Mamata Banerjee: CM पद से इस्तीफा न देने पर अड़ी थी ममता, राज्यपाल ने भंग की विधानसभा, ज्योतिष से जानें जिद्दी ग्रह

- पश्चिम बंगाल चुनाव में भाजपा की जीत, ममता बनर्जी को मिली हार।
- ममता बनर्जी ने चुनाव में धांधली का आरोप लगाया।
- विधानसभा भंग होने के साथ ममता का पद स्वतः समाप्त।
- ज्योतिषीय दृष्टिकोण से कुछ ग्रहों की अशुभ स्थिति कारण।
Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल में हाल ही में विधानसभा चुनाव (West Bengal Election) संपन्न हुए. लेकिन 4 मई 2026 को जब परिणाम आया तो, राजनीतिक गलियारों में जीत से ज्यादा हार की चर्चा होने लगी. भाजपा (BJP) ने बहुमत से अधिक सीट हासिल कर बंगाल में जीत का परचम लहराया.
वहीं लगातार तीन बार मुख्यमंत्री (Bengal CM) रहने के बाद ममता बनर्जी को करारी हार का सामना करना पड़ा. बीजेपी की जीत और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की हार के बाद पश्चिम बंगाल में कहीं खुशी और कहीं गम जैसा माहौल है. लेकिन ऐसा पहली बार देखा जा रहा है जब राजनीति में किसी पार्टी की जीत से ज्यादा हार चर्चा का विषय बना हुआ है.
बंगाल में बीजेपी की जीत से ज्यादा टीएमसी के हार के चर्चे
पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद भी राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है. शनिवार, 9 मई 2026 को बंगाल में नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह (West Bengal CM Oath ceremony) प्रस्तावित है. लेकिन टीएमसी की ममता बनर्जी इस बात पर अड़ी थीं कि, वह हारी नहीं हैं और मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगी.
इस विषय पर ममता का कहना है कि- हालिया चुनाव परिणामों के मद्देनजर वह इस्तीफा नहीं देंगी, क्योंकि उनका मानना है कि वोट जबरदस्ती लूटे गए और पूरी मतदान प्रक्रिया में धांधली हुई. इसलिए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव हारने के बाद भी उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा (Mamata Banerjee Resignation) देने से मना कर दिया है.
इस बीच ताजा जानकारी के अनुसार, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ने विधानसभा को भंग करने की घोषणा कर दी है. बता दें कि, गुरुवार 7 मई 2026 को ही पश्चिम बंगाल विधानसभा का पांच साल का कार्यकाल खत्म हो चुका था. ऐसे में संवैधानिक नियमों के तहत विधानसभा को भंग किया गया, जिससे की किसी प्रकार का कानूनी संकट पैदा न हो. अब ममता बनर्जी के इस्तीफा देने या ना देने से फर्क ही नहीं पड़ेगा.
चुनावी नतीजे के बाद भी ममता बनर्जी का इस्तीफा न देने की बात पर अड़ना और जिद्दी स्वभाव चारों ओर चर्चा का विषय बना हुआ है. अगर हम ज्योतिषीय दृष्टि से देखें तो, ज्योतिष व्यक्ति के भाव के साथ ही भावनाओं को भी व्यक्त करता है.
अच्छे-बुरे भावनाओं की पीछे ग्रहों की स्थिति जिम्मेदार होती है. जैसे मन यदि स्थिर हो कुंडली में चंद्रमा शुभ है और अस्थिर हो तो चंद्रमा अशुभ है. इसी तरह कुछ ग्रहों की अशुभ स्थिति व्यक्ति के स्वभान को कोधी, जिद्दी और कठोर बनाने में भूमिका निभाती है. आइए पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक और देश के जाने-माने प्रतिष्ठित ज्योतिषाचार्य डॉक्टर अनीष व्यास से जानते हैं इन ग्रहों के बारे में-
- मंगल (Mars)- कुंडली में मंगल ग्रह के दुष्प्रभाव से व्यक्ति में क्रोध भावना, अत्यधिक आवेग और आक्रोश, भावनाओं में उग्रता और संबंधों में तनाव जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है.
- शनि (Saturn)- शनि अगर शुभ न हो तो, इससे व्यक्ति में भय, अविश्वास, भावनात्मक दूरी, उदासी और अवसाद पैदा होता है,
- राहु (Rahu)- छाया ग्रह राहु की अशुभता से माया, भ्रम, आसक्ति और गलत संबंधों में फंसने जैसी भावनाएं पैदा होती हैं.
- केतु (Ketu)- कुंडली में केतु यदि शुभ न हो तो विरक्ति, असंतोष, भावनात्मक शून्यता और एकाकीपन जैसी भावनाओं को बढ़ाता है.
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