हरिद्वार: मंदिरों में ड्रेस कोड लागू करने की मांग तेज, संत समाज ने कहा- शालीन आचरण जरूरी

धर्मनगरी हरिद्वार में एक बार फिर आस्था, परंपरा और मर्यादा को लेकर नई बहस छिड़ गई है. हर की पैड़ी पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक की मांग और चारधाम यात्रा में प्रतिबंध को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच अब मंदिरों में ड्रेस कोड लागू करने की मांग तेज हो गई है. संत समाज का कहना है कि देवस्थानों की पवित्रता बनाए रखने के लिए मर्यादित वेशभूषा और शालीन आचरण अनिवार्य किया जाना चाहिए.
दक्षेश्वर प्रजापति महादेव मंदिर के प्रबंधक और महानिर्वाणी अखाड़े के श्रीमहंत स्वामी रविंद्र पुरी महाराज ने इस मुद्दे पर स्पष्ट और सख्त रुख अपनाया है. उन्होंने कहा कि मंदिर कोई पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि तप, साधना और आध्यात्मिक साधना का केंद्र है. यहां आने वाला हर श्रद्धालु अपनी भावना, व्यवहार और वेशभूषा में पवित्रता और मर्यादा का पालन करे, यह आवश्यक है. उन्होंने कहा कि यदि लोकाचार की सीमाएं टूटेंगी तो धर्म की गरिमा भी प्रभावित होगी.
संबंधितों से ड्रेस कोड लागू करने की मांग
स्वामी रविंद्र पुरी महाराज ने मंदिर प्रबंधन समितियों, देवस्थानम बोर्ड और संत समाज से अपील की है कि इस विषय पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं और ड्रेस कोड को प्रभावी रूप से लागू किया जाए. उनका कहना है कि कई मंदिरों में श्रद्धालुओं के अनुचित परिधान और अनुशासनहीन व्यवहार की शिकायतें सामने आती रहती हैं, जिससे श्रद्धा का वातावरण प्रभावित होता है.
श्रद्धालुओं से शालीन वस्त्र पहनकर आने की अपील
दक्षेश्वर महादेव मंदिर परिसर में पहले से ही मर्यादित परिधान को लेकर बोर्ड लगाए गए हैं, जिनमें श्रद्धालुओं से शालीन वस्त्र पहनकर आने की अपील की गई है. अब इस पहल को हरिद्वार के अन्य प्रमुख मंदिरों और चारधाम यात्रा मार्ग के देवस्थानों में भी लागू करने की मांग उठ रही है.
इस मुद्दे ने धर्मनगरी में नई चर्चा को जन्म दिया है. समर्थकों का मानना है कि इससे मंदिरों की पवित्रता बनी रहेगी, वहीं कुछ लोग इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं. फिलहाल संत समाज की यह अपील प्रशासन और मंदिर समितियों के लिए एक महत्वपूर्ण विषय बन गई है.



