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RSS के संगठनात्मक ढांचे में होगा बड़ा बदलाव, जानें अब कितने क्षेत्र और संभाग में बंटकर होगा काम

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक हरियाणा के समालखा में संपन्न हो गई है. इस बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं. इनमें से सबसे प्रमुख शताब्दी वर्ष में संघ की ओर से अपने संगठनात्मक ढांचे में बदलाव किए जाने का फैसला है. संघ में अब प्रांत व्यवस्था खत्म किए जाने का फैसला किया गया है. प्रांत की जगह अब संभाग बनाए जाएंगे.

संघ अभी तक 46 प्रांत में काम कर रहा था, लेकिन अब प्रांत की जगह काम करने वाले संभाग की संख्या बढ़कर 85 हो जाएगी. देश भर में संघ अब 11 के बजाय नौ क्षेत्रों में बंटकर करेगा काम. क्षेत्र की संख्या कम कर दी गई है. दो क्षेत्र कम किए गए हैं. क्षेत्र और प्रांत के बीच एक नई इकाई गठित करने का भी फैसला किया गया है. यह इकाई प्रदेश की होगी. प्रदेशों की संख्या अभी निर्धारित नहीं की गई है.

संगठन में बदलाव को लेकर बोले डॉ. अग्रवाल

संघ ने अपने संगठन में बदलाव का यह फैसला स्वयंसेवकों के सुझाव पर काम को और बेहतर बनाने के मकसद से किया है. इसकी प्रक्रिया इसी साल अक्टूबर महीने से शुरू हो जाएगी और अगले साल मार्च महीने में यह औपचारिक तौर पर अस्तित्व में आ जाएगी. RSS के क्षेत्र संघ चालक डॉ. रमेश चंद्र अग्रवाल ने जयपुर में प्रेस कांफ्रेंस कर बताया कि प्रतिनिधि सभा की बैठक में शताब्दी वर्ष में कई अन्य महत्वपूर्ण फैसले लिए गए. इसके तहत संत रविदास के प्राकट्य दिवस और गुरु तेग बहादुर की जयंती पर भी पूरे देश में बड़े पैमाने पर कार्यक्रम आयोजित किए जाने का फैसला हुआ.

LPG संकट के बीच लोगों की अपने स्तर से मदद कर रहा संघः अग्रवाल

क्षेत्र संघ चालक डॉ. रमेश चंद्र अग्रवाल के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध की वजह से देश में पैदा हुए रसोई संकट को लेकर सरकार से औपचारिक तौर पर ना तो कोई मांग की गई है और ना ही कोई सुझाव दिया गया है. संघ की परंपरा के मुताबिक, स्वयंसेवकों से यह अपेक्षा की गई है कि वह जरूरतमंद लोगों की अपने स्तर पर हर संभव मदद करें. यानी संघ से जुड़े हुए स्वयंसेवक रसोई गैस के संकट से जूझ रहे लोगों की अपने स्तर पर मदद भी करेंगे.

हिंदुओं को ज्यादा बच्चे पैदा करने पर संघ की राय क्या?

उनके कहा कि हिंदुओं से ज्यादा बच्चा पैदा करने को लेकर संघ प्रमुख मोहन भागवत के सुझाव पर इस बैठक में नए सिरे से कोई चर्चा नहीं की गई, लेकिन मोहन भागवत के सुझाव को सभी देशवासियों खासकर हिंदू परिवारों तक पहुंचाने की बात जरूर कही है. डॉ. अग्रवाल का कहना है कि मोहन भागवत की सलाह के साथ ही संघ का यह मानना है कि परिवार में कम से कम तीन बच्चे जरूर होने चाहिए. तीन बच्चों की संख्या न्यूनतम होनी चाहिए. इससे ज्यादा भी अगर हो जाए तो वह गलत नहीं होगा.

उनका कहना है कि ज्यादा संतान होने से पैदा होने वाले बच्चों को अच्छे संस्कार मिलते हैं और उनकी परवरिश भी बेहतर तरीके से होती है. ज्यादा बच्चे होने से किसी तरह की कोई समस्या नहीं होती है, बल्कि यह राज्य का दायित्व होता है कि वह सभी को मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराए.

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AZMI DESK

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