दिल्ली में बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी खबर, अब सरकार के इस खास प्रोजेक्ट से लाइट होगी सस्ती

दिल्ली में बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक नई और अहम शुरुआत होने जा रही है. राजधानी में अब लोग अपने घरों या इमारतों में लगे सोलर पैनल से बनी बिजली को एक-दूसरे से खरीद और बेच सकेंगे. इस व्यवस्था को लागू करने के लिए दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (DERC) ने पायलट प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है. यह पायलट योजना छह महीने के लिए लागू की जाएगी.
इस नई व्यवस्था को “पीयर-टू-पीयर एनर्जी ट्रेडिंग” कहा जा रहा है. आसान शब्दों में समझें तो अब जिन उपभोक्ताओं के पास सोलर पैनल हैं और उनके यहां जरूरत से ज्यादा बिजली बन रही है, वे उस अतिरिक्त बिजली को सीधे दूसरे उपभोक्ताओं को बेच सकेंगे. वहीं जिन लोगों को बिजली की जरूरत ज्यादा है, वे यह बिजली दूसरे उपभोक्ताओं से खरीद सकेंगे.
डीईआरसी द्वारा मंजूर यह पायलट योजना सीमित स्तर पर शुरू की जाएगी. इसका मकसद यह देखना है कि उपभोक्ताओं के बीच बिजली की खरीद-बिक्री का यह मॉडल कितना कारगर है और इससे आम लोगों को कितना फायदा मिलता है. अधिकारियों के मुताबिक, इस दौरान तकनीकी, कानूनी और व्यावहारिक पहलुओं का भी आकलन किया जाएगा.
बिजली मिल सकेगी सस्ती
इस योजना से बिजली बिल कम होने की उम्मीद है, जिन घरों में सोलर पैनल लगे हैं उन्हें अतिरिक्त कमाई का मौका मिलेगा. वहीं बिजली खरीदने वाले उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली मिल सकेगी. जिससे पर्यावरण को भी फायदा होगा, क्योंकि सौर ऊर्जा प्रदूषण रहित होती है.
दिल्ली सरकार पहले से ही सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कई ठोस कदम उठा चुकी है. राजधानी में नेट मीटरिंग सिस्टम पहले से लागू है, जिसके तहत उपभोक्ता अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेज सकते हैं. अब पीयर-टू-पीयर ट्रेडिंग से यह प्रक्रिया और सरल व सीधी हो जाएगी. यह पहल केंद्र सरकार की नवीकरणीय ऊर्जा नीति और हरित ऊर्जा लक्ष्यों के अनुरूप भी है.
ऊर्जा क्षेत्र में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी
यदि यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है तो आने वाले समय में इसे बड़े स्तर पर लागू किया जा सकता है. इससे दिल्ली में बिजली उत्पादन, वितरण और खपत के तरीके में नया बदलाव आ सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम न केवल उपभोक्ताओं को सशक्त बनाएगा, बल्कि ऊर्जा क्षेत्र में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा भी बढ़ाएगा. कुल मिलाकर दिल्ली में शुरू हो रही यह नई व्यवस्था आम जनता के लिए सस्ती, साफ और भरोसेमंद बिजली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.



