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भारतीय सेना को निशाना बनाने वाला आतंकी मुरीदके में चलाता है मदरसा, सरकार की शह पर खुलेआम घूम रहा अब्दुर रहमान

पहलगाम में एक साल पहले लश्कर ए तैयबा के पाकिस्तानी हैंडलर और आतंकी हमले को अंजाम देने वाले पाकिस्तानी आतंकियों पर पाकिस्तान ने पिछले 24 घंटे से झूठी सफ़ाई देने शुरू कर दी है कि पहलगाम में हुए आतंकी हमले से उनका कोई संबंध नहीं था. 

हालांकि पहलगाम में आतंकी हमले का फ़ोन पर आदेश देने वाला लश्कर ए तैयबा का हैंडलर हबीबुल्लाह उर्फ साजिद जट्ट उर्फ अली साजिद हो या फिर हमले में को अंजाम देने आतंकी बिलाल अफ़ज़ल उर्फ सुलेमान, हबीब ताहिर और हमजा अफ़ग़ानी हो, इनके पाकिस्तानी शिनाख़्ती कार्ड से साफ़ हो चुका है कि पाकिस्तान ही पहलगाम आतंकी हमले में पूरी तरह शामिल था.

पाकिस्तान के मंत्री दे रहे झूठी गवाही

पाकिस्तान के केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अताउल्लाह तरार पिछले 24 घंटे झूठी सफ़ाई दे रहे हैं कि पाकिस्तान का भारत में आतंकी गतिविधियों से कोई लेना देना नहीं है और पाकिस्तान के भीतर भारत में आतंकी हमले को अंजाम देने वाला एक भी आतंकी नहीं है. इसी तरह पाकिस्तान का विदेश मंत्रालय भी पूरी दुनिया को झूठ बताने में जुटा हुआ है की पाकिस्तान भारत के ख़िलाफ़ आतंकवाद में शामिल नहीं है. ऐसे में एक बार फिर सबूतों के साथ पाकिस्तान के सरकारी आतंकी कनेक्शन पर्दाफाश करने एबीपी न्यूज़ जा रहा है.

ये तस्वीर मुरीदके में स्थित लश्कर ए तैयबा के जामिया उद दावा मदरसे के संचालक मुफ्ती अब्दुर रहमान आबिद की है. पाकिस्तान के फ़ैसलाबाद में रहने वाला मुफ्ती अब्दुर रहमान आबिद कुछ दिन पहले लश्कर ए तैयबा के मदरसे से निकालने वाले छात्रों के वार्षिक समारोह में भी उपस्थित था और हर रोज़ अपने फेसबुक अकाउंट पर इस्लामी तालीम और जिहाद का पाठ पढ़ाने के लिए वीडियो पोस्ट करता है.

देखने से तो लगता है कि मुफ़्ती अब्दुर रहमान आबिद सिर्फ़ एक मुफ़्ती है जो लश्कर ए तैयबा के मदरसे का संचालक है लेकिन असलियत में ये वो आतंकी है जिसने अपने दो साथियों के साथ मिलकर दिसंबर 2012 से जनवरी 2013 के बीच भारतीय सेना पर आतंकी हमला किया था और फिर एक सैनिक के मृतक शरीर को क्षत विक्षत किया था. एबीपी न्यूज़ के हाथ आज से 13 साल पहले इस आतंकी हमले को आतंकियों द्वारा रिकॉर्ड की गई एक क्लिप लगी है जिसमें आतंकी अब्दुर रहमान आबिद साफ़ साफ़ दिख रहा है और आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना के सैनिक के शव विक्षित करते हुए दिख रहा है.

दौरा ए फिदायी की ट्रेनिंग आतंकियों को दिखाई जाती है

ये वीडियो सूत्रों के मुताबिक लश्कर ए तैयबा में दौरा ए फ़िदायी की ट्रेनिंग करने आने वाले आतंकियों को दिखायी जाती है और उन्हें सिखाया जाता है की कैसे सेना पर घात लगाकर हमला करना है. सूत्रों के मुताबिक इस हमले के फौरन बाद अब्दुर रहमान आबिद को ISI ने इनाम में 10 लाख रुपये दिए थे और उस समय अब्दुर रहमान आबिद अपने छद्म नाम अबू सूफियान नाम से जाना से जाना जाता था. इस आतंकी हमले के ठीक बाद अब्दुर रहमान आबिद को मुजफ्फराबाद स्थित लश्कर ए तैयबा के KFC कैम्प का संचालक बना दिया गया था और लश्कर ए तैयबा उस समय हर महीने 15 हज़ार रुपये वज़ीफ़ा आतंकी अब्दुर रहमान आबिद को देता था.

साल 2018 में आतंकी अब्दुर रहमान आबिद को मुरीदके के आतंकी कैम्प मरकज़ तैयबा में भेज दिया गया और वहाँ पर इसे “उस्ताद उल मुजाहिद्दीन गाजी” की उपाधि दी गई. इसी के बाद साल 2021 में अब्दुर रहमान आबिद को लश्कर ए तैयबा ने मुरीदके में स्थित लश्कर ए तैयबा के सबसे बड़े मदरसे जामिया उद दावा का प्रमुख बनाया और हर महीने इस आतंकी को लश्कर ए तैयबा 5 लाख पाकिस्तानी रुपये देती है.

आतंकियों को शह दे रही पाकिस्तान की सरकार

साल 2019 में पाकिस्तान को FATF की ग्रे लिस्ट से निकालने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने लश्कर ए तैयबा और जैश ए मोहम्मद के आतंकी कैंपों, मरकज़ और मदरसों को सरकारी क़ब्ज़े में ले लिया था लेकिन तत्कालीन ISI प्रमुख आसिम मुनीर ने लश्कर के मरकज़, मर्दरसे और कैंपों की कमान लश्कर ए तैयबा के आतंकियों के पास ही रहने दी, जिसे आगे चल कर लेफ्टिनेंट जनरल फ़ैज़ हमीद और फिर आसिम मलिक ने बरक़रार रखा.

आज भी ये आतंकी अब्दुर रहमान आबिद जिसके द्वारा 13 साल पहले हमला करने के सबूत भारत भारतीय खुफिया एजेंसियों के पास हैं वो खुलेआम पाकिस्तान में वहां की सरकार की शह पर घूम रह है और जिस मदरसे को अधिग्रहित करने का दावा पाकिस्तान की सरकार कर चुकी है उसका प्रमुख बना हुआ है.

ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि एक तरफ़ पाकिस्तान पूरी दुनिया के सामने ख़ुद को शांतिदूत बताने का ढोंग करता है और दूसरी तरफ़ भारत में आतंकी हमला करने वालो को ना सिर्फ़ इनाम देता है बल्कि अपने अधिग्रहित मदरसे का संचालक बने रहने देता है. आज भी मुरीदके में आतंक की प्रथम दौर की ट्रेनिंग दौरा ए सुफ़ा इसी अब्दुर रहमान आबिद की देखरेख में होती है जहाँ आतंकियों को जिहाद का पाठ पढ़ाया जाता है.

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AZMI DESK

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