Exclusive: ‘अगर US ने खार्ग द्वीप पर हमला किया तो ईरान…’, पूर्व केंद्रीय मंत्री को सता रहा ‘वर्ल्ड वॉर’ का डर, भारत को दी सलाह

मिडिल ईस्ट में इजरायल और अमेरिका के साथ ईरान की जंग पिछले करीब पांच हफ्तों से लगातार जारी है. युद्ध में शामिल देशों के अलावा इस जंग का असर दुनिया के अन्य सभी देशों पर भी व्यापक रूप से पड़ रहा है, जो वैश्विक तेल और ऊर्जा संकट के रूप में सामने आ रहा है. इस बीच अमेरिका की ओर से ईरान के खार्ग द्वीप पर संभावित हमले की भी काफी चर्चा हो रही है. इसे लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुले तौर पर ईरान को धमकी भी दी है. ऐसे में अगर अमेरिका खार्ग द्वीप पर हमला कर देता है तो तीन देशों के बीच जारी यह युद्ध पूरी दुनिया में फैल सकता है यानी इससे वर्ल्ड वॉर का भी खतरा हो सकता है.
US-ईरान युद्ध की संभावनाओं पर बोले एम जे अकबर
भारत के पूर्व विदेश राज्य मंत्री एम. जे. अकबर ने मंगलवार (31 मार्च, 2026) को एबीपी न्यूज से एक्सक्लूसिव बातचीत में मध्य पूर्व में जारी युद्ध को लेकर कई संभावनाओं के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि आप ये पुख्ता मान लें कि अगर अमेरिका ने खार्ग द्वीप पर हमला किया तो ईरान अपनी फौज दुबई और बहरीन में उतार देगा. हालांकि जंग के आखिर में क्या होगा ये तो कह नहीं सकते पर इसको आप पुख्ता मान लें.
उन्होंने कहा, ‘अगर ऐसा हुआ तो ये वर्ल्ड वॉर (World War) नहीं, बल्कि वर्ल्ड वाइड वॉर (World Wide War) में तब्दील हो जाएगा, क्योंकि अब पहले की तरह वर्ल्ड वॉर का दौर नहीं है.’
युद्ध ने ईरान की काबिलियत का US को दिखाया आईनाः अकबर
अकबर ने कहा, ‘इस जंग में ईरान ने दिखा दिया कि भले अमेरिका और इजरायल ने सोचा था कि जंग 48 घंटे में खत्म कर देंगे पर उल्टा ईरान के लोगों की नेशनलिस्ट भावना जाग गई और उसने अपनी तकनीकी काबिलियत दिखा दी. खामेनेई को मारने से शिया और सुन्नी भी एक हो गए, जो धर्म पर कभी अलग नहीं थे, बल्कि हुकूमत पर अलग थे.’
उन्होंने कहा, ‘इजरायल ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि डिमोना (DIMONA) पर ईरानी मिसाइल का हमला होगा. उनके मिसाइल डिफेंस सिस्टम को चीरता हुआ उसने डिमोना (DIMONA) पर हमला किया, जो उनका नेगेव न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर (Negev Nuclear Research Centre) है.’ उन्होंने आगे कहा, ‘ईरान ऐसा इसलिए कर पाया क्योंकि वो अपनी GDP का 4% रिसर्च और डेवलपमेंट (Research and Development) पर खर्च करता है और उसके पास 2,000 यूनिवर्सिटीज हैं, जो उनके एसेट्स हैं.’
खाड़ी देशों पर दवाब नहीं बना पाएंगे ट्रंपः अकबर
पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री एम. जे. अकबर ने कहा, ‘अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खाड़ी के देशों पर हथियार खरीदने का दबाव नहीं बना पाएंगे, क्योंकि न तो उनके हथियार उस लायक हैं और न ही वो इस जंग में खाड़ी के देशों के साथ उतरे थे.’
उन्होंने कहा, ‘खाड़ी देशों के लिए संकट इस बात का है कि इनमें से कई देशों ने अपनी सिक्योरिटी आर्किटेक्चर अमेरिका को दे दी थी, जो छाता अब टूट गया है और अब वहां नया सिक्योरिटी आर्किटेक्टर बनेगा, जिसमें यह देखना होगा कि कौन-कौन शामिल होता है और इजरायल और ईरान की क्या भूमिका होती है.’
उन्होंने आगे कहा, ‘ट्रंप ने खुद ही यह बात कह दी है कि अगली बार इस काम को पूरा करेंगे. इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू भी खुद कह चुके है कि आधे से ज्यादा उद्देश्य खत्म हो गए हैं. हालांकि, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की मुश्किल का समाधान सभी पक्षों को ढूंढना होगा.’
मध्यस्थता को लेकर भारत और PAK की भूमिका पर बोले अकबर
इस एक्सक्लूसिव बातचीत के दौरान पूर्व विदेश राज्य मंत्री एम. जे. अकबर ने अमेरिका-इजरायल की ईरान के साथ जारी जंग के बीच मध्यस्थता को लेकर भारत और पाकिस्तान की भूमिका पर भी बात की. उन्होंने कहा, ‘भारत को धुंध में में नहीं कूदना चाहिए था, लेकिन अब धुंध छंट रही है. अगर भारत को मध्यस्थता के लिए आमंत्रित किया जाता है तो भारत को अपनी भूमिका निभानी चाहिए, क्योंकि भारत एक मजबूत देश है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बात सभी सुनते हैं, दूसरी तरफ पाकिस्तान की भूमिका सिर्फ एक पोस्टमैन की है.’
उन्होंने कहा, ‘अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पाकिस्तान के साथ लिए भी इसीलिए हैं, क्योंकि वो जानते हैं कि पाकिस्तान हमेशा उनके आगे झुका रहेगा और वो वही करेगा, जो अमेरिका चाहेगा.’
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