तेलंगाना: दलबदल मामले में स्पीकर के फैसले पर मचा बवाल, KTR ने रेवंत रेड्डी सरकार पर कसा तंज

तेलंगाना की राजनीति में दलबदल के मुद्दे पर एक नया विवाद खड़ा हो गया है. विधानसभा स्पीकर गद्दम प्रसाद कुमार ने बीआरएस के दो विधायकों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाओं को खारिज कर दिया है. इस फैसले के बाद राज्य में सियासी माहौल गरमा गया है और विपक्ष ने कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है.
स्पीकर ने अपने फैसले में क्या कहा है?
स्पीकर ने अपने फैसले में कहा कि विधायकों के पार्टी बदलने के ठोस सबूत नहीं मिले हैं, इसलिए याचिकाओं को खारिज किया जाता है. जिन विधायकों के खिलाफ याचिका दायर की गई थी उनमें कडियम श्रीहरि और दनम नागेंद्र शामिल हैं. यह फैसला ऐसे समय में आया है जब इस पूरे मामले की सुनवाई जल्द ही भारत का सर्वोच्च न्यायालय में होने वाली थी.
इस फैसले के बाद बीआरएस ने कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष के. टी. रामा राव ने कहा कि यह फैसला लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है. उनके अनुसार जिन विधायकों ने खुले तौर पर दलबदल किया है, उनके खिलाफ कार्रवाई न करना जनता के विश्वास के साथ धोखा है.
KTR का आरोप- यह मामला सिर्फ दो विधायकों का नहीं
केटीआर ने आरोप लगाया कि यह मामला सिर्फ दो विधायकों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन 10 विधायकों से जुड़ा है जिन पर दलबदल के आरोप लगाए गए थे. उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार राजनीतिक लाभ के लिए नियमों और लोकतांत्रिक परंपराओं को नजरअंदाज कर रही है. बीआरएस नेता ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को भी इस पूरे मामले के लिए जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी अक्सर लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की बात करते हैं, लेकिन तेलंगाना में जो हो रहा है वह पूरी तरह इसके विपरीत है.
KTR की चिंता-अगर ढील दी जाती रही तो…
केटीआर ने कहा कि अगर दलबदल के मामलों में इस तरह की ढील दी जाती रही तो यह लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक संकेत होगा. उन्होंने मांग की कि इस मामले में पारदर्शिता होनी चाहिए और जनता को स्पष्ट जवाब दिया जाना चाहिए. इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति और भी तेज हो गई है.
बीआरएस नेताओं का कहना है कि वे इस मुद्दे को अदालत और जनता दोनों के सामने उठाएंगे. वहीं कांग्रेस का कहना है कि स्पीकर ने संवैधानिक अधिकारों के तहत फैसला लिया है और इसमें किसी तरह की राजनीतिक मंशा नहीं है.



