स्वास्थ्य

Prateek Yadav Death: लंग्स में मौजूद क्लॉट कितना खतरनाक, जिससे जूझ रहे थे प्रतीक यादव? क्या इससे हो सकती है मौत?

Prateek Yadav Cause Of Death: समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के बेटे प्रतीक यादव का 13 मई 2026 बुधवार सुबह लखनऊ में निधन हो गया. वह 38 वर्ष के थे. परिवार के लोग उन्हें सुबह करीब 6:15 बजे सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. उस समय उनकी पत्नी और भाजपा नेता अर्पणा वहां मौजूद नहीं थीं. प्रतीक यादव, पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश के सौतेले भाई थे.

लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे थे प्रतीक यादव

रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि प्रतीक यादव लंबे समय से लंग्स से जुड़ी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे. उनके लंग्स में खून का थक्का जम गया था, जिसका इलाज चल रहा था. सुबह अचानक उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई और उन्होंने प्रतिक्रिया देना बंद कर दिया, इसके बाद परिवार वाले उन्हें तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी. उनके निधन की खबर सुनकर काफी लोग हैरान हैं.

कितना खतरनाक होता है लंग्स में मौजूद क्लॉट?

हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली संस्था mayoclinic के अनुसार, लंग्स में खून का थक्का जमने की स्थिति बेहद खतरनाक मानी जाती है. मेडिकल भाषा में इसे पल्मोनरी एम्बोलिज्म कहा जाता है. इसमें शरीर की नसों में बना खून का थक्का लंग्स तक पहुंच जाता है और वहां की आर्टरीज में रुककर खून के बहाव को रोक देता है. ज्यादातर मामलों में यह थक्का पैरों की गहरी नसों से निकलकर लंग्स तक पहुंचता है. इस स्थिति को डीप वेन थ्रॉम्बोसिस कहा जाता है.

मरीज को क्या होती है इससे दिक्कत?

जब फेफड़ों तक खून और ऑक्सीजन का फ्लो रुकता है, तब सांस लेने में दिक्कत शुरू हो जाती है. मरीज को अचानक तेज सांस फूलना, सीने में दर्द, चक्कर आना या बेहोशी जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं. कई बार खांसी के साथ खून भी आ सकता है. डॉक्टर बताते हैं कि यह बीमारी जानलेवा साबित हो सकती है, क्योंकि फेफड़ों का प्रभावित हिस्सा धीरे-धीरे काम करना बंद कर देता है और शरीर के बाकी हिस्सों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती.

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समय से इलाज बचा सकती है मरीज की जान

अमेरिकन लंग्स एसोसिएशन के अनुसार, अगर समय रहते इलाज मिल जाए तो मरीज की जान बचाई जा सकती है. इलाज के दौरान खून के थक्के को बढ़ने से रोकने और नए थक्के बनने से बचाने पर जोर दिया जाता है. वहीं लंबे समय तक बैठे रहने, नसों से जुड़ी बीमारी, मोटापा, धूम्रपान और हार्ट या लंग्स की पुरानी बीमारी वाले लोगों में इसका खतरा ज्यादा माना जाता है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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AZMI DESK

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