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लखनऊ | UPPCL Media विशेष रिपोर्ट
ऊर्जा क्षेत्र में उबलता असंतोष अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। एक ओर इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल–2025 के विरोध में अभियंता संघ ने “शक्ति भवन चलो” का आह्वान किया है, तो दूसरी ओर उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के 10 फरवरी 2026 के आधिकारिक पत्र ने स्पष्ट संकेत दिया है कि किसी भी प्रकार का आंदोलन या कार्य बहिष्कार “नियम विरुद्ध” माना जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, यदि आंदोलन तेज होता है तो प्रशासन आवश्यक सेवाएं अधिनियम (Essential Services Act) के तहत कड़े कदम उठा सकता है। इससे टकराव की स्थिति और गहराने की आशंका है।
प्रश्न सीधा है—क्या यह टकराव सिर्फ बिल के विरोध तक सीमित है, या फिर यह ऊर्जा क्षेत्र में बड़े बदलावों की भूमिका लिख रहा है?
📌 क्या है विवाद का मूल?
अभियंता संघ का आरोप है कि संसद के चालू बजट सत्र में प्रस्तावित इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल–2025 के माध्यम से—
- मल्टीपल लाइसेंसी व्यवस्था लागू होगी
- निजी कंपनियां सरकारी वितरण नेटवर्क का उपयोग करेंगी
- बिना स्वयं का नेटवर्क बनाए “शेयरिंग मॉडल” पर बिजली वितरण संभव होगा
- सरकारी डिस्कॉम की वित्तीय रीढ़ टूट सकती है
- वेतन भुगतान तक संकट में आ सकता है
संघ का दावा है—यह “प्रत्यक्ष निजीकरण” की शुरुआत है।
📑 UPPCL का पत्र: सख्त चेतावनी
10 फरवरी 2026 को जारी कॉरपोरेशन के पत्र (संख्या–367-आ0सं0/2026-48-ए0सं0/24) में स्पष्ट निर्देश हैं—
- 12 फरवरी को प्रस्तावित प्रदर्शन के बावजूद बिजली आपूर्ति सामान्य रखी जाए
- किसी भी कर्मचारी को अवकाश स्वीकृत न किया जाए
- आवश्यक सेवाओं के अनुरक्षण अधिनियम, 1966 के तहत हड़ताल प्रतिबंधित
- जिला प्रशासन/पुलिस से समन्वय सुनिश्चित किया जाए

अर्थात—ऊर्जा क्षेत्र को “Essential Service” घोषित कर किसी भी आंदोलन को अवैध ठहराने की तैयारी।
⚡ बड़ा सवाल: डर किसे है?
यदि अमेंडमेंट बिल वास्तव में उपभोक्ता हित में है, तो विरोध से घबराहट क्यों? यदि यह सुधार है, तो पारदर्शी संवाद क्यों नहीं?
और यदि यह निजीकरण का “शॉर्टकट” है, तो क्या कर्मचारियों की आशंका निराधार है?
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि मल्टीपल लाइसेंसी मॉडल में—
- राजस्व वाले शहरी उपभोक्ता निजी क्षेत्र की ओर शिफ्ट होंगे
- घाटे वाले ग्रामीण/सब्सिडी उपभोक्ता सरकारी डिस्कॉम पर ही रहेंगे
- क्रॉस-सब्सिडी का संतुलन बिगड़ेगा
यानी “मुनाफा निजी, बोझ सरकारी” का मॉडल!
🏢 शक्ति भवन बनेगा संघर्ष का केंद्र
महासचिव इं. जितेंद्र सिंह गुर्जर ने राजधानी लखनऊ में 12 फरवरी दोपहर 12 बजे शक्ति भवन पर प्रदर्शन का आह्वान किया है। अभियंताओं से अधीनस्थ कर्मचारियों सहित बड़ी संख्या में पहुंचने की अपील की गई है।
नारे भी तय हो चुके हैं—
“इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल 2025 वापस लो”
“12 फरवरी – शक्ति भवन चलो”
🧾 उपभोक्ता कहाँ खड़ा है?
यह संघर्ष केवल कर्मचारियों का नहीं है।
यदि डिस्कॉम वित्तीय संकट में जाती हैं—
- मेंटेनेंस प्रभावित होगा
- आउटेज बढ़ेंगे
- ग्रामीण क्षेत्र उपेक्षित होंगे
- स्मार्ट मीटर और प्रीपेड मॉडल की आक्रामकता बढ़ेगी
यानी अंततः उपभोक्ता ही असली दांव पर है।

🎯 UPPCL Media का सीधा सवाल
- क्या राज्य सरकार और प्रबंधन कर्मचारियों से औपचारिक वार्ता करेंगे?क्या बिल के प्रभाव पर श्वेत पत्र जारी होगा?
- क्या मल्टीपल लाइसेंसी मॉडल लागू होने से पहले वित्तीय सुरक्षा तंत्र तैयार है?
- यदि विरोध “नियम विरुद्ध” है, तो लोकतांत्रिक असहमति का मंच क्या है?
📢 ऊर्जा क्षेत्र में यह सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं—
यह नीति बनाम रोजगार, निजीकरण बनाम सार्वजनिक सेवा, और नियंत्रण बनाम संवाद का संघर्ष है।
12 फरवरी को शक्ति भवन पर जो भी होगा, वह आने वाले वर्षों की बिजली व्यवस्था की दिशा तय करेगा।
UPPCL Media इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।
✍️ विशेष संवाददाता
UPPCL Media | लखनऊ



