KGMU परिसर में बनी मजारों को तोड़ने वाले नोटिस पर भड़के मदनी, अब सच्चाई आई सामने

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) परिसर में 6 मजारों को तोड़ने का नोटिस 23 मार्च को KGMU शासन द्वारा उन मजारों को दिया गया था. जिसके बाद अब इस मामले में राजनीति गर्म हो गई है. अब जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने KGMU प्रशासन को पत्र लिखकर शाहमीना शाह और हरमैन शाह की मजारों के बारे में 700 साल पुराना होने का दावा करते हुए उन मजारों को न तोड़ने की बात कही है. जमीयत ने कहा है कि यह लोगों की आस्था से जुड़ा हुआ यह प्रश्न है.
मौलाना महमूद मदनी ने ध्वस्तीकरण नोटिसों पर गहरी चिंता व्यक्त की है. उन्होंने कॉलेज प्रशासन को भ्रामक प्रचार की आड़ में वक्फ संपत्तियों को नियंत्रित करने वाले देश के कानूनों का उल्लंघन न करने की चेतावनी दी और ऐसे सभी नोटिस तत्काल वापस लेने की मांग की.
वहीं इसको लेकर एबीपी न्यूज की टीम जब मौके पर पहुंची और शाहमीना शाह की मजार पर जाकर वहां लोगों से बातचीत की. इस दौरान लोगों ने कहा कि इस मजार पर कोई नोटिस नहीं मिला है लेकिन पिछले साल हरमैन शाह की मजार के आसपास के चीजों को KGMU प्रशासन ने गलत तरीके से तोड़ा और बाकी जो मजारों को भी नोटिस दिया गया वह भी मजारें काफी पुरानी है और उनको गलत तरीके से तोड़ने का नोटिस दिया जा रहा है. शाहमीना शाह के खादिम नासिर मीनाई ने कहा हम इस मामले में कोर्ट जा रहे हैं.
हरमैन शाह और शाहमीना शाह की मजार को तोड़ने का नोटिस नहीं- केके सिंह
इस मामले में हमने केजीएमयू के प्रवक्ता केके सिंह से भी बातचीत की उनका कहना है कि हरमैन शाह और शाहमीना शाह की मजार को कोई तोड़ने का नोटिस नहीं दिया गया है. बाकी जिन 6 मजारों को नोटिस दिया गया इस पर उन्होंने दावा किया कि यह पिछले कुछ दशकों में यह मजारें बनी है और अवैध रूप से यह मजारें बनी हैं.
15 दिन के अंदर दिखाएं कागजात
हालांकि उन्होंने फिर भी कहा कि अगर इन मजारों से जुड़े हुए लोगों के पास इनसे जुड़े कागजात या इनसे जुड़ी वैधता का कोई पत्र है तो वह 15 दिन के अंदर दिखाएं नहीं तो विश्वविद्यालय प्रशासन कोर्ट के नियमानुसार कार्रवाई करेगा. अब देखना होगा कि जब यह मामला कोर्ट में जाता है तो आगे क्या एक्शन लिया जाता है या जमीयत द्वारा इस मामले में दखल देने के बाद क्या नया होता है.



