अंता उपचुनाव में हार के बाद BJP में खुली जंग, नेता मोरपाल सुमन के आरोपों पर सियासी बवाल

राजस्थान के बारां जिले की अंता विधानसभा सीट पर नवंबर में हुए उपचुनाव में बीजेपी को करारी हार का सामना करना पड़ा. इस हार के बाद पार्टी के भीतर घमासान मच गया है. राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का बेहद करीबी माने जाने वाले बीजेपी प्रत्याशी रहे मोरपाल सुमन ने हार के बाद अपनी ही पार्टी के बड़े नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए हैं.
ओम बिरला समेत नेताओं पर लगाए आरोप
मोरपाल सुमन ने पार्टी नेतृत्व को एक चिट्ठी लिखी, जो बाद में मीडिया में भी सार्वजनिक हो गई. इस चिट्ठी में उन्होंने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला समेत पार्टी के कुछ बड़े नेताओं पर सीधे तौर पर हार का ठीकरा फोड़ा.
सुमन का आरोप है कि इन नेताओं ने पैसे खर्च कर उन्हें हराने और कांग्रेस प्रत्याशी को जिताने का काम किया. उन्होंने राजस्थान सरकार के मंत्री हीरालाल नागर और संगठन के कुछ पदाधिकारियों पर भी सवाल उठाए.
मोरपाल सुमन ने अपनी हार की समीक्षा करते हुए टिकट देने में हुई देरी पर भी नाराजगी जताई. उनका कहना था कि समय पर टिकट मिलता और संगठन सही ढंग से काम करता, तो नतीजे कुछ और हो सकते थे. उपचुनाव की काउंटिंग के दौरान ज्यादातर समय वह तीसरे नंबर पर रहे, जिससे उनकी नाराजगी और बढ़ गई.
पार्टी का सख्त रुख, नोटिस जारी
मामला सामने आने के बाद बीजेपी ने सख्त रुख अपनाया है. प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद मदन राठौड़ ने मोरपाल सुमन को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. नोटिस में उनसे तीन दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है.
पार्टी का कहना है कि सुमन ने बिना किसी ठोस आधार के पार्टी के बड़े नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए और आंतरिक पत्र को मीडिया में सार्वजनिक कर अनुशासनहीनता की.
बीजेपी के अंदर इस पूरे घटनाक्रम को बड़े नेताओं के बीच चल रही आपसी खींचतान के तौर पर देखा जा रहा है. माना जा रहा है कि मोरपाल सुमन के बहाने पार्टी के कुछ गुट एक-दूसरे पर निशाना साध रहे हैं. कारण बताओ नोटिस के बावजूद यह कलह फिलहाल थमती नजर नहीं आ रही.
कांग्रेस को मिला हमला बोलने का मौका
अंता उपचुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार और पूर्व मंत्री प्रमोद जैन भाया ने जीत दर्ज की थी. अब इस विवाद पर कांग्रेस ने चुटकी ली है. कांग्रेस के प्रदेश मीडिया प्रमुख और महासचिव स्वर्णिम चतुर्वेदी ने कहा कि बीजेपी नेताओं को आम जनता की समस्याओं से कोई मतलब नहीं है, वे सिर्फ सत्ता की लड़ाई में उलझे हुए हैं.



