, सावा जैसी आदिवासी फसलें, स्ट्रॉबेरी और बाला हिरडा जैसे फलों की उचित मूल्य पर खरीद की मांग किसान सभा ने रखी. धान उत्पादकों को मिलने वाला बोनस वन भूमि धारकों को भी देने की मांग की गई. इन सभी योजनाओं का लाभ देने के लिए आवश्यक ई-पीक पाहणी वन भूमि धारकों की कराकर उन्हें सभी सरकारी योजनाओं का लाभ देने पर सहमति बनी.
देवस्थान भूमि और वरकस भूमि
देवस्थान भूमि जोतने वाले किसानों के नाम पर भूमि करने संबंधी कानून किसान सभा के निरंतर आंदोलन और प्रयासों के कारण तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. इसका मसौदा किसान सभा को दिया गया है.
मसौदे के कुछ प्रावधान स्वागतयोग्य हैं, लेकिन उसमें कुछ बुनियादी बदलाव आवश्यक हैं. यह बात किसान सभा ने स्पष्ट की. अगले आठ दिनों में राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की अध्यक्षता में किसान सभा के प्रतिनिधिमंडल की बैठक आयोजित कर इन त्रुटियों को दूर करने पर निर्णय लिया जाएगा.
ठाणे-पालघर जिलों की वरकस भूमि को नियमित करने के संदर्भ में भी राजस्व मंत्री ने सकारात्मक रुख दिखाया और कानूनी प्रक्रिया पूरी कर भूमि जोतने वालों को न्याय देने की मांग स्वीकार की गई.
जल संसाधन और सिंचाई
आदिवासी क्षेत्रों में गिरने वाला पानी सात पश्चिमवाहिनी नदियों के माध्यम से समुद्र में चला जाता है. इसे गुजरात की ओर मोड़ने के प्रयासों का किसान सभा ने विरोध किया और मांग की कि यह पानी स्थानीय लोगों तथा महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित क्षेत्रों को उपलब्ध कराया जाए. विभिन्न प्रकार के चेक डैम और संरचनाएं बनाकर पानी को वहीं रोकने और उपयोग करने का ठोस कार्य-कार्यक्रम तय किया गया.
इस संबंध में नाशिक जिलाधिकारी स्तर पर विस्तृत योजना बनाई जाएगी और किसान सभा द्वारा दिए गए प्रस्तावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा. समुद्र में बहने वाले पानी को पूर्व की ओर मोड़कर मराठवाड़ा सहित सूखा प्रभावित क्षेत्रों को देने की योजना को गति देने की घोषणा भी की गई.
पेसा भर्ती और बिजली
पेसा के अंतर्गत 50% पद भरने के न्यायालयीन आदेश के अनुसार तुरंत क्रियान्वयन कर आदिवासी विभाग में पेसा भर्ती शुरू करने पर सहमति बनी. किसानों को दिन में बिजली देने की मांग पर भी निर्णय लिया गया. जिन जिलों में सिंचाई के लिए रात में बिजली दी जाती है, वहां की जानकारी तुरंत एकत्र कर दिन में बिजली देने के संबंध में निर्णय लिया जाएगा.
शालेय पोषण आहार व शिक्षा की ओर बड़ा कदम
शालेय पोषण आहार कर्मियों को दिए जाने वाले अत्यंत कम मानदेय में वृद्धि के संबंध में तत्काल निर्णय लेकर उन्हें न्याय देने की घोषणा की गई. दुर्गम ग्रामीण आदिवासी क्षेत्रों में विद्यार्थियों को शिक्षा की सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए स्कूल भवनों और कक्षाओं की मरम्मत तथा आवश्यक स्थानों पर शिक्षक भर्ती की मांग पर स्कूल शिक्षा मंत्री दादासाहेब भुसे ने ठोस कार्रवाई का आश्वासन दिया.
रेल परियोजना पर अहम फैसला
अकोले मार्ग से प्रस्तावित नाशिक-पुणे हाई-स्पीड रेल परियोजना को पूर्व सर्वेक्षण के अनुसार ही लागू करने का अनुरोध किया गया. मार्ग परिवर्तन से जुड़ी तकनीकी अड़चनों पर पुनर्विचार कर समाधान निकालने का आश्वासन मुख्यमंत्री ने दिया.
आंदोलन पर लिए गए ये निर्णय
किसान सभा के राज्य नेतृत्व और विशेष रूप से खर्डी में एकत्र आंदोलनकारियों से चर्चा कर आंदोलन वापस लेने के बारे में अंतिम निर्णय लिया जाएगा. बुधवार (28 जनवरी) की शाम जलसंपदा मंत्री गिरीश महाजन और नाशिक के जिलाधिकारी आंदोलनकारियों को संबोधित करेंगे, जिसके बाद आंदोलन को लेकर निर्णय घोषित किया जाएगा.
प्रतिनिधिमंडल में डॉ. अशोक ढवले, पूर्व विधायक जे. पी. गावित, डॉ. अजित नवले, विधायक विनोद निकोले, उमेश देशमुख, सुभाष चौधरी, इंद्रजीत गावित, इरफान शेख, किरण गहला, सुनील मालुसरे, भिका राठोड, देवीदास वाघ, रामदास पवार, रडका कलांगडा, चंद्रकांत घोरखाना, एकनाथ मेंगाल सहित अन्य शामिल थे.



