Azamgarh news :उत्तर प्रदेश का 2026-27 का बजट केवल आंकड़ों का मायाजाल, धरातल पर योजनाएं शून्य: शाह आलम (गुड्डू जमाली)


आजमगढ़ ब्यूरो चीफ राकेश श्रीवास्तव
लखनऊ/आजमगढ़
उत्तर प्रदेश विधान परिषद में वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट सत्र के दौरान माननीय सदस्य शाह आलम (गुड्डू जमाली) ने सरकार द्वारा पेश किए गए बजट का कड़ा विरोध किया। सदन को संबोधित करते हुए उन्होंने बजट को केवल आंकड़ों का दिखावा करार दिया और कहा कि आवंटित धनराशि का सही उपयोग जनता तक नहीं पहुंच पा रहा है।
अपने संबोधन में उन्होंने निम्नलिखित प्रमुख मुद्दे उठाए:
बजट आवंटन और खर्च में भारी अंतर: उन्होंने कहा कि सरकार ने 9 लाख करोड़ से अधिक का भारी-भरकम बजट पेश तो कर दिया, लेकिन विभागों द्वारा इसका सही उपयोग नहीं हो रहा है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य जैसे अति-महत्वपूर्ण विभाग में भी आवंटित बजट का मात्र लगभग 55% ही खर्च हो पाया है। यदि पैसा जनता की भलाई के लिए जमीन पर खर्च ही नहीं हो रहा है, तो इस बड़े बजट का क्या फायदा?
बुनकरों की उपेक्षा और मुबारकपुर विपणन केंद्र की बदहाली: बुनकरों के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए उन्होंने कहा कि हथकरघा विभाग का बजट भले ही 5 गुना बढ़ा दिया गया हो, लेकिन बुनकरों को कच्चे माल (Raw Material) के लिए कोई सहायता नहीं मिल रही है। आदरणीय अखिलेश यादव जी की सरकार के दौरान मुबारकपुर में बुनकरों के लिए करोड़ों की लागत से जो विपणन केंद्र (Marketing Centre) बनाया गया था, आज उसका कोई उपयोग नहीं हो रहा है। आज वह जगह मात्र एक बस डिपो और छुट्टा पशुओं का आश्रय स्थल बनकर रह गई है।
आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के साथ छलावा: उन्होंने सरकार की कथनी और करनी का विरोधाभास उजागर करते हुए कहा कि एक तरफ माननीय श्रम मंत्री सदन में कहते हैं कि न्यूनतम वेतन 16,000 रुपये से कम नहीं होना चाहिए, वहीं दूसरी तरफ सरकार खुद आउटसोर्सिंग कर्मचारियों से मात्र 9,600 रुपये में काम ले रही है।
आजमगढ़ की बदहाल सड़कें और किसानों की पीड़ा: आजमगढ़ की स्थानीय समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए उन्होंने सड़कों की जर्जर स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने भदुली से निजामाबाद व मिर्जापुर ब्लॉक से फूलपुर, माहुल, होते हुए कलान चौक तक खराब रोड का मुद्दा उठाया ज्ञात हो कि एक दिन पूर्व नियम 111 के अंतर्गत भी ये मुद्दा उठाया वहीं ब्लाक जहानागंज के शेरपुर बाजार से बैलाकोल फिनिहनी होते हुए बोंगरिया बाजार तक की खराब सड़कों का विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि खराब सड़कों और जाम के कारण किसानों को अपनी उपज ले जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता और सुरक्षा पर सवाल: प्रदेश में बन रहे एक्सप्रेसवे के लिए सरकार को बधाई देते हुए उन्होंने उनकी गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि पैसा बचाने के चक्कर में गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है। आगरा एक्सप्रेसवे की तुलना में वर्तमान एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता काफी खराब है, जिसके कारण आए दिन भीषण दुर्घटनाएं और मौतें हो रही हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि एक्सप्रेसवे का निर्माण अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों (International Safety Standards) के अनुसार किया जाए।
अंत में उन्होंने मांग की कि सरकार केवल कागजों पर बजट आवंटित करने के बजाय यह सुनिश्चित करे कि विभागों को समय पर पैसा मिले और अधिकारी पूरी ईमानदारी से उस पैसे को जनहित की योजनाओं में खर्च करें।



