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⚡ कार्रवाई की आंधी में घिरा पावर कॉरपोरेशन — अभियंताओं पर संकट!

लखनऊ/प्रदेश भर से बड़ी खबर – यूपीपीसीएल मीडिया विशेष रिपोर्ट

प्रदेश के पावर कॉरपोरेशन एवं सभी डिस्कॉम्स, विशेषकर राजधानी लखनऊ के लेसा क्षेत्र में इस समय जो हालात बनते जा रहे हैं, वे बेहद चिंताजनक और विस्फोटक संकेत दे रहे हैं। एक ओर जहां आई.ए.एस अधिकारियों की बढ़ती दखलंदाजी को लेकर इंजीनियरों में असंतोष चरम पर है, वहीं दूसरी ओर अब 1 अप्रैल से बड़े पैमाने पर निलंबन अभियान की तैयारी ने पूरे विभाग में भय का माहौल पैदा कर दिया है।

📌 “काम नहीं, सिर्फ कार्रवाई” — यही है नया सिस्टम?

सूत्रों के अनुसार, ऊर्जा प्रबंधन की ओर से स्पष्ट संदेश दिया गया है—
👉 कार्रवाई, कार्रवाई और सिर्फ कार्रवाई!

पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष आशीष गोयल द्वारा सभी डिस्कॉम के प्रबंध निदेशकों को कथित रूप से निर्देशित किया गया है कि एक तय रेश्यो में अभियंताओं का निलंबन सुनिश्चित किया जाए:
👉🏽 1 मुख्य अभियंता
👉🏽 4–5 अधीक्षण अभियंता
👉🏽 लगभग 15 अधिशासी अभियंता
👉🏽 और इसी अनुपात में सहायक अभियंता व अवर अभियंता

यह साफ दर्शाता है कि अब प्राथमिकता “कार्य निष्पादन” नहीं बल्कि संख्या के आधार पर कार्रवाई बनती जा रही है।

⚠️ आई.ए.एस हस्तक्षेप बनाम इंजीनियर हित

वर्तमान परिस्थितियों में यह भी स्पष्ट रूप से सामने आ रहा है कि आई.ए.एस अधिकारियों की भूमिका न तो इंजीनियर हित में दिखाई दे रही है और न ही उपभोक्ता हित में।

इंजीनियरों का मानना है कि इस प्रकार का प्रशासनिक दबाव उन्हें “निर्णय लेने वाले अधिकारी” से ज्यादा “आदेश पालन करने वाले कर्मचारी” बना रहा है, जहां आत्मसम्मान और पेशेवर गरिमा लगातार प्रभावित हो रही है।

📉 एक-एक कर सबकी बारी — कोई नहीं बचेगा!

सबसे खतरनाक पहलू यह है कि यह कार्रवाई एक श्रृंखला के रूप में आगे बढ़ेगी—
👉🏽 आज कोई और निलंबित होगा, तो लोग सोचेंगे “मेरा क्या?”
👉🏽 कल वही स्थिति उनके सामने होगी…
और यह सिलसिला तब तक चलेगा जब तक हर कोई इसकी चपेट में न आ जाए।

👉 यानी, यह सिर्फ शुरुआत है — अंत में सभी को इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

💣 मनोबल तोड़ने की रणनीति या निजीकरण की तैयारी?

विभागीय चर्चाओं में यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या यह पूरा घटनाक्रम—
👉🏽 नीतिगत विफलताओं को छुपाने का प्रयास है?
👉🏽 या फिर अभियंताओं का मनोबल तोड़कर विभाग को कमजोर करने की रणनीति?

ताकि भविष्य में निजीकरण का रास्ता आसान किया जा सके?

❗ बड़ा सवाल — क्या इस माहौल में काम संभव है?

👉🏽 क्या कोई अभियंता इस तरह के भय और असुरक्षा के माहौल में सही ढंग से कार्य कर पाएगा?
👉🏽 क्या उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा मिल पाएगी जब खुद सिस्टम ही दबाव में होगा?
👉🏽 स्थिति यह बनती जा रही है कि अभियंता चाहकर भी उपभोक्ताओं की मदद नहीं कर पाएंगे, और अंततः उपभोक्ता ही सबसे ज्यादा प्रभावित होगा।

🧾 “यूपीपीसीएल मीडिया” की स्पष्ट अपील

ऐसी परिस्थिति में यूपीपीसीएल मीडिया समस्त इंजीनियर भाइयों-बहनों से अपील करता है—
👉 यदि आपका आत्मसम्मान आपके लिए महत्वपूर्ण है…
👉 यदि आपको अपने परिवार और जीवन की चिंता है…

तो अब समय आ गया है कि आप गंभीर निर्णय लें—
या तो सामूहिक रूप से आवाज उठाएं, या ऐसे विकल्पों पर विचार करें जहां आपकी गरिमा सुरक्षित रह सके।

⚡ “यूपीपीसीएल मीडिया” का मानना है कि जिस प्रकार से पावर कॉरपोरेशन में हालात बनते जा रहे हैं, वह आने वाले समय के लिए बेहद खतरनाक संकेत हैं।

👉 “कार्रवाई आधारित शासन” अगर इसी तरह चलता रहा, तो न केवल अभियंता टूटेंगे, बल्कि पूरा सिस्टम और अंततः उपभोक्ता भी संकट में आ जाएगा।

“UPPCL MEDIA”
“यह खबर नहीं… सिस्टम का आईना है…देखना या नजरअंदाज करना आपके हाथ में है…”

AZMI DESK

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