मुरादाबाद के किसान रघुपत सिंह को मरणोपरांत पद्मश्री, विलुप्त बीजों को फिर से उगाकर रचा इतिहास

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जनपद के बिलारी के रहने वाले किसान रघुपत सिंह को देश के सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म श्री से नवाजा गया है. लेकिन जब उनके नाम की घोषणा की गयी तो वे इस दुनिया में नहीं हैं. मरणोपरांत उनके बेटे सुरेन्द्र पाल सिंह पुरूस्कार ग्रहण करेंगे.
खेती-किसानी से देश-दुनिया में नाम कमाने वाले दिवंगत रघुपत सिंह ने कई विलुप्त प्रजातियों की सब्जियों को फिर से उगाया. उन्होंने बीजों का शोधन कर नए तरीके से लोगों को खेती करना सिखाया. जिससे किसानों की आय और लोगों की सेहत सुधरी.
रघुपत सिंह के खेती के प्रति समर्पण को देखते हुए भारत सरकार ने उनके नाम का चयन किया है. रघुपत सिंह के बाद अब उनकी तीनों संतानें भी उनके कार्य को आगे बढ़ा रहीं हैं. और खेती में नए-नए प्रयोग जारी हैं.
एक जुलाई 2025 में हो चुका निधन
किसान रघुपत सिंह के बेटे सुरेंद्र पाल सिंह ने बताया कि मेरे पिताजी 1 जुलाई 2025 को दिवंगत हो चुके हैं. मेरे पिताजी विलुप्त हो चुकी सब्जियों की खेती करते थे. इसके साथ ही कृषि के बीजों का शोधन करना और बीजों का शोधन करके यूनिवर्सिटी के लिए बीज का वितरण करना मेरे पिताजी का काम था. इसके साथ ही वह बीजों की नई प्रजाति भी बनाते थे. मेरे पिताजी जितनी भी विलुप्त हो चुकी सब्जियां हैं. उन सभी सब्जियों की खेती करते थे.
नई-नई किसमें पैदा करना जूनून था
सुरेन्द्र पाल ने बताया कि पिता जी नई-नई प्रजाति और अलग-अलग किस्म की खेती करते थे और अपने पास उनका संशोधन करके लोगों तक वह चीज पहुचाने का काम करते थे. वह इस कृषि के क्षेत्र में 1980 से लगे हुए थे. तभी से वह कृषि के क्षेत्र में नए-नए आविष्कार कर रहे थे. उन्होंने कहा कि दिल्ली, पंतनगर यूनिवर्सिटी सहित कई जगह से वह सम्मान भी पा चुके थे.
संतानें बढ़ा रहीं काम
सुर्नेद्र पाल सिंह ने जानकारी दी कि वो चार बहन भाई हैं. सभी चारों बहन भाई कृषि के क्षेत्र से ही जुड़े हुए हैं और अपने पिताजी के द्वारा सिखाए गए काम को आगे बढ़ाने में लगे हुए हैं. हमारे पिताजी भी लोगों को नई-नई खेती की ट्रेनिंग देते थे और अब हम भी उनके कारोबार को आगे बढ़ा रहे हैं. मेरे पिताजी और मैं बीज को संशोधन करने का काम करते थे. अब हमारे परिवार में काफी खुशी है कि हमें पदम श्री अवार्ड से नवाजा जाएगा.



