सुनेत्रा पवार को NCP चीफ बनाने के पक्ष में नहीं 3 विधायक? रोहित पवार के दावे से सियासी खलबली

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद पार्टी के ज्यादातर विधायकों ने सुनेत्रा पवार को एनसीपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का समर्थन किया. दावा है कि कुछ लोगों ने इस प्रस्ताव के समर्थन में हस्ताक्षर नहीं किए. इस बारे में शरद पवार गुट के विधायक रोहित पवार ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने इस बात की ओर ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की कि एनसीपी के कुछ नेताओं ने सुनेत्रा पवार को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का समर्थन नहीं किया.
एनसीपी (एसपी) नेता रोहित पवार ने कहा, ”35 विधायकों ने और 32 पदाधिकारियों ने सुनेत्रा काकी को एनसीपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने के लिए हस्ताक्षर किए हैं, बाकी जिन्होंने साइन नहीं किए हैं, यह उनकी अपनी पार्टी में चर्चा का विषय है.”
उनसे सवाल पूछें जिन्होंने साइन नहीं किए- रोहित पवार
उन्होंने आगे कहा, ”आपको उन लोगों की लिस्ट देखनी चाहिए जिन्होंने हस्ताक्षर नहीं किए हैं, उनसे पूछना चाहिए कि उन्होंने हस्ताक्षर क्यों नहीं किए? जब सुनेत्रा काकी के नाम की घोषणा होगी और वह पार्टी की अध्यक्ष बनेंगी, तो हमें उन्हें बधाई देनी चाहिए. रोहित पवार ने बुधवार (18 फरवरी) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भी दावा किया था कि कुछ विधायकों ने सुनेत्रा पवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने के प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया.
NCP के दोनों गुटों के विलय पर क्या बोले रोहित पवार?
एनसीपी के दोनों गुटों के विलय के बारे में पूछे गए सवालों पर भी शरद पवार गुट के नेता रोहित पवार ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा, ”हम अजित दादा पवार से विलय को लेकर चर्चा कर रहे थे, लेकिन उनका अब वो इस दुनिया में नहीं है. अजित दादा और उनके द्वारा किए गए कार्यों को देखते हुए हम एक साथ आ रहे थे. उनके परिवार के किसी सदस्य को उस पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जाना चाहिए. सुनेत्रा काकी को महाराष्ट्र सरकार में डिप्टी सीएम बनाया गया है. वित्त विभाग को छोड़कर बाकी सभी विभाग सुनेत्रा काकी को दिए गए हैं.
रोहित पवार ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा करते हुए कहा था कि अजित दादा एनसीपी के नेतृत्व में कई बदलाव करना चाहते थे. उन्होंने कहा, ”वे चाहते थे कि कोई युवा प्रदेश अध्यक्ष बने. अमोल कोल्हे का नाम प्रस्तावित किया गया था, इसीलिए अमोल कोल्हे कई बैठकों में शामिल हुए थे. इस संबंध में चर्चाएं हो रही थीं. लेकिन आज दादा नहीं रहे, जिनके साथ हम सहज थे. उनकी भावनात्मक और राजनीतिक इच्छा गौण थी. वे चाहते थे कि दोनों पार्टी परिवार एक साथ आएं.”



