‘रूसी महिला का पता लगाएं और पिता को बच्चे से मिलवाएं’, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को दिया निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (9 मार्च, 2026) को केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह उस बच्चे का पता लगाए, जिसे उसकी रूसी मां अपने साथ मॉस्को ले गई थी और बच्चे की उसके भारतीय पिता से वर्चुअली मुलाकात करवाए. इस बच्चे की कस्टडी का मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा था, लेकिन इसी दौरान रूसी महिला बच्चे को मॉस्को ले गई. महिला संपर्क में नहीं है इसलिए कोर्ट ने केंद्र को उसका पता लगाने का निर्देश दिया है.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि महिला और उसके बेटे के ठिकाने को गुप्त रखा जा सकता है और फिलहाल उन्हें भारत वापस लाने का कोई प्रयास न किया जाए. बेंच ने कहा कि नाबालिग बच्चे को उसके पिता से आभासी रूप से मिलाने के लिए राजनयिक प्रयास जारी रखे जाने चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट ने रूस में भारत के दूतावास से भी अनुरोध किया कि वह सीमित उद्देश्य से महिला और बच्चे का पता लगाने के लिए वहां के अधिकारियों से इस मामले पर बात करें. केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी कोर्ट में पेश हुईं. उन्होंने कोर्ट को बताया कि भारत और रूस के विदेश सचिवों की बैठक और इंटरपोल के ब्लू कॉर्नर नोटिस सहित कई प्रयासों के बावजूद बच्चे का पता लगाने में कोई खास प्रगति नहीं हुई है.
साल 2019 से यह महिला भारत में रह रही थी. वह एक्स-1 वीजा पर भारत आई थी, जिसकी अवधि समाप्त हो चुकी थी. हालांकि, अदालती कार्यवाही के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने समय-समय पर वीजा की अवधि बढ़ाने का निर्देश दिया.
पिछले साल 21 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराया गया कि शायद रूसी महिला नाबालिग बेटे के साथ नेपाल सीमा के रास्ते देश छोड़कर चली गई है और शायद वह शारजाह के रास्ते अपने देश पहुंची है. सुप्रीम कोर्ट ने इस स्थिति को अस्वीकार्य बताया और अदालत की घोर अवमानना का मामला बताया.
बच्चे के पिता का आरोप है कि उनकी अलग रह रही पत्नी बच्चे की कस्टडी से जुड़े अदालती आदेश का पालन नहीं कर रही है. पति का कहना है कि वह नहीं जानता है कि इस वक्त उसकी पत्नी और बच्चा कहां रह रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने 22 मई, 2025 को निर्देश दिया था कि सोमवार, मंगलवार और बुधवार- तीन दिन बच्चा मां के पास रहेगा और बाकी के तीन दिन पिता के साथ रहेगा.



