सिलेंडर न मिलने से कामकाजी लोग हुए ‘सरेंडर’… लंबी-लंबी लाइनें लगने के बाद भी बुरा हाल, देशभर से ग्राउंड रिपोर्ट

दुनिया के एक कोने में छिड़ी जंग की तपिश अब उत्तराखंड की शांत वादियों और राजधानी देहरादून के घरों तक पहुंचने लगी है. पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और अस्थिरता का सीधा असर शहर की एलपीजी आपूर्ति पर पड़ा है. पिछले कुछ दिनों से देहरादून में रसोई गैस की भारी किल्लत देखी जा रही है, जिसने आम आदमी के चूल्हे की आग को संकट में डाल दिया है. आलम यह है कि लोग अब दफ्तर और काम छोड़कर गैस एजेंसियों और गोदामों के बाहर लंबी-लंबी कतारों में खड़े होने को मजबूर हैं.
बुकिंग के लिए ‘वेटिंग’ और सप्लाई का ‘टेंशन’
शहर में गैस की किल्लत ने डिजिटल इंडिया के दौर में भी लोगों को पुराने दिनों की याद दिला दी है. उपभोक्ताओं की सबसे बड़ी शिकायत गैस बुकिंग को लेकर है. कई लोग पूरे दिन मोबाइल नंबर मिलाते रह रहे हैं, लेकिन बुकिंग नंबर पर कॉल कनेक्ट ही नहीं हो पा रही है. तकनीकी दिक्कतों और सप्लाई चेन में आई बाधा के कारण बुकिंग की प्रक्रिया पूरी तरह चरमरा गई है. जिन लोगों की बुकिंग किसी तरह हो भी जा रही है, उनके घर तक सिलेंडर पहुंचने में हफ्ते भर से ज्यादा का समय लग रहा है.
ग्राउंड रिपोर्ट: “हफ्ते भर से इंतज़ार, फिर भी खाली है हाथ”
हमारे संवाददाता आलोक सेमवाल ने ग्राउंड जीरो पर जाकर लोगों की मुश्किलें सुनीं. स्थानीय निवासी अशोक ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि मैंने 5 तारीख को गैस बुक करवाई थी. आज एक हफ्ता गुजर चुका है, लेकिन सिलेंडर का कहीं अता-पता नहीं है. घर में गैस खत्म होने वाली है और एजेंसी पर पूछने जाओ तो कोई साफ जवाब नहीं मिलता. समझ नहीं आ रहा कि आखिर खाना कैसे बनेगा?
सरकारी तंत्र पर उठते सवाल
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर भारत सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय इस संकट से निपटने के लिए क्या ठोस कदम उठा रहे हैं? क्या विकल्प तलाशे जा रहे हैं ताकि युद्ध जैसी बाहरी परिस्थितियों का असर सीधे देश के आम नागरिक की थाली पर न पड़े? फिलहाल, देहरादून की जनता को केवल आश्वासनों का सहारा है, जबकि धरातल पर गैस सिलेंडर की तलाश में लंबी कतारें और खाली होते बटुए एक अलग ही कहानी बयां कर रहे हैं. प्रशासन को चाहिए कि वह जल्द से जल्द वितरण व्यवस्था को सुधारे और कालाबाजारी की संभावनाओं पर लगाम लगाए.
सिलेंडर बुकिंग के बाद होने वाली समस्याओं को लेकर वाराणसी से रिपोर्ट
वाराणसी के पांडेपुर के निवासी दिनेश दीक्षित ने कहा कि बुधवार की रात उन्होंने मोबाइल फोन से करीब पांच बार बुकिंग के लिए कॉल किया, लेकिन अगले दिन सुबह बुकिंग सुनिश्चित होने का मैसेज आया. इसके बाद हैरानी तो तब हुई जब वह एजेंसी पहुंचे और उन्हें एलपीजी सिलेंडर नहीं मिला इसके बावजूद उनके मोबाइल मैसेज पर यह सुनिश्चित कर दिया गया कि उन्हें सिलेंडर डिलीवर कर दिया गया है. रिपोर्ट मिलने तक उन्हें सिलेंडर नहीं मिला है, जिसकी वजह से उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
एक अन्य मामले में वाराणसी के ही हुकूलगंज के रहने वाले आलोक कुमार विश्वकर्मा का कहना है कि उनके परिवार में करीब 18 से 20 दिन पर एक एलपीजी सिलेंडर की आवश्यकता होती है. वर्तमान नियम के अनुसार अब 25 दिन के अंतराल पर बुकिंग होगी. उनके द्वारा बुकिंग किए करीब तीन दिन का वक्त हो चुका है लेकिन अभी भी उन्हें एजेंसी और ट्राली वाले से सिलेंडर नहीं मिला है, जिसकी वजह से उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. सबसे बड़ी बात यह है की होली होने की वजह से उनका सिलेंडर भी जल्दी खत्म हो गया है और अब उन्हें अन्य संसाधन पर निर्भर होना पड़ रहा है.
पटना
जिला प्रशासन दावा कर रहा है कि कही भी घरेलू गैस सिलेंडर की कमी नहीं है और अगर कोई ब्लैक मार्केटिंग करता हैं तो उस पर कार्रवाई होगी लेकिन बड़ी बात यह है कि गैस की कमी है या नहीं. यह तो तब पता चलेगा जब गैस का नंबर लगेगा. पहले 15 दिनों में नंबर लगता था लेकिन अब 25 दिन बाद लग रहा है. गैस बुकिंग करने के लिए जो टोल फ्री मोबाइल नंबर दिया गया है वह काफी प्रयास के बाद भी नहीं लग रहा है. एक उपभोक्ता ने बताया कि गैस की कोई दिक्कत नहीं है लेकिन जब नंबर ही नहीं लगेगा तो गैस कैसे मिलेगा. गैस एजेंसी से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि सर्वर थोड़ा खराब चल रहा है एक-दो दिन में ठीक हो जाएगा.
नोएडा
अंतरराष्ट्रीय हालातों और आपूर्ति में आई बाधाओं का असर अब भारत के कई शहरों में दिखाई देने लगा है. नोएडा ग्रेटर नोएडा में भी रसोई गैस को लेकर लोगों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. कई उपभोक्ताओं का कहना है कि गैस सिलेंडर की बुकिंग तो कर दी गई है, लेकिन समय पर डिलीवरी नहीं हो रही है. वहीं कुछ लोगों का आरोप है कि बुकिंग ही नहीं हो पा रही, जिससे रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है.
नोएडा के निवासी राजेश ने बताया कि उन्होंने कई बार गैस सिलेंडर बुक करने की कोशिश की, लेकिन उनका सिलेंडर बुक ही नहीं हो पा रहा है. उन्होंने कहा कि कंज्यूमर नंबर से फोन करने पर भी कोई मैसेज नहीं आ रहा और न ही बुकिंग की पुष्टि हो पा रही है. इस समस्या के कारण लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और कई परिवार पिछले कई दिनों से परेशान हैं.
जयपुर
सरकार भले ही रसोई गैस की सप्लाई पटरी पर होने का दावा कर रही हो, लेकिन हकीकत यह है कि लोगों को तमाम तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. फिलहाल लोगों को सबसे ज्यादा दिक्कत नए सिलेंडर की बुकिंग को लेकर है. यह दिक्कत पिछले एक हफ्ते से लगातार बनी हुई है. बीते दो दिनों से तो सर्वर बिल्कुल भी काम नहीं कर रहा है. सर्वर ठप होने से लोगों की नई बुकिंग नहीं हो पा रही है. वह हेल्पलाइन और एजेंसीज के नंबर पर कॉल करते हैं तो ज्यादातर नंबर या तो स्विच ऑफ होते हैं या फिर उन पर कोई प्रॉपर रिस्पांस नहीं दिया जा रहा है.
बुकिंग को लेकर कोई तीन दिन से परेशान है तो कोई चार और पांच दिन से. ज्यादातर उपभोक्ताओं का झगड़ा इस बात को लेकर हो रहा है कि सरकार की तरफ से बताया गया है की अगली बुकिंग 25 दिन बाद हो जाएगी, जबकि एजेंसियों के लोग जानकारी देते हैं कि 2 दिन पहले नियम बदल गया है और अब अगली बुकिंग 25 नहीं बल्कि 40 दिन बाद होगी.
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