Exclusive: ‘मोहम्मद दीपक’ बोले- ‘चाय का स्टॉल लगाती हैं मेरी मां, परिवार को मिले सुरक्षा’

उत्तराखंड के कोटद्वार में दुकान के नाम से ‘बाबा’ शब्द हटाने से जुड़े विवाद के बाद चर्चा में आए मोहम्मद दीपक ने एबीपी न्यूज से खास बातचीत की है. कोटद्वार के युवक मोहम्मद दीपक ने कहा कि वह उस बुजुर्ग बाबा को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते थे, लेकिन इंसानियत के नाते उन्होंने उनका साथ दिया. दीपक ने बताया कि वह कई सालों से उस दुकान को देखते आ रहे थे और जब भी वहां से गुजरते थे तो बुजुर्ग से मुलाकात हो जाती थी.
दीपक के अनुसार, 26 जनवरी को 7-8 लड़के दुकान पर पहुंचे और बुजुर्ग से ‘बाबा’ शब्द हटाने को कहा. उन्होंने बताया कि पिछले 35-40 साल से दुकान उसी नाम से चल रही है. जब उन्होंने बुजुर्ग के बचाव में आवाज उठाई तो लोगों ने उनसे उनका नाम कई बार पूछा. इस पर उन्होंने जवाब दिया, “मैं मोहम्मद दीपक हूं, बोल!” उनका कहना है कि उनका मतलब साफ था कि वह भारतीय हैं और इंसानियत के साथ खड़े हैं.
31 जनवरी 2026 को जिम पर हंगामा
दीपक ने आगे बताया, ”मैंने सोचा नहीं था कि मामला इतना बढ़ जाएगा. 31 जनवरी को करीब 150-200 लड़के उनके जिम पर पहुंच गए. ये लोग उन्हें डराने के इरादे से आए थे और वहां गाली-गलौच की गई. उस समय मेरी मां भी वहीं मौजूद थीं. ये लोग कोटद्वार के बाहर से आए थे. थाने के बाहर भी कई घंटों तक लोग खड़े रहे, जिससे माहौल तनावपूर्ण बना रहा.” दीपक ने कहा कि उनकी मां हमेशा सही का साथ देती हैं और उन्होंने भी कहा कि उन्होंने जो किया, वह सही किया.
‘नाम को लेकर विवाद खड़ा करना गलत’
दीपक ने ये भी कहा, ”लोगों को धर्म के आधार पर नहीं, इंसान को इंसान की नजर से देखना चाहिए. नाम को लेकर विवाद खड़ा करना गलत है.” उनका कहना है कि वह सिर्फ इंसानियत के लिए खड़े हुए थे.
राहुल गांधी से क्या हुई बातचीत?
दीपक ने बताया कि राहुल गांधी की टीम से उन्हें फोन आया था, जिसके बाद वह दिल्ली जाकर उनसे मिले. राहुल गांधी ने उनसे मौजूदा हालात के बारे में पूछा और परिवार का हालचाल जाना. उन्होंने बताया, ”राहुल गांधी ने कहा कि वह उनके जिम की मेंबरशिप लेना चाहते हैं. उन्होंने यह भी वादा किया कि वह कोटद्वार आएंगे और उनके जिम की सदस्यता लेंगे. इस मुलाकात से उन्हें हौसला मिला.”
जिम पर पड़ा आर्थिक असर- दीपक
दीपक ने बताया कि उनके जिम में पहले 150 से ज्यादा सदस्य थे, जो अब घटकर 20-25 रह गए हैं. उन्होंने कहा कि जो लोग जिम नहीं आ रहे हैं, वह उनकी सोच है. उन्होंने कहा, ”मुझे अपना घर चलाना है, जरूरत पड़ी तो मजदूरी करके भी चला लेंगे. बैंक की ईएमआई, बेटी की स्कूल फीस और घर का खर्च सब जिम की कमाई से चलता है. इस घटना का सीधा असर उनकी आमदनी पर पड़ा है.”
‘स्टार’ जैसा महसूस नहीं, शांति का संदेश मिला
जब उनसे पूछा गया कि कई लोग उनसे मिलने और सेल्फी लेने आ रहे हैं. इस पर दीपक ने कहा कि उन्हें अच्छा लगता है कि लोगों तक उनका शांति का संदेश पहुंचा है. उन्हें किसी स्टार जैसी भावना नहीं, बल्कि संतोष है कि उन्होंने इंसानियत का काम किया.
‘राजनीति में आने का कोई इरादा नहीं’
दीपक ने साफ कहा कि उनका राजनीति से जुड़ने का कोई प्लान नहीं है. वह सिर्फ जिम से घर और घर से जिम जाना चाहते हैं. उन्होंने ये भी कहा, ”अगर भारतीय जनता पार्टी के लोग भी बुलाएंगे तो वह मिलने जाएंगे. बीजेपी को छोड़कर लगभग सभी पार्टियों के लोग मिलने आए हैं, लेकिन उन्होंने किसी को भी राजनीति में आने के लिए हां नहीं कहा. कई लोगों ने उन्हें चुनाव लड़ने का प्रस्ताव भी दिया, लेकिन मना कर दिया.” उनका कहना है कि वह राजनीति में नहीं पड़ना चाहते.
परिवार के लिए सुरक्षा की मांग
दीपक इस पूरे मामले को लेकर भावुक भी हो गए. उन्होंने कहा कि वह अपने परिवार को लेकर बहुत संवेदनशील हैं. अगर सुरक्षा देनी है तो उन्हें नहीं, बल्कि उनके परिवार को दी जाए. उन्होंने कहा, ”मेरी 70 साल की मां चाय का स्टाल लगाती हैं. इससे पहले वह घरों में खाना बनाकर काम करती थीं. मैं नहीं चाहता कि उनके परिवार को किसी तरह की परेशानी हो.” इस पूरे घटनाक्रम के बीच मोहम्मद दीपक ने दोहराया कि उन्होंने जो किया, वह सिर्फ इंसानियत के लिए किया और आगे भी वह उसी रास्ते पर चलना चाहते हैं.
कैसे चर्चा में आए दीपक?
26 जनवरी 2026 को हिंदूवादी संगठनों ने एक दुकान के नाम पर आपत्ति जताई थी. कोटद्वार बाजार में मुस्लिम दुकानदार पर दबाव बनाने कोशिश हुई. दुकान के नाम से ‘बाबा’ शब्द हटाने के लिए दबाब बनाया गया था. दीपक ने दुकानदार वकील अहमद का बचाव किया. नाम पूछने पर अपना नाम ‘मोहम्मद दीपक’ बता दिया. 31 जनवरी 2026 को दीपक के जिम के बाहर कई संगठनों ने प्रदर्शन किया. पुलिस ने स्थिति संभाली और फ्लैग मार्च किया. फरवरी 2026 में कोटद्वार पुलिस ने 3 एफआईआर दर्ज की. इनमें से एक एफआईआर दीपक के खिलाफ थी.”



