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Exclusive: अंकिता भंडारी, UCC से लेकर उत्तराखंड में ‘जिहाद’ तक, सीएम धामी ने abp news के इन सवालों के दिए ये जवाब, पढ़ें यहां

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड समागम कार्यक्रम में एबीपी न्यूज़ से विशेष बातचीत में अपने राजनीतिक सफर, चार साल के कार्यकाल के आकलन, समान नागरिक संहिता (यूसीसी), चारधाम और कुंभ की तैयारियों, धार्मिक स्थलों से जुड़े विवादों, कथित ‘हेट स्पीच’ रिपोर्ट और राष्ट्रीय राजनीति के कई सवालों पर खुलकर जवाब दिए.

एबीपी न्यूज़ की सीनियर एडिटर पॉलिटिकल अफेयर्स मेघा प्रसाद के सवालों का जवाब देते हुए धामी ने साल 2021 में ‘एक्सीडेंटल सीएम’ कहे जाने से लेकर दोबारा कमान संभालने तक के उतार – चढ़ाव का जिक्र करते हुए धामी ने कहा कि उन्होंने कभी ‘कुछ बनने’ के बारे में नहीं सोचा, बल्कि हमेशा ‘कुछ करने’ पर ध्यान दिया. यूसीसी को महिलाओं के सशक्तिकरण का कानून बताते हुए उन्होंने इसे देवभूमि से निकली ‘गंगोत्री’ करार दिया, वहीं धार्मिक स्थलों और डेमोग्राफी के मुद्दों पर भी अपनी सरकार का पक्ष रखा. यहां पढ़ें साक्षात्कार के संपादित अंश:

सवाल:
2021 में जब आपको सीएम बनाया गया तो लोगों ने कहा कि आप ‘एक्सीडेंटल सीएम’ हैं. फिर आप उसके बाद अपना चुनाव हार गए और लोगों ने कहा कि आपका करियर खत्म हो गया. मगर आपकी पार्टी ने आप पर इतना भरोसा जताया, आपको फिर से कमान दी. उसके बाद तब से लेकर आज तक आपने पीछे मुड़कर नहीं देखा. आपकी जो जर्नी वहां से शुरू हुई, वह यहां तक आएगी – क्या आपने 2021 में जब पहली बार पता चला कि आप मुख्यमंत्री बनने वाले हैं, तब ऐसा सोचा था?

जवाब:
मैं एक बहुत ही सामान्य परिवार में पैदा हुआ हूं. और सामान्य परिवार में पैदा होने वाले व्यक्ति के जीवन में जितनी चुनौतियां होती हैं, जितनी कठिनाइयां होती हैं, जिन हालातों का सामना करना पड़ता है – वो सब मैंने देखा और जिया है. बचपन से मैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का स्वयंसेवक रहा हूं. विद्यार्थी परिषद में छात्र राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहा, कई जिम्मेदारियां निभाईं. युवा मोर्चा में भी रहा, विद्यार्थी परिषद में भी अनेक दायित्वों पर काम किया. उसके बाद भारतीय जनता पार्टी में संगठनात्मक कार्य करता रहा. लेकिन साल 2021 में जब मुझे यह जिम्मेदारी मिली, तब तक मुझे यह भी नहीं पता था कि मेरा नाम तय हो चुका है. विधानमंडल दल की बैठक में जब मैं हॉल के अंदर गया और वहां घोषणा हुई कि पुष्कर सिंह धामी का नाम नेता के रूप में चयनित किया गया है, तब जाकर मुझे पता चला. उससे पहले मुझे बिल्कुल भी जानकारी नहीं थी. और सच बताऊं तो तब भी और आज भी – आपने जो कहा कि चार साल बहुत उतार – चढ़ाव वाले रहे – शुरुआत में परिस्थिति चुनौतीपूर्ण थी. मुझे छह महीने पहले ही मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी मिली थी. उत्तराखंड का इतिहास रहा है कि साल 2002, साल 2007, साल 2012 और साल 2017 – इन चारों चुनावों में सरकार कभी वापस नहीं आई. एक परिपाटी और एक मिथक बन गया था कि यहां सरकार दोबारा नहीं आती. ऐसे में लोगों की सोच भी वैसी ही रही होगी. मेरे पास कोई बहुत बड़ा प्रशासनिक अनुभव भी नहीं था. मैं दो बार का विधायक जरूर था, लेकिन उससे पहले कोई बड़ा मंत्रालय चलाने का अनुभव नहीं था. पर मैं एक फौजी का बेटा हूं. फौजी परिवार में अनुशासन के साथ पला – बढ़ा हूं. मैंने कभी यह नहीं सोचा कि मैं कुछ बनूंगा, लेकिन हमेशा यह सोचा कि मैं कुछ करूंगा.

सवाल:
पिछले चार साल का अगर आप खुद बैठकर आकलन करें, तो क्या आकलन है आपका?

जवाब:
देखिए, किसी का आकलन इस बात से होता है कि आपने कितने समर्पण भाव से काम किया, कितनी निष्ठा से काम किया और उसका परिणाम क्या रहा. आपने कहा ‘आउटकम’, तो मैंने भी वही शब्द बोल दिया. लेकिन हम लोगों का आकलन करने का काम जनता करती है. मैं अपना आकलन जनता के आकलन से करता हूं. मुझे लगता है कि पिछले चार सालों में, प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी की प्रेरणा और मार्गदर्शन में, हमने जो भी संकल्प उत्तराखंड की जनता के सामने रखे थे, उन पर आगे बढ़े हैं. चाहे राज्य के देवत्व को बनाए रखना हो, नए कानून लाने हों, नवाचार करना हो – हमने हर क्षेत्र में काम किया है. सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स यानी एसडीजी इंडेक्स में 2023 – 24 की रैंकिंग में उत्तराखंड पूरे देश में प्रथम स्थान पर रहा. एसडीजी इंडेक्स कई मानकों पर आधारित होता है – सड़क, परिवहन, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण, सामाजिक सुरक्षा आदि. जब कोई राज्य पहले स्थान पर आता है तो वह अनेक पैरामीटर पर अच्छा काम करता है. हमारे यहां कांवड़ मेला, चारधाम यात्रा, आदि कैलाश यात्रा, साल भर के अनेक धार्मिक उत्सव और पर्व होते हैं. पर्यटन के लिए भी बड़ी संख्या में लोग आते हैं. उनका प्रबंधन, सुरक्षा, सुविधाएं – ये सब मिलाकर हमने राज्यहित और राज्यवासियों के हित में काम करने की कोशिश की है.

सवाल:
कुंभ 2027 हरिद्वार – उसकी तैयारी कैसे चल रही है? वह अगला बड़ा आयोजन है.

जवाब:
कुंभ मेला भव्य, दिव्य और सुरक्षित हो – यही हमारी प्राथमिकता है. 2021 में हरिद्वार में महाकुंभ था, लेकिन उस समय कोरोना महामारी के कारण बहुत लोग स्नान से वंचित रह गए. इस बार हमने तैयारी व्यापक स्तर पर की है. हरिद्वार का अपना आध्यात्मिक महत्व है. गंगा जी निर्मल और स्वच्छ हैं. मैं स्वयं 10 से अधिक बैठकों की अध्यक्षता कर चुका हूं. अभी दो दिन पहले भारत सरकार ने 500 करोड़ रुपये कुंभ की तैयारियों के लिए स्वीकृत किए हैं. मैं प्रधानमंत्री जी का धन्यवाद करता हूं. हम डे – टू – डे मॉनिटरिंग के आधार पर तैयारी कर रहे हैं.

सवाल:
यूसीसी लागू कर आपने देश में उदाहरण पेश किया. क्या आप बाकी राज्यों के लिए मिसाल बनना चाहते हैं?

जवाब:
देवभूमि उत्तराखंड से गंगा निकलती है. 2022 के चुनाव में हमने जनता से वादा किया था कि सरकार बनते ही समान नागरिक संहिता लागू करेंगे. जनता ने हमें जनादेश दिया. जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में समिति बनी. दो साल तक व्यापक परामर्श हुआ, ड्राफ्ट बना और हमने कानून लागू किया. लोगों के मन में आशंकाएं थीं, लेकिन लागू होने के बाद सब शांतिपूर्ण रहा. बड़ी संख्या में मुस्लिम बहनें मुझसे मिलकर धन्यवाद करती हैं. बहुविवाह, हलाला, इद्दत जैसी कुरीतियों से मुक्ति मिली. मैं कहता हूं कि देश की 50% आबादी – मातृशक्ति – की 100% सुरक्षा का कानून यदि कोई है तो वह यूसीसी है. अन्य राज्यों को दबाव में आने की आवश्यकता नहीं है. जैसे गंगोत्री से गंगा निकलती है, वैसे ही यूसीसी की गंगोत्री उत्तराखंड से निकली है.

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सवाल:
बद्रीनाथ – केदारनाथ ट्रस्ट द्वारा गैर – हिंदुओं के प्रवेश को लेकर उठे विवाद पर आपका क्या मत है?

जवाब:
मैंने यह नहीं कहा कि सरकार ने कोई निर्णय लागू किया है. ट्रस्ट की ओर से कुछ बातें आईं. सरकार विधि – सम्मत और परामर्श के आधार पर निर्णय लेती है. 2021 में जब मैं आया, चारधाम यात्रा पूरी तरह बंद थी. मैंने स्वयं न्यायालय जाकर पक्ष रखा. स्टेकहोल्डर्स से चर्चा की. देवस्थानम बोर्ड के मुद्दे पर भी हमने सबकी सहमति से निर्णय लिया. देवभूमि में हमने किसी को रोका नहीं है. लेकिन जो भी निर्णय होगा, वह विधि और परंपरा के अनुरूप, सबकी सहमति से होगा.

सवाल:
बीजेपी में सीएम योगी, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, असम के सीएम हिमंत और आप… मुख्यमंत्री ‘हिंदुत्व’ के चेहरे माने जाते हैं. हिंदुत्व का पोस्टर ब्वॉय कौन है? क्या कोई रेस चल रही है?

जवाब:
जिन नेताओं का आपने नाम लिया, उनका व्यापक अनुभव है. हर राज्य की अपनी परिस्थिति होती है. भारतीय जनता पार्टी में जिसे जो दायित्व मिलता है, वह अपने काम से काम करता है. होड़ जैसी कोई व्यवस्था नहीं है.

सवाल:
एक अमेरिकी संस्था की रिपोर्ट में आपको ‘हेट स्पीच’ में नंबर वन बताया गया है. क्या कहेंगे?

जवाब:
मेरे राज्य की जनता मेरी कार्यशैली और व्यवहार जानती है. मैं किसी से हेट नहीं करता. अगर मैं यूसीसी लागू करता हूं, हलाला – बहुविवाह खत्म करता हूं, धर्मांतरण विरोधी कानून लाता हूं, दंगा रोकने का कानून लाता हूं, अतिक्रमण हटाता हूं – और कोई उसे हेट स्पीच कहे, तो मैं क्या कह सकता हूं?

सवाल:
दीपक जिन्हें ‘मोहम्मद दीपक’ कहा जा रहा है, उनसे राहुल गांधी मिले. इस पर आपका क्या कहना है?

जवाब:
राहुल गांधी (लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष, सांसद, रायबरेली) ने उन्हें इसलिए बुलाया क्योंकि उन्होंने अपने नाम के आगे ‘मोहम्मद’ लगा लिया. नहीं लगाया होता तो शायद नहीं बुलाते.

सवाल:
लोग कहते हैं अब जोड़ने की राजनीति होनी चाहिए, बांटने की नहीं.

जवाब:
हम कहां तोड़ रहे हैं? हम तो जोड़ रहे हैं. हम समान कानून ला रहे हैं, धर्मांतरण रोक रहे हैं, डेमोग्राफी संतुलित करने की कोशिश कर रहे हैं. देवभूमि का मूल अस्तित्व बनाए रखना ही हमारा उद्देश्य है. राज्य में किसी प्रकार का विभाजनकारी माहौल नहीं है.

AZMI DESK

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