राजनीति

महाराष्ट्र चुनाव के बाद पवार परिवार की सियासी नजदीकियां बढ़ीं, NCP के दोनों गुटों का होगा विलय?

पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका चुनावों में शरद पवार और अजीत पवार साथ आए, लेकिन नतीजे मनमाफिक नहीं रहे. इसके बावजूद इस चुनावी प्रयोग ने एक बात साफ कर दी कि पवार परिवार के भीतर की कड़वाहट अब लगभग खत्म हो चुकी है. 5 फरवरी को होने वाले जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव दोनों गुट साथ मिलकर लड़ेंगे. इसी बदली हुई सियासी तस्वीर के बीच दोनों गुटों के विलय को लेकर कयास तेज हो गए हैं.

हालिया नगर निगम चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने पुणे में 165 में से 119 सीटों पर कब्जा जमाया. इसके मुकाबले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों गुट मिलकर भी कोई बड़ी चुनौती पेश नहीं कर सके. शहरी इलाकों में राकांपा का घटता असर ही वह वजह है, जिसने शरद और अजीत को एक बार फिर साथ आने के लिए मजबूर किया है.

दोनों गुटों के एक साथ चुनाव लड़ने के फैसले के बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या अब पार्टी का औपचारिक विलय होगा. हालांकि अजीत पवार ने साफ कहा है कि फिलहाल दोनों पार्टियों के एक होने को लेकर कोई बातचीत नहीं हुई है.

दूसरी ओर, अजीत पवार और सुप्रिया सुले दोनों ही सार्वजनिक तौर पर यह स्वीकार कर चुके हैं कि परिवार के भीतर अब कोई कड़वाहट नहीं बची है.

2023 में अलग हुए थे रास्ते

जुलाई 2023 में अजीत पवार जब अपने चाचा का साथ छोड़कर तत्कालीन शिंदे सरकार में शामिल हुए थे, तब से राकांपा में दो फाड़ हो गया. उस वक्त अजीत के साथ प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल और सुनील तटकरे जैसे नेता भी गए.

बताया जाता है कि अजीत पवार ने दो-तीन बार शरद पवार से मुलाकात कर उन्हें अपने साथ आने के लिए मनाने की कोशिश की थी, लेकिन तब शरद पवार तैयार नहीं हुए. उस समय राष्ट्रीय राजनीति में ‘इंडिया’ गठबंधन बन रहा था और शरद पवार को वहां अपने लिए बेहतर संभावना दिख रही थी.

विधानसभा और स्थानीय चुनावों ने बढ़ाई चिंता

लोकसभा चुनाव में अजीत पवार गुट को महाराष्ट्र में उम्मीद से बेहतर नतीजे मिले, लेकिन विधानसभा चुनाव आते-आते वह रफ्तार थम गई. अब स्थानीय निकाय चुनावों में हालात और चुनौतीपूर्ण नजर आ रहे हैं. ऐसे में दोनों गुटों का साथ आना रणनीतिक मजबूरी माना जा रहा है.

विलय की राह इतनी आसान भी नहीं है. अजीत पवार फिलहाल भाजपा के साथ सरकार में हैं. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या शरद पवार भाजपा के साथ जाने को तैयार होंगे? अगर दोनों गुट मिलते हैं तो पार्टी की कमान किसके हाथ में होगी और सुप्रिया सुले की भूमिका क्या रहेगी. इन मुद्दों पर भी खींचतान तय मानी जा रही है.

हाल ही में बारामती में अजीत पवार और शरद पवार की मुलाकात हुई, जिसमें सुप्रिया सुले और रोहित पवार भी मौजूद थे. बैठक के बाद सुप्रिया सुले ने कहा कि बंद कमरे की बातचीत सार्वजनिक नहीं की जा सकती, लेकिन पार्टी के भविष्य को लेकर गंभीर चर्चा जारी है.

AZMI DESK

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