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DMK सांसद ने दिल्ली में भीख मांगने से रोक लगाने पर पूछा सवाल, जानें सरकार ने क्या दिया जवाब?

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लोकसभा में डीएमके सांसद मैथेस्वरन वीएस. ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से दिल्ली में भीख मांगने को रोकने के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं, उसको लेकर सदन में सवाल पूछा. सांसद मैथेस्वरन वीएस ने पूछा कि क्या दिल्ली में विशेषकर ट्रैफिक सिग्नलों के आसपास भीख मांगने को रोकने के लिए पुलिस एजेंसियों की ओर से उठाए गए निवारक कदमों का विवरण क्या है? और क्या दिल्ली पुलिस को ट्रांसजेंडरों की ओर से जबरन भीख मांगने की कोई शिकायत प्राप्त हुई है? यदि हां, तो उसका विवरण और साल 2019 से अब तक दर्ज मामलों की जानकारी क्या है? और वर्ष 2014 से अब तक दिल्ली प्रिवेंशन ऑफ बेगिंग रूल्स, 1960 के तहत भीख मांगने के लिए कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया है?

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने संसद ने दिया जवाब

DMK सांसद के पूछे गए सवाल पर लोकसभा में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने जानकारी दी कि दिल्ली पुलिस ने बताया है कि दिल्ली में विशेषकर ट्रैफिक सिग्नलों और चौराहों पर भीख मांगने की रोकथाम के लिए निम्नलिखित निवारक कदम उठाए जाते हैं.

  • ट्रैफिक सिग्नलों और चौराहों से भिखारियों को हटाने के लिए नियमित अंतराल पर विशेष अभियान चलाए जाते हैं.
  • संवेदनशील रेड लाइट्स पर पीक आवर्स के दौरान पुलिस कर्मियों की तैनाती की जाती है, ताकि भीख मांगने की गतिविधियों को रोका जा सके.
  • दिल्ली पुलिस, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की सामाजिक कल्याण विभाग के साथ समन्वय कर भिखारियों और बेघर लोगों को आश्रय गृहों में स्थानांतरित करती है.
  • प्रमुख चौराहों पर सीसीटीवी निगरानी के माध्यम से भिखारियों की ओर से उत्पन्न अव्यवस्था की पहचान और रोकथाम की जाती है.

इसके अलावा, मंत्री ने बताया कि साल 2019 से अब तक ट्रांसजेंडरों की ओर से जबरन भीख मांगने के कुल तीन शिकायतें दिल्ली पुलिस को प्राप्त हुई हैं. इनमें से दो शिकायतें कार्रवाई योग्य नहीं पाई गईं, जबकि एक शिकायत को प्राथमिकी (FIR) में परिवर्तित किया गया, जिसमें कोर्ट में आरोपपत्र दायर किया जा चुका है.

भीख मांगने को अपराध घोषित करना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन- दिल्ली HC

मंत्री ने कहा कि साल 2014 से अब तक दिल्ली प्रिवेंशन ऑफ बेगिंग रूल्स, 1960 के तहत किसी भी व्यक्ति को भीख मांगने के लिए गिरफ्तार नहीं किया गया है. यह भी बताया गया है कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने अगस्त 2018 में ‘हर्ष मंदर और अन्य बनाम भारत संघ और अन्य’ और ‘कर्णिका साहनी बनाम भारत संघ और अन्य’ मामलों में दिल्ली में भीख मांगने को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया है. कोर्ट ने यह भी कहा कि भीख मांगने को अपराध घोषित करना संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है.

यह भी पढ़ेंः अगस्ता वेस्टलैंड चॉपर केसः क्रिश्चियन मिशेल की रिहाई याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला, सरकार ने किया विरोध

AZMI DESK

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