सुनेत्रा पवार का डिप्टी CM पद खतरे में, जानें क्यों उठा सवाल? NCP ने दिया जवाब

महाराष्ट्र में एनसीपी के अध्यक्ष सुनील तटकरे ने एबीपी माझा को दिए गए विशेष इंटरव्यू में सुनेत्रा पवार को डिप्टी सीएम बनाने समेत कई अहम मुद्दों पर खुलकर बात की है. सुनेत्रा पवार का उपमुख्यमंत्री पद खतरे में होने का दावा किया गया था. इन सभी चर्चाओं पर सुनील तटकरे ने प्रतिक्रिया दी. तटकरे ने कहा कि तकनीकी पहलुओं की जांच करने का राजनीतिक अनुभव हमें है.
उन्होंने कहा, ”कई वर्षों के राजनीतिक अनुभव के कारण हमें यह जानकारी है कि कौन शपथ ले सकता है, सदस्य न होने पर भी कोई व्यक्ति कितने समय तक पद पर रह सकता है. 1991 में अजित पवार का उदाहरण है, शरद पवार का भी उदाहरण हैं.”
अंजली दमानिया ने क्या दावा किया था?
दरअसल, सामाजिक कार्यकर्ता अंजली दमानिया ने दावा किया था कि सांसद पद से इस्तीफा देने के बाद जब तक राष्ट्रपति उस इस्तीफे को स्वीकार नहीं करते, तब तक दूसरा पद नहीं लिया जा सकता. दावे के मुताबिक, संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार सुनेत्रा पवार को पहले राज्यमंत्री या कैबिनेट मंत्री पद की शपथ लेनी चाहिए थी, क्योंकि उपमुख्यमंत्री पद संवैधानिक पद नहीं है. इसी कारण सुनेत्रा पवार का उपमुख्यमंत्री पद खतरे में होने का दावा किया गया था.
तात्कालिक नहीं, 72 घंटे बाद शपथविधि- सुनील तटकरे
सुनील तटकरे ने स्पष्ट किया कि दिवंगत नेता अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार ने तुरंत उपमुख्यमंत्री पद की शपथ नहीं ली. हमने 72 घंटे बाद शपथविधि किया, तात्कालिक रूप से नहीं. सरकारी शोक समाप्त होने के बाद सुनेत्रा पवार ने शपथ ली.”
विलय की चर्चा किसने और क्यों शुरू की- सुनील तटकरे
तटकरे ने फिर सवाल उठाया कि जब अजित पवार का शव अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था, तब विलय की चर्चा किसने और क्यों शुरू की? अंतिम संस्कार से पहले ही विलय को लेकर इंटरव्यू देने का उद्देश्य क्या था? सुनील तटकरे ने यह भी कहा, ”भाजपा के साथ स्थिर और विकासोन्मुख सरकार बननी चाहिए, ऐसी इच्छा अजित पवार ने 2019 में ही जताई थी.”
प्रफुल पटेल और मैं आलोचना के शिकार बने- सुनील तटकरे
एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की चर्चाओं पर पूछे गए सवाल पर सुनील तटकरे ने कहा, “आज सभी लोग विलय की चर्चा कर रहे हैं, लेकिन क्या सच में विलय होने वाला था? इस विषय पर मैं ज्यादा बोलना नहीं चाहता. जिस तरह का माहौल बनाया गया, उसमें प्रफुल्ल पटेल और मैं दोनों आलोचना के शिकार बने. सुनेत्रा भाभी ने जिस तरह खुद को संभालते हुए पार्टी को मजबूती देने और दादा द्वारा आगे बढ़ाए गए विचारों को आगे ले जाने के लिए यह कदम उठाया, वह हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है. विलय और इसके पीछे किसका क्या उद्देश्य था, इस पर मैं कुछ नहीं कहना चाहता.”



