देश

पहली बार देश के मुख्य न्यायाधीश ने किया सैनिकों से संवाद, कहा- आप सीमा संभालिए, आपके हितों की रक्षा देश का जिम्मा

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने लेह के आर्मी बेस कैंप में जवानों से बातचीत की है. देश के किसी मुख्य न्यायाधीश का इस तरह का कार्यक्रम पहली बार हुआ है. चीफ जस्टिस ने सैनिकों के त्याग की सराहना करते हुए कहा कि न्यायपालिका उनके हितों की रक्षा के लिए तत्पर है.

लद्दाखी भाषा में शुरुआत और अंत
चीफ जस्टिस ने अपने संबोधन की शुरुआत में ‘जय हिंद’ कहने के बाद लद्दाखी शब्द ‘जुले’ यानी सभी को नमस्कार कहा. उसी तरह अपने लगभग 12 मिनट के भाषण का अंत उन्होंने ‘थुक जे चे’ यानी आपका बहुत बहुत आभार कह कर किया.

‘देश के पहरेदार’
चीफ जस्टिस ने भारत की सीमाओं की रक्षा को महान सेवा बताया. उन्होंने सैनिकों को लोगों की शांतिपूर्ण नींद सुनिश्चित करने वाले ‘देश के पहरेदार’ कहा. उन्होंने खास तौर पर 1962 के रेजांग ला युद्ध में मेजर शैतान सिंह भाटी और 13 कुमाऊं की चार्ली कंपनी के बलिदान की चर्चा की. भावुक शब्दों में जस्टिस सूर्य कांत ने कहा कि मेजर भाटी के नेतृत्व में अपने प्राणों की आहुति देने वाले सभी 114 सैनिक उनके अपने जन्मस्थान हरियाणा से थे.

‘न्याय पाने में बाधा का एहसास’
अपने संबोधन में चीफ जस्टिस ने कहा कि ऊंचे, दुर्गम और दूरदराज के इलाकों में देश की रक्षा के लिए तैनात सैनिकों को अपने और अपने परिवार के लिए न्याय पाने में समस्याएं आती हैं. उनके लिए यह संभव नहीं होता कि वह देश की ड्यूटी को छोड़ कर वकीलों के दफ्तर और कोर्ट के चक्कर लगाते रहें. संविधान का अनुच्छेद 39A न्याय तक हर व्यक्ति की पहुंच को व्यवस्था का कर्तव्य बनाता है. इसका लाभ सैनिकों को भी मिलना चाहिए.

वीर परिवार सहायता योजना
देश के मुख्य न्यायाधीश ने सैनिकों को जानकारी दी कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए ‘वीर परिवार सहायता योजना’ है. इसे राष्ट्रीय न्यायिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) में उनके कार्यकाल के दौरान शुरू किया गया था. इसका मकसद सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करना है.

किस तरह की जा रही है मदद?
देश की न्यायपालिका के प्रमुख ने सैनिकों को बताया कि देश के हर जिले में डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विस ऑथोरिटी है. हर कोर्ट में भी उसके दफ्तर हैं. उन्हें सैनिकों के परिवार की कानूनी सहायता के निर्देश दिए गए हैं. देश भर में 438 विधिक सेवा क्लीनिक बनाए गए हैं. इनमें सभी 34 राज्य सैनिक बोर्ड शामिल हैं. इसके तहत 1,123 लोगों की टीम है. इनमें 378 लोग सेना की पृष्ठभूमि से हैं. यह टीम संपत्ति विवाद, वैवाहिक मामले, बच्चों के स्कूल में प्रवेश, माता-पिता को वरिष्ठ नागरिक का प्रमाणपत्र दिलाने जैसे कई मामलों में मदद करती है. 31 दिसंबर 2025 तक इस योजना के तहत 14,929 लोगों को सहायता दी गई है.

नई कोर्ट इमारतों का उद्घाटन
अपने 2 दिन के लद्दाख दौरे में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने लेह और कारगिल में नए जिला अदालत परिसरों का भी उद्घाटन किया. इस दौरान उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र महज भारत के नक्शे के दूरदराज के इलाके नहीं हैं. यह राष्ट्र का अभिन्न हिस्सा हैं. यहां के लोगों तक न्याय पहुंचाना न्यायपालिका का कर्तव्य है.

 

यह भी पढ़ें:-
Weather Forecast: अप्रैल भी रहेगा ठंडा, नहीं पड़ेगी गर्मी, IMD ने जारी किया अलर्ट, आज दिल्ली समेत देश में कहां-कहां होगी बारिश, जानें

AZMI DESK

Related Articles

Back to top button
WhatsApp Join Group!