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⚡ अयोध्या | UPPCL MEDIA SPECIAL REPORT
उत्तर प्रदेश के अयोध्या में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्मार्ट मीटर लगाने के बाद एक आम उपभोक्ता को 76 लाख रुपये तक का बिजली बिल थमा दिया गया—और हैरानी की बात यह कि शिकायतों के बावजूद अब तक कोई समाधान नहीं हुआ।
सरयू नहर कॉलोनी निवासी साधु राम के साथ हुआ यह मामला न सिर्फ विभागीय लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि स्मार्ट मीटर व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है।

⚠️ 5 महीने में 76 लाख का झटका
साधु राम के मुताबिक, उन्होंने अपने घर पर ई-रिक्शा चार्जिंग के लिए 24 किलोवाट का वैध कनेक्शन ले रखा है। पहले हर महीने 25-26 हजार रुपये का बिल आता था।
लेकिन 17 अक्टूबर को स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिलिंग पूरी तरह अनियमित हो गई।
👉 फरवरी 2026 में अचानक 72.98 लाख रुपये का बिल
👉 फिर संशोधित कर 75.98 लाख रुपये का मैसेज
👉 और 23 अप्रैल तक जमा करने का अल्टीमेटम
यह आंकड़े खुद बता रहे हैं कि मामला सिर्फ “तकनीकी गड़बड़ी” नहीं बल्कि “सिस्टम फेलियर” है।
📉 शिकायतें हुई बेअसर
पीड़ित उपभोक्ता ने—
- अवर अभियंता से शिकायत की
- अधिशासी अभियंता को प्रार्थना पत्र दिया
- 27 फरवरी को IGRS पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई
लेकिन हर स्तर पर सिर्फ “रिपोर्ट लग गई” का जवाब मिला, बिल में कोई सुधार नहीं।
📵 अधिकारियों की चुप्पी
अधीक्षण अभियंता विनय कुमार से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका CUG नंबर लगातार “नो रिप्लाई” देता रहा। यह स्थिति दर्शाती है कि जिम्मेदार अधिकारी या तो जवाबदेही से बच रहे हैं या समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहे।
🔥 बड़ा सवाल
- क्या स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के लिए राहत है या नई मुसीबत?
- क्या विभाग जानबूझकर ऐसे बिल थोप रहा है?
- आखिर 25 हजार से 75 लाख तक का आंकड़ा कैसे पहुंच गया?
⚡ UPPCL पर सीधा सवाल
यह मामला सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है। यदि एक आम उपभोक्ता को करोड़ों के करीब बिल भेजा जा सकता है, तो सिस्टम की विश्वसनीयता पर भरोसा कैसे किया जाए?
🧾 निष्कर्ष
अयोध्या का यह मामला साफ बताता है—
स्मार्ट मीटर स्मार्ट नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं के लिए आर्थिक बम साबित हो रहे हैं।



