यह तो ब्रिटिशों के गुलाम थे…मालेगांव में टीपू सुल्तान की फोटो पर सियासी घमासान में AIMIM की एंट्री

महाराष्ट्र के मालेगांव में डिप्टी मेयर ऑफिस में टीपू सुल्तान की फोटो लगाए जाने को लेकर सियासत गरमा गई है. इस मुद्दे पर एआईएमआईएम नेता वारिस पठान ने आरएसएस और बीजेपी पर जमकर निशाना साधा है. उनका बयान सामने आते ही राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है.
मुसलमानों ने जंग-ए-आजादी में अपनी जानें गवाई
एआईएमआईएम नेता वारिस पठान ने कहा, “आरएसएस और बीजेपी वाले उन सभी का विरोध करेंगे जिन्होंने जंग-ए-आजादी में हिस्सा लिया. यह मुसलमानों से नफरत क्यों करते हैं? क्योंकि हम वह लोग हैं जिन्होंने जंग-ए-आजादी में अपनी जानें गवाई हैं.” उनका कहना है कि आजादी की लड़ाई में कुर्बानी देने वालों को निशाना बनाया जा रहा है और इतिहास को लेकर जानबूझकर विवाद खड़ा किया जा रहा है.
जंग-ए-आजादी में आरएसएस कहां था?- पठान
AIMIM नेता वारिस पठान ने अपने बयान में आगे कहा, “जंग-ए-आजादी में आरएसएस कहां था? यह तो ब्रिटिशों के गुलाम थे. जब हम जानें गवां रहे थे तब यह उनके तलवे चाट रहे थे. मुझे आरएसएस के किन्हीं दो लोगों के नाम बताओ जो वंदे मातरम् पढ़ते हुए फांसी पर चढ़ गए या जेल चले गए. इन्हें कुछ काम नहीं केवल नफरत फैलानी है. अब क्या संविधान से भी निकाल देंगे? जो इतिहास है, आप उसे नहीं मिटा सकते.”
टीपू सुल्तान की फोटो पर क्यों हुआ विवाद?
मालेगांव के डिप्टी मेयर कार्यालय में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाए जाने के बाद कुछ हिंदूवादी संगठनों ने आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि इस तरह के कदम से विवाद पैदा होता है. वहीं एआईएमआईएम नेता वारिस पठान का कहना है कि टीपू सुल्तान को इतिहास में एक योद्धा के रूप में देखा जाता है और उनकी तस्वीर लगाने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए. फिलहाल यह मुद्दा राजनीतिक रंग ले चुका है और आने वाले दिनों में इस पर और बयानबाज़ी होने के आसार हैं.



