उत्तराखंड के जंगलों में टला वनाग्नि का खतरा, बारिश और बर्फबारी ने दी जंगलों को राहत

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के जंगलों में वनाग्नि का खतरा फिलहाल टल गया है. हाल ही में हुई बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हुए हिमपात से वातावरण में नमी का स्तर भी बढ़ गया है, जिससे जंगलों में आग लगने की आशंका कम हो गई है. लंबे समय से बारिश नहीं होने के कारण जंगलों में सूखापन भी बढ़ रहा था और गर्मी के मौसम की समय से पहले शुरुआत की आशंका जताई जा रही थी, लेकिन मौसम में आए इस बदलाव से वन विभाग ने राहत की सांस ली है.
पिछले सप्ताह जिले में आई आग लगने की दो घटनाएं
इस साल शीतकाल के दौरान अपेक्षित बारिश और हिमपात नहीं होने से नमी का स्तर काफी गिर गया था. इसका असर यह हुआ कि जनवरी माह में ही जंगलों में आग की घटनाएं सामने आने लगी थीं. पिछले सप्ताह जिले में आग लगने की दो घटनाएं दर्ज की गईं, जिससे वन विभाग सतर्क हो गया था. यदि बारिश नहीं होती तो गर्मी का सीजन 14 फरवरी से पहले ही शुरू होने की आशंका थी.
इस स्थिति को देखते हुए वन विभाग पहले से ही अलर्ट मोड पर था. जिस के लिए जिलेभर में 64 फायर क्रू स्टेशन सक्रिय किए गए थे और कर्मचारियों को हर समय तैयार रहने के निर्देश भी थे. वहीं जंगलों की नियमित निगरानी के साथ-साथ संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष नजर भी रखी जा रही थी.
वन विभाग निगरानी और सतर्कता को रखेगा जारी
हालिया बारिश और हिमपात से न सिर्फ जंगलों में नमी बढ़ी है, बल्कि तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है. इससे जंगलों में आग भड़कने की संभावना कुछ समय के लिए टल गई है. अधिकारियों का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक जंगल अपेक्षाकृत सुरक्षित रहेंगे.
वन क्षेत्राधिकारी दिनेश जोशी ने बताया कि बारिश और हिमपात से जंगलों को बड़ी राहत मिली है. नमी बढ़ने से आग लगने की घटनाओं पर फिलहाल रोक लग गई है. उन्होंने कहा कि यदि आने वाले दिनों में भी बारिश होती है तो वन विभाग को और अधिक राहत मिल सकती है.
हालांकि वन विभाग ने चेतावनी दी है कि मौसम साफ होते ही खतरा फिर बढ़ सकता है. इसलिए निगरानी और सतर्कता जारी रखी जाएगी. वनाग्नि की रोकथाम के लिए विभाग लोगों से भी सहयोग की अपील कर रहा है, ताकि भविष्य में किसी बड़ी घटना से बचा जा सके.



