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उल्टा पड़ सकता है राघव चड्ढा का दांव? AAP करेगी 7 में से 3 सांसदों को सस्पेंड करने की मांग, समझिए दल-बदल कानून

भारत में राजनीति की नीति और नीयत में क्रांतिकारी बदलावों के दावे के साथ करीब 14 साल पहले भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से उपजी आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए गंभीर संकट पैदा हो गया है. पार्टी को शुक्रवार (24 अप्रैल 2026) को तब बड़ा झटका लगा जब उसके 7 राज्यसभा सदस्यों ने पार्टी छोड़ने और बीजेपी में शामिल होने की घोषणा की. AAP के करीब दो-तिहाई राज्यसभा सदस्यों के इस दल-बदल ने पार्टी की आंतरिक एकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

राघव चड्ढा बोले- सभी सांसदों ने हस्ताक्षर किए

राघव चड्ढा ने कहा कि संविधान के अनुसार किसी पार्टी के कुल सांसदों में से दो-तिहाई सांसद दूसरी पार्टी का दामन थाम सकते हैं. AAP से इस्तीफा देने के बाद राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक बीजेपी में शामिल हो गए. राघव चड्ढा ने बताया कि स्वाति मालीवाल, हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता और विक्रम साहनी भी बीजेपी में शामिल हो रहे हैं. उन्होंने इस संबंध में राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन को एक पत्र पहले ही सौंपा दिया, जिस पर सभी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं.

बीजेपी का ऑपरेशन लोटस: AAP

आम आदमी पार्टी ने इसे बीजेपी का ‘ऑपरेशन लोटस’ करार दिया है. पार्टी का आरोप है कि ईडी और सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियों का भय दिखाकर आप के नेताओं को तोड़ने की साजिश रची गई है. आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि ‘ऑपरेशन लोटस’ के माध्यम से बीजेपी पंजाब की भगवंत मान सरकार को अस्थिर करना चाहती है. उन्होंने कहा कि यह पंजाब और पंजाब के लोगों के साथ धोखा है. पंजाब की जनता इसको कभी नहीं भूलेगी.

बाकी 4 सांसदों के लिए नितिन नवीन का मैसेज

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने पार्टी कार्यालय में मिठाई खिलाकर सभी का स्वागत किया. उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, विक्रम साहनी और राजिंदर गुप्ता के लिए खास मैसेज लिखा. उन्होंने कहा, ‘पार्टी मुख्यालय में राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल का बीजेपी परिवार में स्वागत किया. साथ ही, हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, विक्रम साहनी और राजिंदर गुप्ता के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काम करने के लिए शुभकामनाएं.’

तीन सांसदों खिलाफ शिकायत करेगी पार्टी

आम आदमी पार्टी ने इसे नियमों के विपरीत बताया. AAP के राज्यसभा व्हिप एनडी गुप्ता के अनुसार वे राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल के खिलाफ राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन को पत्र सौंपेंगे. ये तीनों नेता आधिकारिक रूप से बीजेपी में शामिल हुए हैं इसलिए AAP राज्यसभा व्हिप इन्हीं तीन सांसदों खिलाफ शिकायत दर्ज कराएंगे. हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, विक्रम साहनी और राजिंदर गुप्ता से अभी तक खुद सार्वजनिक तौर पर नहीं कहा है कि वह बीजेपी में शामिल हो रहे हैं. 

राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक पर कार्रवाई की मांग

AAP नेता संजय सिंह ने कहा कि वह बीजेपी में शामिल होने के लिए राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक को उच्च सदन से अयोग्य घोषित करने की मांग करेंगे. उन्होंने कहा, ‘मैं माननीय राज्यसभा सभापति को एक पत्र प्रस्तुत करूंगा, जिसमें राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक को बीजेपी में शामिल होने के कारण राज्यसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित करने की मांग की जाएगी. उन्होंने कहा कि दूसरी पार्टी में शामिल होने का उनका यह फैसला संविधान की दसवीं अनुसूची के अंतर्गत स्वेच्छा से अपनी पार्टी की सदस्यता त्यागने के समान है.

इन तीनों सांसदों के अलावे बाकी बचे चार राज्यसभा सांसदों के स्ट्रैंड पर आम आदमी पार्टी ने सवाल उठाया. आम आदमी पार्टी में आई इस फूट के बीच स्वाति मालीवाल ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, ‘मैं भी पार्टी छोड़ रही हूं. जल्द ही इस पर विस्तार से बातचीत करूंगी. साल 2006 में अपनी नौकरी छोड़कर मैंने देश सेवा का मार्ग चुना था. आरटीआई आंदोलन, अन्ना आंदोलन, आम आदमी पार्टी के गठन और दिल्ली महिला आयोग में 8 साल निष्ठापूर्वक काम करते हुए मैंने हर चरण में पूरी ईमानदारी और समर्पण से योगदान दिया. मैं इस समय संसदीय समिति की बैठक के लिए ईटानगर आई हुई हूं. आज रात दिल्ली लौटने के बाद इस विषय पर विस्तार से बात करूंगी.’

क्या है दल-बदल कानून?

भारतीय संविधान के 10वीं अनुसूची के तहत ‘दल-बदल विरोधी कानून’ (Anti-Defection Law) को 1985 में लाया गया था. इसका मुख्य उद्देश्य राजनीति में पार्टी बदलने वाले चलन को रोकना और जनता के द्वारा चुनी गई सरकारों में स्थिरता लाना है. आसान शब्दों में कहें तो अगर कोई सांसद या विधायक अपनी मर्जी से उस पार्टी को छोड़ता है जिसके टिकट पर वह चुनाव जीता है या सदन में अपनी पार्टी के व्हिप के खिलाफ जाकर वोट करता है तो उसकी सदन की सदस्यता खत्म की जा सकती है. 10वीं अनुसूची का खंड 4 कहता है कि अगर किसी दल के दो-तिहाई (2/3) सदस्य एक साथ टूटकर किसी अन्य दल में मिलते हैं तो उन पर यह कानून लागू नहीं होता और उनकी सदस्यता बरकरार रहती है.

ये भी पढ़ें :  AAP में बड़ी टूट, तीनों राज्यसभा सांसद ज्वाइन करेंगे BJP, राघव चड्ढा बोले- दो तिहाई सांसदों के साथ विलय

AZMI DESK

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