राज्य

जम्मू: तारबंदी के पार वाली जमीन के लिए सीमा पर किसानों का प्रदर्शन, मालिकाना हक की मांग

जम्मू-कश्मीर में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा (IB) से सटे अरनिया सेक्टर में सोमवार (16 फरवरी) को किसानों का गुस्सा फूट पड़ा. ‘बॉर्डर किसान संघर्ष समिति’ के बैनर तले सैकड़ों किसानों ने सीमा पर हुई तारबंदी (Fencing) के पार स्थित अपनी जमीनों के मालिकाना हक और उचित मुआवजे की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया. किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी सुनवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा.

प्रदर्शन का नेतृत्व त्रेवा गांव की पूर्व सरपंच बलबीर कौर और विजय चौधरी ने किया. आक्रोशित किसानों ने त्रेवा चौक पर धरना देकर रास्ता ब्लॉक कर दिया, जिससे इलाके में काफी देर तक आवाजाही ठप रही. किसानों ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन और संबंधित विभागों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उन पर जानबूझकर परेशान करने का आरोप लगाया.

‘1947 और 65 में बसे थे, अब जमीन छिनने का डर’ 

पूर्व सरपंच बलबीर कौर ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि सीमा पर बसे ये किसान 1947 और 1965 में पाकिस्तान के अलग-अलग इलाकों से विस्थापित होकर यहां आए थे. सरकार ने ही उन्हें परिवार चलाने के लिए यह जमीनें दी थीं. वे दशकों से यहां खेती कर रहे हैं, लेकिन आज तक उन्हें मालिकाना हक नहीं दिया गया.

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन अब इन जमीनों को कभी कस्टोडियन विभाग, कभी वक्फ बोर्ड तो कभी सरकारी भूमि बताकर किसानों को गुमराह कर रहा है. किसानों का सवाल है कि अगर उनसे यह जमीन छीन ली गई, तो वे अपने बच्चों का पेट कैसे पालेंगे?

अनिश्चितता में जी रहे अन्नदाता 

पूर्व सरपंच विजय चौधरी ने कहा कि सरकार की तरफ से स्पष्टता की कमी ने किसानों को अनिश्चितता में डाल दिया है. तारबंदी के उस पार की जमीन पर खेती करना वैसे ही मुश्किल है, ऊपर से मुआवजे और हक न मिलने से किसान हताश हैं. प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को अल्टीमेटम दिया है कि अगर जल्द ही उनकी मांगों का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे.

AZMI DESK

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