मुंबई में अवैध घुसपैठ पर बड़ा एक्शन, 3 साल में 1758 बांग्लादेशी पकड़े गए, कितने हुए डिपोर्ट

मुंबई पुलिस शहर में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ लगातार सख्त अभियान चला रही है. पुलिस के मुताबिक पिछले तीन वर्षों में कुल 1758 बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा गया, जिनमें से 1283 को डिपोर्ट कर बांग्लादेश भेजा जा चुका है.
मुंबई पुलिस के ज्वाइंट कमिश्नर (लॉ एंड आर्डर) सत्यनारायण चौधरी ने बताया कि 1 जनवरी से 20 फरवरी तक इस वर्ष 113 बांग्लादेशी नागरिकों को कस्टडी में लिया गया है. इनमें से 27 को अब तक डिपोर्ट किया जा चुका है, जबकि बाकी को भेजने की प्रक्रिया जारी है.
पुलिस और इंटेलिजेंस विभाग जुटा रहे जानकारी- ज्वाइंट कमिश्नर
सत्यनारायण चौधरी ने आगे बताया कि इस कार्रवाई के लिए स्थानीय पुलिस और इंटेलिजेंस विभाग खुफिया तरीके से लगातार जानकारी जुटा रहे हैं. इनपुट के आधार पर अलग-अलग इलाकों में कार्रवाई की जा रही है.
2025 में 1100 बांग्लादेशी नागरिकों को डिपोर्ट किया गया
पुलिस आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में 1100 बांग्लादेशी नागरिकों को डिपोर्ट किया गया था. उस वर्ष 150 मामले दर्ज किए गए थे, जिनमें 224 आरोपी शामिल हैं. ये मामले फिलहाल अदालत में लंबित हैं और न्यायालय के आदेश के बाद आगे की डिपोर्टेशन प्रक्रिया पूरी की जाएगी. वहीं वर्ष 2024 में 156 बांग्लादेशी नागरिकों को डिपोर्ट किया गया था. उस साल 165 मामले दर्ज किए गए थे, जिनमें लगभग उतने ही बांग्लादेशी नागरिक आरोपी हैं. कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें भी बांग्लादेश भेजा जाएगा.
बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान करना बड़ी जिम्मेदारी- पुलिस
चौधरी ने आगे बताया कि अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और कानून व्यवस्था से कोई समझौता नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा की बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान करना और उन्हें बांग्लादेश भेजना कहने में आसान लगता होगा पर यह बहुत बड़ी जिम्मेदारी है, कई बार हमें बांग्लादेशियों के होने के इनपुट्स मिलते हैं हम उन इनपुट्स को वेरिफाई करते हैं और पूरी तरह से आश्वस्त होने के बाद ही अगला कदम उठाते हैं.
हर कार्रवाई करने से पहले बेहतर तरीके से वेरिफिकेशन- पुलिस
पुलिस अधिकारी आगे कहा, ”हमें यह भी डर होता है कि गलती से भी कोई गलत जानकारी पर एक्शन ले लिया तो सिर्फ एक शख्स परेशान नहीं होगा बल्कि उसका पूरा परिवार परेशान हो जायेगा.” एक उदाहरण देते हुए चौधरी ने बताया कि बांग्लादेशी होने की एक जानकारी हमारी टीम को मिली थी हमने एक्शन लेने में जल्दबाजी नहीं की बल्कि हम उसके गांव गए जहां हमें उसके पूर्वजों की जानकारी मिली और उसके पुराने दस्तावेज से उसके खेत की जानकारी मिली जिसके बाद हमने उसपर कोई करवाई नहीं की. यह बताने के पीछे का मकसद यह है कि मैं बता सकूं की एक एक कार्रवाई करने से पहले हम कितना और किस हद तक वेरिफिकेशन करते हैं.”



