नीट छात्रा मौत मामला: छात्रा के पिता ने DGP को पत्र लिख SIT जांच पर उठाए सवाल, संदिग्धों के DNA को होगा मिलान

बिहार की राजधानी पटना के नीट छात्रा की मौत के मामले में छात्रा के पिता ने बिहार के डीजीपी विनय कुमार को पत्र लिखा है और स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम की जांच पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. डीजीपी को लिखे पत्र में उन्होंने कहा कि एसआईटी द्वारा जांच में कई अति महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील बिंदुओं को नजरअंदाज किया जा रहा है जिससे जांच की निष्पक्षता एवं पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न उत्पन्न हो रहे हैं. वहीं फॉरेंसिक रिपोर्ट के आने बाद अब डीएनए मिलान पर काम अब होगा. सूत्रों के अनुसार जेल में बंद शंभू गर्ल्स हॉस्टल का बिल्डिंग मालिक मनीष चंद्रवंशी का डीएनए सैंपल लिया जाएगा.
15 लोगों का DNA मिलान होगा. इसमें वे लोग भी शामिल हैं जिनसे छात्रा की मोबाइल पर लंबे समय तक बातचीत होती थी. पुलिस ने छात्रा के मोबाइल नंबर का CDR निकलवाकर संदिग्धों के नाम शॉर्टलिस्ट किए हैं. संदिग्धों से DNA सैंपल लिए जाएंगे और FSL रिपोर्ट से मैच किए जाएंगे. माना जा रहा है कि DNA रिपोर्ट से मामले में बड़ी सफलता मिलेगी और दोषियों की पहचान करने में मदद मिलेगी.
उधर, छात्रा के पिता ने कहा है कि एसआईटी मामले से जुड़े अहम तथ्यों, साक्ष्यों, परिस्थिति जन्य पहलुओं की समुचित जांच नहीं कर रही है. उन्होंने कहा कि जिन बिंदुओं को नजरअंदाज किया जा रहा है. उन एंगल पर जांच हो तो सच्चाई तक पहुंचा जा सकता है. लेकिन उस तरह से जांच नहीं हो रही है जिससे न्याय मिलने में विलंब हो रहा है और आम लोगों का विश्वास जांच प्रक्रिया पर से उठ रहा है.
छात्रा के पिता ने डीजीपी से निष्पक्ष जांच का निर्देश देने का अनुरोध किया है. साथ ही इन बिंदुओं पर गहन निष्पक्ष एवं तथ्यात्मक जांच सुनिश्चित करने की मांग की:
हॉस्टल के मकान मालिक मनीष रंजन के पिछले दरवाजे के CCTV फुटेज की FSL जांच कराई जाए. आसपास के गली और सड़क के CCTV फुटेज की जांच हो. मनीष रंजन और उनके बेटा के मोबाइल का CDR निकालकर जांच कराएं.
हॉस्टल संचालिका नीलम अग्रवाल और उसके बेटे आशु अग्रवाल के मोबाइल का CDR निकालकर जांच कराएं
5 जनवरी की शाम 5 बजे से 6 जनवरी तक के CCTV फुटेज की FSL जांच कराएं. हॉस्टल में मौजूद लड़कियों के बयान लें और उनके मोबाइल के CDR की जांच कराएं
चित्रगुप्त नगर थाना प्रभारी रोशनी कुमारी की भूमिका की जांच कराई जाए
डॉ. सहजा नन्द प्रसाद सिंह, डॉ. सतीश कुमार (प्रभात हॉस्पिटल), डॉ. अभिषेक और महिला डॉक्टर जया के मोबाइल के CDR की जांच कराएं
सात जनवरी को अस्पताल की एक नर्सिंग स्टाफ ने छात्रा की मां को बताया कि लड़की के साथ बहुत गलत हुआ है. उसकी पहचान कर उसका बयान लिया जाए
आठ जनवरी तक सभी जांच रिपोर्ट होने के बाद भी बच्ची का इलाज ड्रग एब्यूज के लिए नहीं किया गया. 9 जनवरी को प्रभात हॉस्पिटल के आईसीयू में ड्यूटी पर मौजूद डॉ. अभिषेक ने वायरल मेनिन्जाइटिस सिर में खून जमने की दवा देने की बात परिजन को कही. फिर किस आधार पर मौत की वजह नींद की दवा सिद्ध करने की कोशिश हो रही है
छात्रा ने जो कपड़े पहने थे उसे प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल ने परिजनों को नहीं लिए. वो कपड़ा जांच में अहम सुराग साबित होता.



