‘उनका कांग्रेस प्रेम फिर से जाग रहा’, हामिद अंसारी के लोदी-गजनी वाले बयान पर VHP भड़की, जानें क्या कहा?

भारत के दो बार उप- उपराष्ट्रपति रहे हामिद अंसारी के हालिया बयान ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है. अब इस पर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है. इस मुद्दे पर अब विश्व हिन्दू परिषद भी कूद गई है. उन पर कांग्रेस प्रेम फिर जागने को लेकर आलोचना की है.
VHP ने दी उपराष्ट्रपति के बयान पर प्रतिक्रिया
VHP के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि दो बार उपराष्ट्रपति रहे हामिद अंसारी भी गजनी जैसे 17 बार के आक्रांता को स्वदेशी बताते हैं. वह कहते हैं कि वह तो भारतीय था. सोमनाथ, मथुरा और नालंदा जैसे धर्म और ज्ञान के पवित्र स्तंभों को लूटने और नष्ट करने वाले दुष्ट, आक्रांत, हिंदू द्रोही और भारत विरोधी व्यक्ति का माहिमा-मंडन करना क्या एक पूर्व उपराष्ट्रपति को शोभा देता है.
ऐसा लगता है कि इनका कांग्रेस प्रेम फिर से जाग रहा है. लगता है कि ऐसे बयान देकर उन्हें कांग्रेस में पुनः प्रवेश की जल्दी है क्योंकि जब तक ऐसे आक्रांताओं का वे महिमा मंडल नहीं करेंगे, तब तक शायद कांग्रेस भी इनको वापस ना ले! इसलिए वे इस तरह के बयानों के लिए मजबूर हो रहे हैं.
पूर्व उपराष्ट्रपति अंसारी ने क्या कहा था, जिसपर मचा बवाल?
पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने हाल ही में एक इंटरव्यू दिया है. इसमें उन्हें चौंकाने वाला बयान दिया. उन्होंने कहा था कि जिन लोगों हम अपनी पाठ्यपुस्तकों में विदेशी आक्रमणकारी बताते हैं, चाहे वह लोदी हों, या गजनी, वह सभी भारतीय लुटेरे थे. वह बाहर से नहीं आए थे. राजनीतिक रूप से उन्हें विदेशी कहना सुविधाजनक हो सकता है. लेकिन वह विदेशी नहीं थे. बीजेपी ने भी उनके बयान पर प्रतिक्रिया दी है.
बीजेपी ने हामिद अंसारी के बयान पर क्या कहा?
बीजेपी प्रवक्ता सीआर केसवन ने X पर हामिद अंसारी का वीडियो शेयर कर लिखा, ‘आठवीं शताब्दी के आरंभिक इस्लामी आक्रमणों से लेकर मुगल शासन तक, हिंदू धर्म के पवित्र स्थलों को सुनियोजित तरीके से निशाना बनाया गया. बर्बर महमूद गजनी ने 11वीं शताब्दी में 17 बार भारत पर आक्रमण किया, मथुरा मंदिर को तबाह किया और सोमनाथ मंदिर के ज्योतिर्लिंग को तोड़ दिया. क्या नेहरू की कांग्रेस, जिसने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का पुरजोर विरोध किया था, ऐसी क्रूरता को सामान्य ठहराने की इन टिप्पणियों से सहमत है, जिसका उद्देश्य हमारी सनातन संस्कृति की नींव को ही नष्ट करना था?’



