यूपी में दो साल में 1.08 लाख गुमशुदा, HC सख्त, ACS गृह और DGP तलब, 23 मार्च को अगली सुनवाई

उत्तर प्रदेश में बीते दो सालों में एक लाख से अधिक लोगों के लापता होने के मामलों को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सख्त रुख अपनाया है. गुरुवार (05 फरवरी) को गुमशुदा लोगों के मामलों की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पूरे रिकॉर्ड के साथ अपर मुख्य सचिव गृह और पुलिस महानिदेशक को अगली तारीख को तलब किया है.
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के संबंधित विभागों से लापता लोगों से जुड़े सभी आंकड़े और रिकॉर्ड पेश करने के निर्देश दिए हैं. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह मामला बेहद गंभीर और चिंताजनक है और इसमें प्रशासनिक जवाबदेही तय की जानी आवश्यक है.
1,08,300 लोगों के गुमशुदा होने की शिकायतें दर्ज
कोर्ट में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो वर्षों में प्रदेश में 1,08,300 लोगों के गुमशुदा होने की शिकायतें दर्ज हुईं, लेकिन पुलिस महज 9,700 लोगों को ही तलाश पाई. बाकी मामलों में प्रभावी कार्रवाई न होने पर कोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई. बता दें कि बुधवार को हाईकोर्ट ने इस मामले को स्वतः संज्ञान लेते हुए PIL दाखिल करने का आदेश दिया गया था.
23 मार्च को होगी अगली सुनवाई
गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई 23 मार्च को होगी, जिसमें अपर मुख्य सचिव गृह और डीजीपी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उपस्थित रहना अनिवार्य होगा. साथ ही यह भी कहा गया कि अगली तारीख पर सरकार को पूरी रिपोर्ट के साथ यह बताना होगा कि लापता लोगों की तलाश के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए.
हाई कोर्ट ने लिया था स्वत: संज्ञान
गौरतलब है कि बुधवार (04 फरवरी) को एक गुमशुदा व्यक्ति से संबंधित मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय के संज्ञान में जानकारी आई थी कि यूपी में पिछले लगभग दो सालों के दौरान 1,08,300 लोग लापता हो चुके हैं, जिनके संबंध में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की गई है. हालांकि इनमें से केवल 9,700 लोगों का ही अब तक पुलिस द्वारा पता लगाया जा सका है. जिसके बाद कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इस मामले को PIL के तौर पर दर्ज करते हुए सुनवाई के लिए कहा था.



