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सुनेत्रा पवार बनीं महाराष्ट्र की डिप्टी CM, संवैधानिक पद न होते हुए भी राजनीति में क्यों मायने रखता है ये पद?

दिवंगत नेता अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार ने शनिवार (31 जनवरी) को महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली. वो महाराष्ट्र की 13वीं डिप्टी सीएम बनी हैं. सुनेत्रा पवार के डिप्टी सीएम की कुर्सी पर आसीन होने के साथ ही एक बार फिर इस पद को लेकर चर्चा हो रही है, जिसकी संविधान में कोई जगह नहीं है, लेकिन प्रदेश की सियासत में इसकी अहम भूमिका है. आइए समझने की कोशिश करते हैं कि डिप्टी सीएम का पद संवैधानिक न होते हुए भी किस तरह से राजनीति में इसका महत्वपूर्ण रोल है.

वास्तव में उपमुख्यमंत्री का संविधान में कहीं जिक्र नहीं है. ये सिर्फ एक कैबिनेट मंत्री होते हैं जिन्हें एक अतिरिक्त पदनाम दिया जाता है. व्यवहार में, महाराष्ट्र की गठबंधन-आधारित और गुट-प्रधान राजनीति में, यह पद सत्ता साझा करने, अलायंस के घटक दलों को मैनेज करने और सरकार के अंदर राजनीतिक प्रभाव दिखाने का एक अहम साधन बन गया है.

संवैधानिक दर्जा न होने के बावजूद पद क्यों अस्तित्व में है?

वैसे तो डिप्टी सीएम के पद का संवैधानिक महत्व नहीं है, फिर भी यह राजनीतिक कारणों से अस्तित्व में है. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक सरकारें गठबंधन सहयोगियों को संतुलित करने, दलों के भीतर प्रतिद्वंद्वी नेताओं को नियंत्रित करने, क्षेत्रों या समुदायों को प्रतिनिधित्व देने और सत्ता के बंटवारे का संकेत देने के लिए उपमुख्यमंत्री नियुक्त करती हैं. एकदलीय वर्चस्व के अंत के बाद गठबंधन सरकारों के अधिक प्रचलित होने के साथ, यह पद सरकार की औपचारिक संरचना को बदले बिना सत्ता के वितरण का एक व्यावहारिक तरीका बनकर उभरा है.

महाराष्ट्र में डिप्टी सीएम का पद अहम क्यों?

महाराष्ट्र में डिप्टी सीएम का पद अन्य कई राज्यों की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि राज्य में सत्ता की संरचना ही कुछ इस प्रकार है. महाराष्ट्र में लंबे वक्त तक गठबंधन सरकारों का शासन रहा है, जिससे स्थिरता के लिए सत्ता-साझाकरण व्यवस्था जरूरी हो गई है, इसलिए उपमुख्यमंत्रियों को अक्सर वित्त या गृह जैसे अहम पोर्टफोलियो दिए जाते हैं, जो उन्हें व्यय, कानून व्यवस्था और प्रशासन से संबंधित महत्वपूर्ण निर्णयों का प्रभारी बनाते हैं.

क्या उपमुख्यमंत्री CM को दरकिनार कर सकते हैं?

डिप्टी सीएम का पद संवैधानिक नहीं है. ऐसे में उपमुख्यमंत्री उस राज्य के मुख्यमंत्री को दरकिनार नहीं कर सकते हैं. कानूनी तौर पर, उपमुख्यमंत्री अन्य कैबिनेट मंत्रियों के बराबर होते हैं. मुख्यमंत्री सरकार के मुखिया बने रहते हैं, और उपमुख्यमंत्री को कोई विशेष संवैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं होते हैं. बता दें कि अजित पवार के विमान हादसे में निधन के बाद उनकी जगह पर पत्नी सुनेत्रा पवार को डिप्टी सीएम की बड़ी जिम्मेदारी मिली है. महायुति सरकार में सत्ता के बंटवारे को बैलेंस करने के लिए यह पद बेहद ही अहम है.

AZMI DESK

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