देश

अंकिता भंडारी हत्याकांड में CBI की एंट्री, अज्ञात VIP के खिलाफ FIR दर्ज, किसकी बढ़ने वाली है मुश्किल?

Show Quick Read

Key points generated by AI, verified by newsroom

उत्तराखंड के अंकिता भंडारी हत्याकांड मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. इस बहुचर्चित प्रकरण में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अज्ञात वीआईपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है. दिल्ली स्थित सीबीआई की क्राइम ब्रांच शाखा संख्या दो में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद एजेंसी की विशेष जांच टीम देहरादून पहुंच चुकी है और मामले की गहन जांच शुरू कर दी गई है. सीबीआई की ओर से एफआईआर दर्ज किए जाने को मामले में अहम मोड़ माना जा रहा है.

2022 में अंकिता की कर दी गई थी हत्या

यह मामला सितंबर, 2022 का है, जब पौड़ी जिले की निवासी अंकिता भंडारी, जो ऋषिकेश स्थित वनांतरा रिसोर्ट में कार्यरत थी, की निर्मम हत्या कर दी गई थी. इस मामले में लंबी सुनवाई के बाद 30 मई, 2024 को जिला न्यायालय ने रिसोर्ट मालिक पुलकित आर्य समेत तीनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी.

हालांकि, जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया था कि अंकिता भंडारी पर एक वीआईपी को विशेष सेवा देने का दबाव बनाया गया था, लेकिन तत्कालीन SIT जांच में उस वीआईपी की पहचान सामने नहीं आ सकी थी.

अंकिता के माता-पिता ने CM से की थी CBI जांच की मांग

हाल के दिनों में यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में आया, जब पूर्व विधायक सुरेश राठौर और उर्मिला सनावर से जुड़े कथित वायरल ऑडियो सामने आए. इसके बाद प्रदेशभर में प्रदर्शन तेज हो गए और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठने लगी. इसी क्रम में अंकिता के माता-पिता ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से सीबीआई जांच की मांग की थी.

परिजनों की मांग को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने औपचारिक रूप से सीबीआई जांच की संस्तुति की. इसके बाद केंद्र सरकार की मंजूरी मिलने पर मामला सीबीआई को ट्रांसफर किया गया और अब एजेंसी ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

विपक्ष ने उठाया सवाल, तो सरकार ने दिया जवाब

सीबीआई जांच की घोषणा के बाद विपक्ष ने इसे केवल आंदोलन को शांत करने का कदम बताया था, लेकिन एफआईआर दर्ज होने और जांच शुरू होने के बाद सरकार का कहना है कि इससे यह साफ हो गया है कि सरकार इस मामले में पूरी गंभीरता और पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ रही है. सरकार का दावा है कि यह कदम विपक्ष के आरोपों का करारा जवाब है.

अब पूरे प्रदेश की निगाहें सीबीआई जांच पर टिकी हैं. अज्ञात वीआईपी की पहचान उजागर होगी या नहीं और अंकिता भंडारी को न्याय की पूरी प्रक्रिया मिलेगी या नहीं, इसका जवाब आने वाले दिनों में सामने आएगा.

यह भी पढ़ेंः जम्मू-कश्मीर के तीन दिवसीय दौरे पर जाएंगे गृह मंत्री अमित शाह, सुरक्षा स्थिति की करेंगे समीक्षा

AZMI DESK

Related Articles

Back to top button
WhatsApp Join Group!