सिख गुरुओं पर टिप्पणी मामले में पंजाब सरकार का दिल्ली विधानसभा सचिवालय को पत्र, ‘बदला हुआ वीडियो सदन का…’

पंजाब में भगवंत मान की सरकार के गृह विभाग ने दिल्ली विधानसभा सचिवालय को पत्र भेजकर स्पष्ट किया है कि सिख गुरुओं को लेकर कथित टिप्पणी से जुड़े मामले में सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो क्लिप को विधानसभा की आधिकारिक कार्यवाही नहीं माना जा सकता. पत्र में ये भी जिक्र है कि ये मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए शिकायत, तकनीकी रिपोर्ट और फॉरेंसिक रिपोर्ट जैसी जांच से जुड़ी फाइलें शेयर नहीं की जा सकतीं हैं.
पंजाब सरकार ने अपने पत्र में कहा, ”कटी-छंटी, बदली हुई या कैप्शन जोड़कर सोशल मीडिया पर अलग से चलाए जा रहे वीडियो को न तो सदन का रिकॉर्ड माना जा सकता है और न ही उसे सदन की अधिकृत प्रकाशन सामग्री कहा जा सकता है.”
पंजाब के एडवोकेट जनरल ने क्या कहा?
पंजाब के एडवोकेट जनरल की कानूनी राय के अनुसार, सदन के बाहर बनाए या बदले गए वीडियो पर विधानसभा विशेषाधिकार लागू नहीं होता. सदन के बाहर किए गए कृत्यों पर आपराधिक कानून से छूट नहीं मिलती. सदन के बाहर हुए संज्ञेय अपराध पर दर्ज एफआईआर विशेषाधिकार का उल्लंघन नहीं है. किसी अन्य राज्य में दर्ज एफआईआर से जुड़े दस्तावेज मांगने का अधिकार विधानसभा सचिवालय के पास नहीं है.
स्पीकर की जानकारी के लिए भेजी गई FIR कॉपी
पत्र में यह भी कहा गया है कि मामला इस समय न्यायालय में विचाराधीन (सब-ज्यूडिस) है, इसलिए शिकायत, तकनीकी रिपोर्ट और फॉरेंसिक रिपोर्ट जैसी जांच से जुड़ी फाइलें साझा नहीं की जा सकतीं. हालांकि, स्पीकर की जानकारी के लिए एफआईआर की कॉपी भेजी गई है. पंजाब सरकार ने दिल्ली विधानसभा से आग्रह किया है कि कानूनी स्थिति को देखते हुए इस मामले में प्रस्तावित कार्यवाही पर पुनर्विचार किया जाए और इसे बंद किया जाए.
पंजाब सरकार का साफ संदेश
पंजाब सरकार का साफ तौर से कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल बदला हुआ वीडियो सदन का रिकॉर्ड नहीं है, सदन के बाहर के कृत्यों पर कानून लागू होगा और एफआईआर दर्ज होना विशेषाधिकार हनन नहीं माना जाएगा.



