‘सरकार के लिए भी शर्म…’, महाराष्ट्र में नेता प्रतिपक्ष के पद को लेकर संजय राउत का BJP पर हमला

महाराष्ट्र में नेता प्रतिपक्ष के पद को लेकर एक बार फिर सियासत गरमा गई है. उद्धव ठाकरे गुट के सांसद संजय राउत ने इस मुद्दे पर सरकार को घेर लिया है. उन्होंने कहा है कि राज्य में दोनों सदनों में नेता प्रतिपक्ष नहीं है. यह देश की सरकार के लिए भी शर्म की बात है.
संजय राउत ने निशाना साधते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद जहां संभव हो, वहां नेता प्रतिपक्ष देने से बचा जाता है. उन्होंने आगे कहा कि राहुल गांधी को लोकसभा से बाहर निकालने का काम किया जाता है. इसे निर्लज्जता कहते हैं.
‘विपक्ष को उसका स्थान न देना गलत’
राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से सत्ता में आना और फिर विपक्ष को उसका स्थान न देना गलत है. अगर नेता प्रतिपक्ष दिया जाएगा तो वह सरकार को घेर लेगा, इसी डर से यह पद नहीं दिया जा रहा है. सरकार डरपोक है.
उन्होंने आगे कहा कि भास्कर जाधव के नाम पर मुहर लगा दी गई, लेकिन यह तय करने वाले आप कौन हैं? नेता प्रतिपक्ष का पद न देने के लिए साजिश की जा रही है. इतिहास में इसकी नोंद होगी.
विधानसभा अध्यक्ष को लेकर कही बड़ी बात
संजय राउत ने आगे कहा कि विधानसभा अध्यक्ष निष्पक्ष निर्णय लेंगे या नहीं, इस पर भी संदेह है. जमीन से जुड़े मामलों में जिन पर सवाल हैं, उनसे क्या उम्मीद की जाए? उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जाना चाहिए. लोकतंत्र और संविधान ने अधिकार दिए हैं, लेकिन परंपराएं तोड़ी जा रही हैं.
राज्यसभा सीट को लेकर क्या बोले संजय राउत
राज्यसभा सीट को लेकर संजय राउत ने कहा, “मेरी और आदित्य ठाकरे की भूमिका अलग नहीं है. हमारे 20 विधायक हैं, कांग्रेस और एनसीपी के 10-10 हैं. जो भी चुना जाएगा, वह महाविकास आघाड़ी का सांसद होगा.”
शरद पवार को लेकर क्या कहा?
संजय राउत ने आगे शरद पवार को लेकर कहा कि शरद पवार वरिष्ठ नेता हैं. उनकी इच्छा महत्वपूर्ण है. हम साथ बैठकर निर्णय लेंगे. शिवसेना सबसे बड़ा दल है, इसलिए पहला अधिकार हमारा है. 37 का कोटा है, 10-12 वोट अतिरिक्त दिख रहे हैं.
शरद पवार की उम्मीदवारी अभी घोषित नहीं हुई है. उम्मीदवार का नामांकन भरने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी. उन्होंने कहा कि दिल्ली से फैसले लिए जाते हैं, यह भी सभी को पता है. वहीं दादा भुसे के नाम पर बोलते हुए संजय राउत ने कहा कि दादा भुसे का मामला अलग है.
अद्वय हिरे अब भाजपा में हैं, केस चलाने की जिम्मेदारी उनकी है. मैंने माफी नहीं मांगी, सिर्फ खेद व्यक्त किया. दोनों अलग बातें हैं. मेरे खिलाफ यह पहला केस नहीं है, लेकिन कहां रुकना है यह समझना चाहिए.
चंद्रपुर में कांग्रेस मेयर पद को लेकर क्या बोले?
संजय राउत ने कहा कि मैं पालिका राजनीति में नहीं पड़ता. पालिका राजनीति अलग है, हमारा काम अलग है. चंद्रपुर में बीजेपी के साथ जाना पार्टी की नीति नहीं है. नगरसेवकों को पहले ही निर्देश दिए गए थे. कांग्रेस के हाथ से महापौर पद गया है, इसके लिए शिवसेना जिम्मेदार नहीं है.
ट्रेड डील को लेकर की ये मांग
संजय राउत ने ट्रेड डील को लेकर कहा कि हमारे सर्वोच्च न्यायालय को भी इससे सीख लेनी चाहिए. अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट से प्रेरणा लेनी चाहिए. अगर टैरिफ अवैध है तो उस पर आधारित ट्रेड डील भी रद्द होनी चाहिए. किसानों को इससे राहत मिलनी चाहिए.



