तमिलनाडु चुनाव से पहले हाई-टेक कैंपेन ‘रथ’ की बंपर डिमांड, LED-साउंड-डिजिटल स्क्रीन से सड़कों पर छिड़ी सियासी टेक जंग

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, सियासी मुकाबले का रंग अब सिर्फ रैलियों और पोस्टरों तक सीमित नहीं रहा. इस बार चुनावी मैदान में सबसे ज्यादा चर्चा कस्टमाइज्ड प्रचार वाहनों की है, जो तकनीक और रणनीति का नया संगम बनकर उभरे हैं.
तिरुचिरापल्ली समेत कई जिलों में इन हाई-टेक प्रचार वाहनों की मांग तेजी से बढ़ी है. स्थानीय फैब्रिकेटर्स और मॉडिफिकेशन टीमों के मुताबिक, उम्मीदवार अब अपने प्रचार के लिए ऐसे वाहनों को प्राथमिकता दे रहे हैं जो चलते-फिरते डिजिटल मंच का काम करें.
Tiruchirappalli, Tamil Nadu: Senthil, who is doing the modification to the vehicles, says, “Demand has been steadily increasing, and we expect a further surge in orders in the coming days as candidates begin to finalise their campaign strategies ahead of the elections. We have… https://t.co/U2Roh1a0Lq pic.twitter.com/0YSra1raRb
— ANI (@ANI) March 26, 2026
एक वाहन मॉडिफिकेशन विशेषज्ञ ने बताया, “जैसे-जैसे उम्मीदवार अपनी चुनावी रणनीति तय कर रहे हैं, वैसे-वैसे हमारे पास ऑर्डर लगातार बढ़ रहे हैं.” उनका कहना है कि इन वाहनों में LED लाइटिंग, वायरलेस ऑडियो सिस्टम, एडवांस साउंड सेटअप और विजुअल डिस्प्ले लगाए जा रहे हैं ताकि संदेश ज्यादा प्रभावी तरीके से मतदाताओं तक पहुंचे.
टेक्नोलॉजी ने बदला चुनावी प्रचार का चेहरा
राजनीतिक प्रचार में तकनीक का यह बढ़ता इस्तेमाल सिर्फ दिखावे तक सीमित नहीं है. डिजिटल स्क्रीन और हाई-डेफिनिशन साउंड सिस्टम की मदद से उम्मीदवार अब अपने संदेश को गांव-गांव और मोहल्लों तक अधिक स्पष्टता और प्रभाव के साथ पहुंचा पा रहे हैं.
इन प्रचार वाहनों पर पार्टी के प्रतीक चिन्ह, नेताओं की बड़ी तस्वीरें और स्लोगन प्रमुखता से लगाए जा रहे हैं. इससे न सिर्फ ब्रांड विजिबिलिटी बढ़ती है, बल्कि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं का उत्साह भी बढ़ता है.
चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि मोबाइल कैंपेनिंग का यह ट्रेंड आने वाले वर्षों में भारतीय राजनीति की स्थायी रणनीति बन सकता है, क्योंकि इससे कम समय में ज्यादा मतदाताओं तक पहुंच संभव होती है.
गठबंधनों की सियासत और प्रचार की रफ्तार
चुनावी हलचल के बीच राजनीतिक गठबंधनों के समीकरण भी तेजी से बदल रहे हैं. AIADMK ने 234 में से 169 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है, जबकि बाकी सीटें सहयोगी दलों BJP और PMK के लिए छोड़ी गई हैं. पार्टी के घोषणा पत्र में महिला मुखियाओं को मासिक आर्थिक सहायता और महंगाई से राहत जैसे वादे शामिल हैं.
इस चुनाव में DMK-नेतृत्व वाले गठबंधन और AIADMK-नेतृत्व वाले NDA के बीच सीधी टक्कर मानी जा रही है. वहीं अभिनेता-से-राजनेता बने विजय की पार्टी इस मुकाबले को त्रिकोणीय बना सकती है.
वोटिंग से पहले प्रचार की अंतिम दौड़
तमिलनाडु में 23 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान होना है, जबकि मतगणना 4 मई को होगी। ऐसे में अगले कुछ हफ्ते प्रचार की दृष्टि से बेहद अहम हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि टेक्नोलॉजी-संचालित प्रचार वाहनों का बढ़ता चलन चुनावी रणनीति का गेम-चेंजर साबित हो सकता है. यह सिर्फ चुनाव जीतने की कोशिश नहीं, बल्कि राजनीति के बदलते डिजिटल दौर की कहानी भी है, जहां सियासत अब सड़कों पर चलती स्क्रीन और गूंजते स्पीकरों के जरिए मतदाताओं के दिल-दिमाग तक पहुंच रही है.



