‘आज इनके बिना जीवन…’, माता-पिता और भाई की कविता सुन भावुक हुईं पूर्व सीएम वसुंधरा राजे

राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे शनिवार (21 फरवरी) को एक कार्यक्रम के दौरान अपने माता-पिता राजमाता विजयाराजे सिंधिया और जीवाजीराव सिंधिया समेत उनके भाई माधवराव सिंधिया पर लिखी कविता सुनकर भावुक हो गईं. उन्होंने बाद में कहा कि वह अपने जीवन में इन तीनों के योगदान को कभी नहीं भूल सकती.
वसुंधरा राजे ने झालावाड़ के खोयरा गांव स्थित मुक्तेश्वर मंदिर में सांसद दुष्यंत सिंह की पदयात्रा के तीसरे चरण की शुरुआत के लिए आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया. इस अवसर पर छात्रा अदिति शर्मा बकानी ने वसुंधरा राजे के परिवार पर कविता पढ़ी तो पूर्व मुख्यमंत्री भावुक हो गईं. अचानक भावुक होने के बाद भरी सभा में मच पर ही आंसू छलक पड़े.
वसुंधरा राजे ने सोशल मीडिया पर साझा की घटना
वसुंधरा राजे ने अपने फेसबुक अकाउंट पर लिखा कि खोयरा (खानपुर) स्थित मुक्तेश्वर मंदिर परिसर में आयोजित सांसद दुष्यंत सिंह की पद यात्रा के शुभारंभ समारोह में शामिल हुई. तीसरे चरण की इस पदयात्रा के अवसर पर अदिति शर्मा ने एक कविता पढ़ी, जिसमें मेरे संपूर्ण परिवार, मेरे शासन करने के तरीके और योजनाओं के बारे में उल्लेख था.
‘लोगों से दल का नहीं दिल का रिश्ता’
मां राजमाता विजय राजे सिंधिया, पिता जीवाजी राव सिंधिया और भाई माधव राव सिंधिया पर लिखी कविता सुन अपने आंसू रोक नहीं पाई. मेरे जीवन में इन तीनों के योगदान को मैं कभी नहीं भूल सकती. आज इनके बिना जीवन बहुत सूना लगता है. उन्होंने आगे लिखा कि मैं बहुत भावुक हूं, मुझे धन-दौलत नहीं जनता रूपी परिवार के प्यार की जरूरत है, जो मुझे सर्वाधिक मिल रहा है. मेरा लोगों से दल का नहीं, दिल का रिश्ता है.
‘आज इनके बिना जीवन सूना लगता है’
वसुंधरा राजे ने कविता सुनने के बाद में भरे गले से कहा कि मेरे जीवन में माता-पिता और भाई तीनों के योगदान को मैं कभी नहीं भूल सकती. आज इनके बिना जीवन बहुत सूना लगता है. पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा कि उनके माता-पिता और भाई अब इस दुनिया में नहीं है. उन्होंने कहा कि जब भी उनकी याद आती है तो वह लोगों से मिल रहे प्यार में उन्हें खोजने लगती हैं और अहसास करती हैं कि इन्हीं में मेरे खोए हुए परिजन हैं.
बेटे की पदयात्रा को लेकर क्या कहा?
वसुंधरा राजे ने अपने पुत्र सांसद दुष्यंत सिंह की पदयात्रा को लेकर कहा कि इस यात्रा के कोई राजनीतिक मायने नहीं है और यह यात्रा विकास के मार्ग पर चलने की और सबके साथ रहने की है. सबके साथ रहने की. सबके मन की बात जानने की. सबके सपनों को साकार करने की है.
उन्होंने आगे लिखा कि यह यात्रा कोई साधारण यात्रा नहीं है, यह आपके क्षेत्र की खुशहाली की यात्रा है. लोगों को गले लगाने की यात्रा है. उनकी तकलीफ जानकर उसका निदान करने का प्रयास करने की यात्रा है. जिसका लक्ष्य सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास है.



