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BMC मेयर पद के लिए रस्साकशी, बीजेपी-शिवसेना में चल रही ये चर्चा, क्या है उद्धव ठाकरे की रणनीति?

देश की सबसे अमीर महानगरपालिका, बीएमसी (BMC) में सत्ता की चाबी किसके पास होगी, इसे लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं. महायुति के भीतर ‘मेयर’ पद को लेकर खींचतान जारी है, वहीं उद्धव ठाकरे गुट भी अपने पार्षदों के आधिकारिक पंजीकरण की तैयारी में जुट गया है.

मुंबई महानगरपालिका के मेयर पद को लेकर बीजेपी और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के बीच चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है. शिवसेना ने मुंबई में बीजेपी की तुलना में कम सीटें जीती हैं, बावजूद इसके वह मेयर पद पर अपना दावा ठोक रही है. दूसरी ओर, बीजेपी इस बार अपना मेयर बनाकर मुंबई में नया इतिहास रचने की तैयारी में है. बीएमसी की वैधानिक समितियों पर कब्जे को लेकर भी दोनों दलों के बीच जबरदस्त ‘रस्सीखींच’ देखने को मिल रही है.

इस बीच, संभाजीनगर में महायुति के बीच पेंच फंसता नजर आ रहा है, जहाँ बैठक से शिवसेना के वरिष्ठ नेता नाराज होकर बाहर निकले. वहीं, शिवसेना नेता संजय निरुपम आज प्रेस वार्ता कर मौजूदा घटनाक्रम पर पार्टी का आधिकारिक रुख स्पष्ट करेंगे.

ठाकरे गुट कल करेगा गुट का पंजीकरण

उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) ने भी अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है. कल सुबह 10 बजे शिवसेना भवन में एकत्र होने के बाद पार्टी के सभी 65 नवनिर्वाचित नगरसेवक कोकण भवन, बेलापुर के लिए रवाना होंगे. वहां कोकण आयुक्त कार्यालय में शिवसेना (ठाकरे गुट) की ओर से आधिकारिक रूप से गुट का पंजीकरण (Group Registration) कराया जाएगा. कांग्रेस द्वारा पहले ही अपना गुट नेता नियुक्त किए जाने के बाद अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि क्या उद्धव ठाकरे भी कल ही अपने गुट नेता के नाम की घोषणा करेंगे.

उपमुख्यमंत्री अजित पवार से जुड़े ‘बालगंगा बांध घोटाले’ में एक अहम न्यायिक मोड़ आया है. मामले के मुख्य आरोपी निसार खत्री द्वारा विशेष न्यायाधीश जी.टी. पवार के खिलाफ दायर स्थानांतरण याचिका (Transfer Petition) को ठाणे सत्र न्यायालय ने खारिज कर दिया है. अदालत ने इसे निराधार बताते हुए आरोपी पर 20,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया. कोर्ट ने माना कि न्यायाधीश केवल मामले की सुनवाई में तेजी लाने का प्रयास कर रहे थे. हालांकि, इस फैसले के ठीक बाद एक प्रशासनिक फेरबदल में संबंधित न्यायाधीश का प्रभार बदल दिया गया है, जिसने इस हाई-प्रोफाइल मामले की दिशा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं.

AZMI DESK

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