राज्य

बिहार: शराबबंदी कानून को लेकर सियासत तेज, क्या ढील मिलेगी? CM नीतीश पर सबकी नजरें

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बड़ा लेते हुए अप्रैल 2016 में पूरे बिहार के अंदर पूर्ण शराबबंदी लागू की थी. साथ ही शराब बेचने और पीने वालों के लिए कड़े कानून भी लागू किए थे. उस वक्त महागठबंधन की सरकार थी और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव थे. लोगों की सेहत से जुड़े मामले पर उस वक्त विपक्ष में रही बीजेपी ने भी कोई सवाल नहीं उठाया. पूरे बिहार में पूर्ण शराबबंदी को 10 साल पूरे होने जा रहे हैं, लेकिन इसको लेकर कई बार राजनीति भी तेज हुई. कई जिलों में जहरीली शराब कई लोगों की मौत हुई और जब-जब घटना हुई तो विपक्ष सरकार पर हमलावर नजर आया. सरकार ने इस दौरान तीन बार समीक्षा भी की. अब होली के पहले एक बार फिर शराबबंदी कानून में समीक्षा करने की मांग उठने लगी है. यह मांग विपक्ष द्वारा नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष के द्वारा ही उठाई गई है.

एनडीए विधायक ने की समीक्षा की मांग

मंगलवार (17 फरवरी) को विधान सभा में उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा के मधुबनी विधायक माधव आनंद शराबबंदी कानून में समीक्षा करने का प्रस्ताव लाए. इस मांग के बाद शराबबंदी कानून को लेकर एक बार फिर बिहार में सियासत तेज हो गई है. इस बीच पक्ष और विपक्ष दोनों ओर के नेताओं की बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है.  

समीक्षा की मांग के वक्त सदन से बाहर निकलने पर जेडीयू कोटे के सीनियर मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा था कि बिहार में शराबबंदी सबकी सहमति से लागू हुई थी, लागू है और आगे भी लागू रहेगी. परन्तु शराबबंदी की समीक्षा किए जाने की मांग पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया.

जेडीयू प्रवक्ता ने दिया ये जवाब

जेडीयू प्रवक्ता अभिषेक झा ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि सरकार के द्वारा बनाए गए किसी भी कानून की समय-समय पर समीक्षा होती रही है. शराबंबदी की भी समीक्षा होती रही है. एक विधायक ने सदन में बयान दिया है कि समीक्षा होनी चाहिए. अब समीक्षा का मतलब उनके हिसाब से क्या है. ये तो वही बता सकते हैं. समीक्षा की आड़ में कोई ढिलाई चाहता है या उसे समाप्त करना चाहता है तो ये नहीं हो सकता है.

विपक्ष ने शराबबंदी कानून पर किया हमला

विपक्ष ने भी शराबबंदी कानून पर हमला किया. आरजेडी प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा था कि बिहार में शराबबंदी के नाम पर सिर्फ उगाही हो रही है. लोग जहरीली शराब पीकर मरते हैं. शराब माफियाओं की चांदी है, इस पर खुद नीतीश कुमार को अब जवाब देना चाहिए.

शराबबंदी कानून पर क्या बोली एआईएमआईएम?

AIMIM के विधायक अख्तरूल ईमान ने उसी दिन कहा था कि बिहार मैं शराबबंदी पूरी तरह से फेल हो चुकी है. शराब की पूरे बिहार में होम डिलीवरी हो रही है. सरकार और पुलिस का संरक्षण शराब माफिया को हासिल है. बिहार में नई पीढ़ी सूखे नशे की चपेट में आ गई है.

जीतन राम मांझी ने माधव आनंद की मांग पर क्या कहा?

शराब बंदी कानून पर चर्चा के बीच जीतन राम मांझी बुधवार (18 फरवरी) को गया में कहा कि हम तो शुरू से ही कहते रहे हैं कि शराबबंदी नीति गलत नहीं है. शराबबंदी होनी ही चाहिए, लेकिन क्रियान्वयन में गड़बड़ी हो रही है. उन्होंने कहा कि हम नीतीश कुमार से बार-बार बोल रहे हैं. हम धन्यवाद भी उनका देते हैं कि उन्होंने हमारे ही कहने पर तीसरी बार समीक्षा की. 

उन्होंने कहा कि तीसरी समीक्षा में प्रावधान है कि जो मामूली रूप से पीकर जा रहा हो तो उसे नहीं पकड़ना है. यहां तक कि पाव भर-आधा सेर घर लेकर जाने वाले को भी नहीं पकड़ना है. किंतु हमारे जो अधिकारी हैं, वह उसी को पकड़ते हैं. जीतन राम मांझी ने कहा कि हल्का-फुल्का शराब पीकर घर जाने वाले या फिर थोड़ी बहुत शराब लेकर घर जाने वाले को पुलिस वाले पकड़ रहे हैं. वहीं हजारों-लाखों लीटर शराब की जो तस्करी कर रहे हैं, उनको पैसा लेकर छोड़ा जा रहा है. इन बातों को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को समीक्षा करनी चाहिए.

‘बिहार सरकार को शराबबंदी से हो रही क्षति’

जीतन राम मांझी ने आगे कहा कि शराबबंदी से बिहार सरकार को बहुत आर्थिक क्षति हो रही है. इस पर भी सीएम को सोचना चाहिए. बिहार में शराबबंदी तो हो नहीं पा रही है, यहां होम डिलीवरी हो रही है. महंगी शराब बिहार में आ रही है और जनता का पैसा तो बाहर जा रहा है. इस पर विचार करना चाहिए.

खेसारी लाल यादव यादव ने भी मामले पर दी प्रतिक्रिया

वहीं अभिनेता और राजद नेता खेसारी लाल यादव ने शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग पर कहा, “बंद उन्होंने ही करवाई और समीक्षा भी वे ही करवा रहे हैं? इसे क्या कहें? कि चोरी भी हमने की है और चोर भी हम ही ढूंढ रहे हैं. वे किसकी समीक्षा करेंगे? लापरवाही भी उन्हीं की है. 

मामले पर क्या बोली बीजेपी?

गुरुवार (19 फरवरी) को  सदन में बीजेपी कोटे के मंत्री लखेंद्र पासवान ने शराबबंदी कानून में समीक्षा को लेकर कहा कि विकसित समृद्ध और स्वस्थ बिहार बनाने के लिए सरकार ने शराबबंदी लागू की. सरकार की नियत साफ है यह अति आवश्यक था. बिहार में पूरी सख्ती से लागू हो और उसमें कहीं कमी देखी जा रही है तो इस पर और ठोस कानून लाने के लिए सरकार समीक्षा करना चाहती है तो अच्छी बात है.

यह कोई नई बात नहीं है कि शराबबंदी कानून पर पक्ष और विपक्ष आमने-सामने रहे हो. पहले भी कई बार होता रहा है लेकिन शराब बंदी कानून पूरे बिहार में लागू है. लेकिन आए दिन शराब के बड़े-बड़े खेप भी पकड़े जा रहे हैं. 

कानून को लेकर क्या बोले मंत्री अशोक चौधरी?

कुछ दिनों पहले मंत्री अशोक चौधरी ने भी कहा था कि शराबबंदी कानून जब से लागू की गई है तब से अब तक 16 लाख लोगों को गिरफ्तार किया गया है. 10 लाख एफआईआर दर्ज हुई हैं. साढ़े चार करोड़ लीटर शराब नष्ट की गई है. 

कुल मिलाकर यह तय है कि बिहार में चोरी-छिपे शराब हर जगह पर मिलती रही है, लेकिन बीच-बीच में राजनीति भी तेज होती रही है. अब विधायक माधव आनंद की समीक्षा की मांग पर एक बार फिर शराबबंदी कानून राजनीतिक चर्चा में आ गया है.

AZMI DESK

Related Articles

Back to top button
WhatsApp Join Group!