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‘कांग्रेस को वोट नहीं दिया तो…’, तेलंगाना के अश्वारावुपेट में कांग्रेस प्रत्याशी की मांग पर भड़के वोटर, सड़क पर किया प्रदर्शन

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तेलंगाना के भद्राद्री कोठागुडम जिले के अश्वारावुपेट म्युनिसिपैलिटी के 10वें वार्ड में चुनाव के बाद एक बेहद हैरतअंगेज मामला सामने आया है. कांग्रेस पार्टी के एक उम्मीदवार ने उन मतदाताओं से चुनाव से पहले बांटे गए कुकर और नकद पैसे वापस मांग लिए, जिन्होंने उन्हें वोट नहीं दिया था. इस घटना ने इलाके में हलचल मचा दी है. जिसके बाद गुस्से में आए मतदाताओं ने सड़क पर कुकर रखकर जमकर नारेबाजी की और उम्मीदवार पर सामाजिक बहिष्कार और अपमानित करने का आरोप लगाया. यह घटना चुनाव समाप्त होने के तुरंत बाद घटित हुई, जब यह तय हो चुका था कि किसे वोट मिले हैं.

पार्टी समर्थक और मतदाताओं के बीच हुई बहस

अश्वारावुपेट नगर पालिका के 10वें वार्ड में चुनाव का माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया, जब कांग्रेस उम्मीदवार के समर्थकों ने मतदाताओं के घर जाकर एक अजीब अल्टीमेटम जारी किया. उनका कहना था कि जिन लोगों ने पार्टी को वोट नहीं दिया, उन्हें चुनाव प्रचार के दौरान मिले सामान और पैसे तुरंत लौटा देने चाहिए. इस मांग को लेकर उम्मीदवार के समर्थक और स्थानीय मतदाताओं के बीच जमकर बहस छिड़ गई.

क्या हम बिकाऊ माल हैं?– स्थानीय मतदाता

घटनास्थल पर मौजूद मतदाताओं ने बताया कि चुनाव से पहले उन्हें वोट हासिल करने के लिए कुकर और पैसे दिए गए थे, लेकिन जब वोटिंग हुई और परिणामों का रुख साफ होने लगा, तो उम्मीदवार की टीम ने अपनी नाकामयाबी का गुस्सा मतदाताओं पर निकाला. सड़क पर उतरे मतदाताओं ने कुकर जमा कर दिए और तेज नारेबाजी की. एक मतदाता ने गुस्से में कहा, ‘हमसे पैसे और कुकर मांग रहे हैं, क्या हम बिकाऊ माल हैं? जब वोट नहीं मिला तो हमें अपमानित क्यों कर रहे हैं? क्या लोकतंत्र में वोट देना हमारी मर्जी नहीं है?’

वोटरों को दिया हुआ सामान वापस मांगना शर्मसार करने वाली बात

तेलंगाना में नगर पालिका चुनावों में अक्सर गरमागरम बहसें देखने को मिलती है, लेकिन बंटवारे के सामान को वापस मांगना एक बेहद दुर्लभ और शर्मनाक घटना है. यह मामला राजनीतिक नैतिकता के घटते स्तर को दर्शाता है. अश्वारावुपेट जैसे इलाकों में जहां पारिवारिक राजनीति और स्थानीय कनेक्शन अहम होते हैं, वहां यह घटना कांग्रेस के लिए भी शर्मसार करने वाली साबित हो सकती है. पिछले कुछ वक्त में चुनाव आयोग ने ‘नोट फॉर वोट’ पर कड़ी कार्रवाई की थी, लेकिन चुनाव के बाद ‘सामान वापसी’ का यह नया नुस्खा राजनीतिक शिष्टाचार के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा करता है.

चुनाव आयोग को करनी चाहिए कार्रवाई

इस पूरे प्रकरण में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि राजनीतिक दलों को यह कैसे पता चल जाता है कि किसने किस को वोट किया या नहीं किया, क्योंकि मतदान कि प्रकिया को गुप्त रखा जाता है. अगर उम्मीदवार वोट के लिए मतदाताओं को कुछ भी देता है तो यह गलत है और चुनाव आयोग को इस मामले का संज्ञान लेते हुए इन उम्मीदवारों पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए.

पार्टी नेतृत्व घटना को लेकर क्या उठाएगा कदम?

मतदाताओं का गुस्सा जायज है, क्योंकि लोकतंत्र में वोट करना हर किसी का जन्मसिद्ध अधिकार होता है, कोई सौदा नहीं. अब यह देखने वाला है कि पार्टी का उच्च नेतृत्व इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या उम्मीदवार पर कोई कार्रवाई की जाती है. वर्तमान में स्थानीय पुलिस ने स्थिति पर नियंत्रण पा लिया है, लेकिन 10वें वार्ड का माहौल अभी भी गरम है.

AZMI DESK

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