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महिला आरक्षण विधेयक: चर्चा से पहले बवाल, 131वां संशोधन कर मसौदा पेश; कांग्रेस से DMK तक किसने क्या कहा

Women Reservation Bill 2026: वर्तमान बजट सत्र के दौरान लाने वाले महिला आरक्षण विधेयक को लेकर केंद्र सरकार ने मंगलवार को सांसदों के साथ संविधान में 131वां संशोधन करते हुए विधेयक 2026 का मसौदा साझा किया. यह महिला आरक्षण विधेयक में प्रस्तावित संशोधन है. इसका उद्देश्य लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाना है. इसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सदस्य शामिल होंगे. संसद की इस सप्ताह होने वाली बैठक के दौरान नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन पेश किए जाएंगे. यह महिला आरक्षण अधिनियम के रूप में जाना जाता है. इसे 2029 में लागू किया जाएगा.

संसद के निचले सदन में सदस्यों की मौजूदा संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान है. केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन विधेयक) 2026 लाने की भी तैयारी है. इस विधेयक को कानून मंत्री अर्जुन मेघवाल पेश करेंगे. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दोनों सदनों में बिल पर चर्चा का जवाब देंगे. लोकसभा में 16 और 17 अप्रैल को चर्चा और वोटिंग होगी. राज्यसभा में 18 अप्रैल को चर्चा और वोटिंग होगी.

ऐसे में ऐसे में इसको लेकर अलग-अलग तरह से रिएक्शन देखने को मिल रहे है. देश के अन्य दल इस पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं. 

क्या बोले केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू?
महिला आरक्षण बिल पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा है कि इस सत्र में ऐतिहासिक नारी शक्ति वंदन अधिनियम सरकार लेकर आ रही है. ये सिर्फ सरकार का बिल नहीं है. ये सभी पार्टी और पूरे देश का बिल है. देश के महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा में जगह मिलने जा रही है. ये किसी एक दल का मुद्दा हो ही नही सकता.
 
उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने धन्यवाद दिया है कि हर राजनीतिक पार्टी ने पिछले बार इसको पारित करवाया था. इस बार भी जो बिल लेकर आ रहे हैं, ये बीजेपी-NDA बिल नहीं है. पूरे पार्टी की ओर से ये बिल लेकर आ रहे हैं.  मैंने सभी दल के नेता से बात किया है. कुछ विपक्ष पार्टी के साथ भी हमने बैठक की. सभी का दिल से धन्यवाद करता हूं. उम्मीद करता हूं सभी पार्टी एकमत से इस बिल को पारित करेंगे.

कांग्रेस बोली ने कहा, ‘विधेयक की मंशा शरारतपूर्ण – भ्रामक 

कांग्रेस ने महिला आरक्षण लागू करने के मकसद से सरकार की तरफ से लाने वाले विधेयक को लेकर कहा कि जब किसी विधेयक की मंशा शरारतपूर्ण और उसकी विषय वस्तु भ्रामक हो तो संसदीय लोकतंत्र को बहुत नुकसान होता है. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया कि जब किसी विधेयक के पीछे की मंशा शरारतपूर्ण हो और उसकी विषय वस्तु भ्रामक हो तो संसदीय लोकतंत्र को नुकसान की सीमा बहुत अधिक होती है.

क्या बोले राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल?

राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने मंगलवार को कहा कि भाजपा बिना राजनीतिक उद्देश्य के कुछ भी नहीं करती है. वे तब तक कोई विधेयक नहीं लाएंगे, जब तक इससे उन्हें राजनीतिक लाभ न हो. 106वें संविधान संशोधन विधेयक में अनुच्छेद 334-ए पेश किया गया. इसमें कहा गया है कि महिला आरक्षण कानून 2026 के बाद जनगणना और परिसीमन के बाद लागू किया जाएगा.  उन्होंने कहा कि इसे संसद में सर्वसम्मति से पारित किया गया. कहा कि अब उन्होंने इसमें संशोधन करने का फैसला किया है. वे यह नहीं कह रहे हैं कि वे क्या बदलाव चाहते हैं. उन्होंने 2023 में फैसला किया कि यह जनगणना और परिसीमन के बाद किया जाएगा. अब वे कहते हैं कि वे इसमें बदलाव चाहते हैं.

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन वीडियो जारी कर दी चेतावनी

स्टालिन ने एक वीडियो संदेश में चेतावनी दी कि अगर राज्य को नुकसान पहुंचाने वाला कोई भी कदम उठाया गया या परिसीमन में उत्तरी राज्यों की राजनीतिक शक्ति में असमान रूप से वृद्धि की गई, तो तमिलनाडु में बड़े पैमाने पर आंदोलन होंगे. इससे पूरा राज्य ठप्प हो जाएगा. पूरी ताकत से विरोध प्रदर्शन होंगे. डीएमके ही नहीं बल्कि किसी भी राजनीतिक दल या किसी भी राज्य से परामर्श किए बिना, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)के नेतृत्व वाला केंद्र एकतरफा कार्रवाई करने का प्रयास कर रहा है. 

उन्होंने कहा कि हमें यह भी नहीं पता कि परिसीमन की यह प्रक्रिया कैसे संपन्न होगी. प्रस्तावित संवैधानिक संशोधन के संबंध में अभी तक कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है. स्टालिन ने कहा कि जब प्रक्रिया में गोपनीयता बरती जाती है, तो इससे गंभीर खतरे की आशंका और भी बढ़ जाती है. उन्होंने कहा कि दक्षिणी राज्यों के लोग गहरी चिंता में डूबे हुए हैं. द्रमुक नेता ने 16 अप्रैल को संसद के सत्र का जिक्र करते हुए कहा कि तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनावों के बीच इसे जबरन बुलाया गया है. उन्होंने आरोप लगाया कि इस सत्र में केंद्र सरकार परिसीमन पर संवैधानिक संशोधन को जबरदस्ती पारित कराने का इरादा रखती है. उनका दावा है कि केंद्र सरकार तमिलनाडु सहित दक्षिणी राज्यों पर अपना फैसला थोपना चाहती है.

रेवंत रेड्डी ने भी परिसीमन मामले में केंद्र सरकार को घेरा

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने हैदराबाद में परिसीमन को लेकर केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि यदि पर्याप्त संख्या में सीट नहीं बढ़ाई जाती, तो दक्षिणी राज्यों में महिलाओं, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों को अन्याय का सामना करना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी कथित तौर पर दक्षिणी राज्यों की कीमत पर उत्तर प्रदेश या गुजरात में सीट की संख्या बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं.  वे इस बात से इनकार नहीं करते कि यदि सीट में आनुपातिक आधार पर वृद्धि की जाती है तो उत्तरी राज्यों में महिलाओं, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के प्रतिनिधित्व को लाभ होगा. 

रेड्डी ने कहा कि यदि लोकसभा की कुल सीट की संख्या में आनुपातिक आधार पर 50 प्रतिशत की वृद्धि की जाती है, तो केरल में लोकसभा की सीटें 20 से बढ़कर 30 हो जाएंगी और उत्तर प्रदेश में 80 से बढ़कर 120 हो जाएंगी. उन्होंने सवाल किया कि यदि किसी उत्तरी राज्य में 30 सीट बढ़ जाती हैं, तो वहां दलितों और अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण बढ़ सकता है. मैं इससे इनकार नहीं करता. लेकिन क्या दक्षिणी राज्यों में सीट कम होने से दलितों, अनुसूचित जनजातियों और महिलाओं को नुकसान नहीं होगा? 

रेड्डी ने कहा कि संसद में महिलाओं के लिए आरक्षण प्रदान करने के लिए प्रस्तावित विधेयक पर कांग्रेस को कोई आपत्ति नहीं है. उनकी सरकार विधानसभा में महिलाओं के कोटे पर कानून पारित करने के लिए तैयार होगी. 

एकनाथ शिंदे नित शिवसेना ने भी दी प्रतिक्रिया
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे नीत शिवसेना ने मंगलवार को नारी शक्ति वंदन अधिनियम का समर्थन करते हुए इसे एक ऐतिहासिक कदम बताया. पार्टी ने कहा कि यह अधिनियम संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण के कार्यान्वयन का मार्ग प्रशस्त करेगा और भारतीय लोकतंत्र में एक स्वर्णिम अध्याय की शुरुआत करेगा.

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AZMI DESK

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