देहरादून के अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक में 6 महीने तक लेनदेन बंद, RBI ने क्यों लगाया ताला?

उत्तराखंड में देहरादून के दर्शन लाल चौक पर दशकों से लोगों का भरोसा जीतते आए अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड पर भारतीय रिजर्व बैंक ने अचानक ताला जड़ दिया है. 10 फरवरी 2026 से लागू इस आदेश के तहत बैंक में अगले छह महीनों तक कोई भी वित्तीय लेनदेन नहीं होगा. न पैसे जमा होंगे, न निकाले जा सकेंगे. इस एक फैसले ने करीब 9 हजार खाताधारकों की नींद उड़ा दी है, जिनके 98 करोड़ रुपए इस वक्त बैंक में अटके पड़े हैं.
RBI के चीफ जनरल मैनेजर बृज राज के आदेश के मुताबिक बैंक न कोई नया कर्ज दे सकता है, न पुराने लोन का नवीनीकरण कर सकता है. नई जमा स्वीकार करना, किसी को भुगतान करना और संपत्ति की बिक्री, सब पर रोक है. हां, कर्मचारियों की तनख्वाह, दफ्तर का किराया और बिजली बिल जैसे अनिवार्य खर्च सीमित शर्तों के साथ जारी रह सकते हैं. RBI ने यह भी साफ किया है कि यह बैंक का लाइसेंस रद्द करना नहीं, बल्कि जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा के लिए उठाया गया अस्थायी कदम है.
कहां से आई यह नौबत?
खाताधारकों के मुताबिक इस संकट की जड़ें साल 2013-14 में छिपी हैं, जब बैंक ने 38 जेसीबी मशीनों की फाइनेंसिंग के लिए करीब 38 करोड़ रुपए के कर्ज बांटे थे. वसूली नहीं हुई, खाते एनपीए में तब्दील हो गए और बैंक की माली हालत धीरे-धीरे खोखली होती चली गई. आज उस दौर की लापरवाही की कीमत वे लोग चुका रहे हैं जिनका उस फैसले से कोई लेना-देना नहीं था.
ठेकेदार भी मुश्किल में-कई करोड़ फंसे
सिर्फ आम खाताधारक ही नहीं, नगर निगम से जुड़े करीब 50 ठेकेदार भी इस झटके से बेहाल हैं. इनके भुगतान इसी बैंक के जरिए होते थे और अनुमान है कि अकेले इन ठेकेदारों के 30 से 35 करोड़ रुपए फंसे हैं. खातों के सीज होते ही उनके चल रहे प्रोजेक्ट भी ठप पड़ गए हैं.
खाताधारक अचिन गुप्ता के मुताबिक हमने कुछ गलत नहीं किया, फिर भी जिंदगी भर की कमाई अटकी पड़ी है. खाताधारकों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और सहकारिता मंत्री धन सिंह रावत से इस मामले में दखल देने की गुहार लगाई है.
बैंक का पक्ष-ग्राहक संयम रखें
बैंक के अध्यक्ष मयंक ममगाईं ने खाताधारकों से घबराने की अपील न करते हुए कहा कि यह रोक अस्थायी है और 2013-14 की कुछ पुरानी अनियमितताओं से जुड़ी है. उनके मुताबिक RBI से नई गाइडलाइन मिलते ही लेनदेन फिर शुरू हो जाएगा. लेकिन सवाल वही है जो हर खाताधारक पूछ रहा है कि 1973 से लोगों का विश्वास थामे इस बैंक में जमा उनकी पूंजी आखिर कब और कैसे वापस मिलेगी?



