‘सुखना झील विनाश की ओर बढ़ती जा रही’: नेता-बिल्डर गठजोड़ से चंडीगढ़ की झील को पहुंचे नुकसान पर चीफ जस्टिस की सख्त टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ और उसके आस-पास के बिल्डर माफिया को फटकार लगाई है. कोर्ट ने इस बात पर सवाल उठाए हैं कि प्रसिद्ध सुखना झील को क्यों नष्ट होने दिया जा रहा है? एक मामले को सुनते हुए चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने कहा, ‘सुखना झील को और कितना सुखाओगे? बिल्डर माफिया राजनीतिक समर्थन से काम कर रहा है. सुखना झील विनाश की ओर बढ़ती जा रही है.’
मामला सुखना झील से सटे सुखना वन्य अभ्यारण्य से जुड़ा है. इस संरक्षित क्षेत्र से सटे आवासीय इलाके में कई लोग इसका विरोध करते रहे हैं. ऐसी ही एक याचिका कोर्ट में रखी गई थी. मोहाली के नयागांव क्षेत्र के 3 याचिकाकर्ताओं ने यह मांग की है कि अभ्यारण से सिर्फ 100 मीटर की दूरी के क्षेत्र को इको सेंसेटिव जोन घोषित किया जाए. दूसरे वन क्षेत्रों की तरह कम से कम 1 किलोमीटर का इको सेंसेटिव जोन घोषित करना गलत है.
नई याचिका में कहा गया है कि 1 किलोमीटर का इको सेंसिटिव जोन कम से कम 2 लाख लोगों को प्रभावित करेगा. यह लोग सुखना वन्यजीव अभयारण्य के पंजाब की तरफ के गांवों में रहते हैं. इन याचिकाकर्ताओं की तरफ से कोर्ट से अनुरोध किया गया कि उन्हें भी लंबित मामले में पक्षकार बना लिया जाए. इसी अनुरोध पर चीफ जस्टिस ने यह टिप्पणी की. हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जब मामले की सुनवाई होगी, तो सभी को अपनी बात रखने का मौका दिया जाएगा.
मामला सुखना झील के ‘कैचमेंट एरिया’ के संरक्षण से जुड़ा है. वहां अतिक्रमण रोकने के लिए 2020 में निर्माणों को ढहाने का आदेश दिया गया था. इसके बाद नवंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने मोहाली के नाडा गांव के तरसेम लाल की याचिका पर पंजाब सरकार, चंडीगढ़ प्रशासन और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था. यह याचिका 1998 की उस अधिसूचना के खिलाफ थी जो सुखना वन्यजीव अभयारण्य से संबंधित है. मामला अभी कोर्ट में लंबित है. पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि वह उसके आदेश के मुताबिक इको सेंसेटिव जोन स्थापित करने को तैयार है.
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