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‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर दंपत्ति से 14.84 करोड़ की ठगी, दिल्ली पुलिस ने 8 साइबर ठग दबोचे

डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों को डराकर करोड़ों रुपये ऐंठने वाले एक बड़े साइबर ठगी रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है. दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट ने इस गिरोह के 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि ये लोग खुद को CBI, पुलिस और अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को डिजिटल अरेस्ट में लेने की धमकी देते थे और फिर उनसे मोटी रकम वसूलते थे.

मामले की शुरुआत 24 दिसंबर 2025 को हुई. 77 साल की एक बुजुर्ग महिला के पास फोन आया. कॉल करने वाले ने कहा कि उनके नाम पर जारी एक सिम कार्ड मनी लॉन्ड्रिंग केस में इस्तेमाल हुआ है.

इसके बाद महिला को व्हाट्सऐप वीडियो कॉल पर जोड़ा गया, जहां आरोपी फर्जी CBI और पुलिस अधिकारी बनकर सामने आए. उन्होंने महिला को गिरफ्तारी वारंट तक दिखाया और डर का माहौल बना दिया.

वीडियो कॉल पर ‘डिजिटल गिरफ्तारी’

आरोपियों ने महिला और उनके पति को लगातार वीडियो कॉल पर रखा. फर्जी कोर्ट की कार्यवाही करवाई गई और जान से मारने की धमकी दी गई. दंपती को किसी से संपर्क न करने और घर से बाहर न निकलने को कहा गया. फिर कहा गया कि जांच के लिए उनकी सारी रकम रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया के आदेश से बनाए गए खातों में जमा करनी होगी, जिसके बाद पैसा वापस मिल जाएगा.

8 ट्रांजैक्शन में 14.84 करोड़ की ठगी

डर के माहौल में बुजुर्ग दंपती ने अपनी एफडी, शेयर निवेश और जमा पूंजी मिलाकर कुल 14 करोड़ 84 लाख रुपये 8 अलग-अलग ट्रांजैक्शन में ट्रांसफर कर दिए. बाद में जब संपर्क टूट गया, तब उन्हें ठगी का एहसास हुआ.

शिकायत मिलने पर 10 जनवरी 2026 को IFSO थाने में केस दर्ज किया गया. पुलिस ने बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल ट्रेल की गहन जांच की. पता चला कि रकम कई म्यूल अकाउंट्स के जरिए घुमाई गई थी.

सबसे पहले गुजरात के वडोदरा से पटेल दिव्यांग को पकड़ा गया, जिसके खाते में करीब 4 करोड़ रुपये आए थे. इसके बाद गुजरात, उत्तर प्रदेश और ओडिशा में एक साथ छापेमारी कर बाकी आरोपियों को गिरफ्तार किया गया.

गिरफ्तार लोगों में NGO चलाने वाले, प्राइवेट नौकरी करने वाले, पुजारी और ट्यूशन पढ़ाने वाले भी शामिल हैं. ये सभी बैंक अकाउंट उपलब्ध कराने और पैसों को आगे ट्रांसफर करने का काम कर रहे थे. पुलिस ने 7 मोबाइल फोन और चेक बुक बरामद की हैं. जांच अभी जारी है और कंबोडिया व नेपाल से जुड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर सिंडिकेट के लिंक भी खंगाले जा रहे हैं.

AZMI DESK

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