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Exit Poll Analysis: सारे एग्जिट पोल्स भूल जाएं- बस यह 3 याद रखें! बीजेपी-TMC को 200 पार और TVK की बनवा रहे सरकार

देश के पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के एग्जिट पोल ने सबको चौंकाया है. जहां असम, केरल और पुडुचेरी में बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन को बढ़त का संकेत दिया, वहीं पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में करारी शिकस्त दिखाई है. इन दोनों राज्यों में 3 एजेंसियों ने ऐसे आंकड़े पेश किए हैं जो बाकी सर्वेक्षणों से उलट हैं. बंगाल में एक एजेंसी ने बीजेपी को तो दूसरी ने TMC को 200 से ज्यादा सीटें दीं. तमिलनाडु में TVK को 120 सीटें दी हैं. सबके उलट बोलने वाली एजेंसियों ने अनुमान क्या लगाया है? जानेंगे एक्सप्लेनर में…

बीजेपी और TMK दोनों को 200 से ज्यादा सीटें

ये तीनों एजेंसियां हैं- ‘पीपुल्स पल्स’, ‘जनमत पोल’ और ‘एक्सिस माय इंडिया’. इनके आंकड़ों ने पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु की चुनावी तस्वीर को बेहद नाटकीय और अप्रत्याशित बना दिया है, क्योंकि इन्होंने दो पारंपरिक पार्टियों और एक बिल्कुल नई पार्टी के लिए चौंकाने वाली जीत का अनुमान लगाया है.

पश्चिम बंगाल में दो एजेंसियों ने बिल्कुल विपरीत तस्वीर पेश की है, लेकिन दोनों ही ‘200 के पार’ का दावा करने में एक समान हैं:

  • ‘पीपुल्स पल्स’: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को 178 से 208 सीटें देकर एक ऐतिहासिक और एकतरफा जीत का संकेत दिया है, जबकि TMC को सिर्फ 85-110 सीटों पर सीमित कर दिया.
  • ‘जनमत पोल’: इसके ठीक उलट, ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रचंड वापसी का अनुमान लगाया है, जिसमें पार्टी को 195 से 205 सीटें मिलती दिख रही हैं और बीजेपी को सिर्फ 80-90 सीटों पर सिमटता हुआ दिखाया गया है. इस तरह, दोनों पोल्स ने एक ही राज्य में दोनों प्रमुख दलों को 200-200 सीटें देकर चुनावी अनिश्चितता को चरम पर पहुंचा दिया है.

तमिलनाडु में ‘एक्सिस माय इंडिया’ का सनसनीखेज दावा

तमिलनाडु में 9 में से सिर्फ एक एग्जिट पोल ‘एक्सिस माय इंडिया’ ने सबको चौंका दिया. इसने विजय थलापति की पहली बार चुनाव लड़ रही पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) को 98 से 120 सीटें और लगभग 35% वोट शेयर देकर सीधे सत्ता की दौड़ में खड़ा कर दिया. यह अनुमान इसे सत्तारूढ़ DMK गठबंधन के 92-110 सीटों के आंकड़े के सीधे मुकाबले में रखता है. बाकी सभी आठ प्रमुख एजेंसियों ने TVK को 0 से 40 सीटों के बीच सीमित कर दिया था, जो ‘एक्सिस माय इंडिया’ के अनुमान के बिल्कुल उलट है.

ये तीनों आंकड़े इतने चौंकाने वाले और बाकी पोल्स से उलट क्यों हैं?

ये तीनों आंकड़े चौंका रहे हैं क्योंकि ये न सिर्फ एक-दूसरे के विपरीत हैं, बल्कि राज्यों के बाकी सभी पोल्स को पूरी तरह से नकार देते हैं:

बंगाल में ‘पोल ऑफ पोल्स’ का खेल: अगर आप पीपुल्स पल्स (बीजेपी 178-208) और जनमत (TMC 195-205) को छोड़ दें, तो बाकी पांच प्रमुख पोल्स का एक साफ रुझान है. ये सभी एजेंसियां बीजेपी और TMC के बीच कांटे की टक्कर दिखाती हैं. इसमें दोनों दल एक-दूसरे के बहुत करीब हैं और किसी को भी बड़ी जीत मिलती नहीं दिख रही. इनके पोल ऑफ पोल्स में दोनों दल लगभग 145 सीटों पर बराबरी पर हैं. इस लिहाज से, प्रजा पोल का एकतरफा बीजेपी समर्थक और जनमत पोल का एकतरफा TMC समर्थक अनुमान, इस सामूहिक सहमति को सीधी चुनौती देता है.

तमिलनाडु में नए दल को सत्ता में दिखाने वाला अकेला पोल: ‘एक्सिस माय इंडिया’ का दावा इसलिए बेहद चौंकाने वाला है क्योंकि इसने एक नई पार्टी को सत्ताधारी गठबंधन के बराबर खड़ा कर दिया. खुद एजेंसी के चेयरमैन प्रदीप गुप्ता ने कहा कि उनका अनुमानित आंकड़ा ’70 सीटों तक नीचे आ सकता है.’ यह इस अनुमान के भीतर छिपी भारी अनिश्चितता को उजागर करता है, जहां 50 साल से सत्ता सिर्फ दो द्रविड़ दलों के बीच घूम रही है.

क्या हमें इन चौंकाने वाले अनुमानों पर भरोसा करना चाहिए?

इस सवाल का सबसे ईमानदार जवाब यही है कि ये सिर्फ अनुमान हैं और चुनावी इतिहास ऐसे सनसनीखेज एग्जिट पोल के गलत साबित होने के उदाहरणों से भरा पड़ा है. बंगाल के ही 2021 के विधानसभा चुनाव में भी कई एग्जिट पोल ने बीजेपी की सरकार बनने या कांटे की टक्कर का अनुमान लगाया था, लेकिन वास्तविक नतीजों में ममता बनर्जी की TMC ने 213 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत हासिल किया था.

इसलिए, इन तीनों आंकड़ों को संभावनाओं के चरम छोर के रूप में देखना ज्यादा सही होगा. प्रजा पोल बीजेपी के लिए सबसे अच्छी संभावित स्थिति दर्शाता है. जनमत पोल TMC के लिए सबसे अच्छी तस्वीर और एक्सिस माय इंडिया तमिलनाडु में TVK के लिए सबसे बड़ी संभावित लहर को दर्शाता है.

असल तस्वीर 4 मई 2026 को मतगणना के बाद ही साफ होगी, जब पता चलेगा कि बंगाल में सत्ता-विरोधी लहर का फायदा किसे मिला और तमिलनाडु में ‘थलापति’ की राजनीतिक हैसियत कितनी मजबूत है. फिलहाल, ये अनुमान चुनावी माहौल को रोमांचक बनाए रखने और दोनों खेमों के बीच बहस को जिंदा रखने में पूरी तरह सफल रहे हैं.

AZMI DESK

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