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Ramadan 2026: गोरखपुर की मस्जिदों में अदा की गई रमजान के पहले जुमा की नमाज, मांगी अमन ओ अमान की दुआ

माह-ए-रमजान के पहले जुमा की नमाज गोरखपुर की सभी मस्जिदों में अदा की गई. मुल्क में अमन ओ अमान, तरक्की और खुशहाली की दुआ मांगी गई. फर्ज नमाजों के साथ नफ्ल नमाज पढ़ी गई. कुरआन-ए-पाक की तिलावत हुई. माह-ए-रमजान का पहला जुमा व दूसरा रोजा अल्लाह को राजी करने में गुजरा.

मदीना जामा मस्जिद रेती चौक, जामा मस्जिद उर्दू बाजार, जामा मस्जिद रसूलपुर, गोरखनाथ जामा मस्जिद, दरगाह हजरत मुबारक खां शहीद जामा मस्जिद नार्मल, मस्जिद सुब्हानिया तकिया कवलदह, गाजी मस्जिद गाजी रौजा, सुन्नी बहादुरिया जामा मस्जिद रहमतनगर, मक्का मस्जिद मेवातीपुर, गौसिया जामा मस्जिद छोटे काजीपुर, सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार सहित सभी मस्जिदों में भीड़ उमड़ी.

आजान से पहले बढ़े मस्जिदों की तरफ कदम

जुमा के नमाज की तैयारी सुबह से शुरु हो गई. लोगों ने गुस्ल किया. साफ सुथरे कपड़े पहने. इत्र लगाया. सिर पर टोपी सजाई. अजान होने से पहले ही बच्चे, नौजवान व बुजुर्गों ने मस्जिदों की ओर कदम बढ़ाए, ताकि पहली पंक्ति में जगह मिल जाए. अजान से पहले नमाजियों से मस्जिदें भरनी शुरु हो गई. अजान होने तक मस्जिदें नमाजियों से भर गई. 

नमाजियों ने अदा की सुन्नत की नमाज

इसके बाद नमाजियों ने सुन्नत नमाज अदा की. तकरीर के बाद मस्जिदों के इमाम ने मिम्बर पर खड़े होकर खुत्बा पेश किया. जुमा की नमाज अदा की गई. इमाम के साथ सभी ने अल्लाह की बारगाह में दुआ के लिए हाथ उठाए. इमाम की दुआ पर सभी ने आमीन की सदा बुलंद की. मिलकर दुरूद ओ सलाम पढ़ा गया. घरों में महिलाओं ने नमाज अदा की. कुरआन-ए-पाक की तिलावत की 

शाम को इफ्तार की तैयारी शुरु हो गई. लजीज व्यंजन से दस्तरख्वान सज गए. शाम को असर की नमाज पढ़ी गई. इफ्तार का इंतजार शुरु हुआ. इफ्तार का समय होने पर सबने अल्लाह का शुक्र अदा करते हुए रोजा खोला. रोजा खोलने के बाद मस्जिदों का रुख किया. मगरिब की नमाज अदा की. इसके बाद इशा व तरावीह की नमाज अदा की. हफ्ते की ईद व दूसरा रोजा मुसलमानों ने अल्लाह की रजा में गुजारा. बाजारों व मुस्लिम मोहल्लों में देर रात तक रौनक बनी रही.

उलमा किराम ने जुमा की तकरीर में बताई रोजे के विशेषता

जुमा की तकरीर में मरकजी मदीना जामा मस्जिद रेती चौक में मुफ्ती मेराज अहमद कादरी ने कहा कि रोजेदार खुशनसीब है जिसके लिए हर रोज जन्नत सजाई जाती है. रोजेदार की मगफिरत के लिए दरिया की मछलियां दुआ करती हैं. रोजा सिर्फ भूखे रहने का नाम नहीं है बल्कि नफ्स पर नियंत्रण का जरिया है. असल रोजा तो वह है जिससे अल्लाह राजी हो जाए. जब हाथ उठे तो भलाई के लिए. कान सुने तो अच्छी बातें. कदम बढ़े तो नेक काम करने के लिए. आंख देखे तो जायज चीजों को. रमजान का अदब व एहतराम बेहद जरूरी है.

‘रोजा सिर्फ खाने-पीने से दूर रहने का नाम नहीं’

नूरी मस्जिद तुर्कमानपुर में मौलाना मोहम्मद असलम रजवी ने कहा कि रोजा सिर्फ खाने और पीने से दूर रहने का नाम नहीं, रोजा तो यह है कि बेकार-गलत बातों से बचा रहे. झूठ, चुगली, गीबत, गाली देने व किसी को तकलीफ देने से बचें. यह चीजें वैसे भी नाजायज व हराम हैं. 

शाही जामा मस्जिद तकिया कवलदह के इमाम हाफिज आफताब आलम ने कहा कि रमजान का महीना इबादत का महीना है. इस महीने में ज्यादा से ज्यादा ऐसा काम किया जाए, जिससे अल्लाह व रसूल खुश हों और अल्लाह व रसूल को खुश करने के लिए सबसे जरूरी है उनके बताए रास्ते पर चलना. 

उन्होने कहा कि, ज्यादा से ज्यादा अल्लाह को याद करें. नमाज और कुरआन पढ़ें क्योंकि इस महीने में जो इबादत की जाती है, आम दिनों के मुकाबले ज्यादा सवाब देती है. एक दूसरे की मदद करें, जकात और फित्रा अदा करें. गरीबों को ज्यादा से ज्यादा सदका व खैरात दें. रोजेदारों को इफ्तार कराएं.

सात साल के सैयद ताहिब ने रखा पहला रोजा

सूरजकुंड कॉलोनी के रहने वाले सैयद मतीन अहमद व नाजिया वारसी के सात वर्षीय बेटे सैयद  ताहिब अहमद ने अपनी जिंदगी का पहला रोजा रखा. वह यूकेजी के छात्र हैं. ताहिब ने अम्मी अब्बू के साथ सहरी खाई. दिनभर इबादत की. उनकी हौसला-अफजाई के लिए सामूहिक रोजा इफ्तार पार्टी हुई. 

इसमें दादा सैयद मारूफ अहमद, दादी सफिया वारसी, सैयद नदीम अहमद, ज्या वारसी, जीनत वारसी, जरीना, जैनब, अनाबिया, अजकिया, शाहिना आदि ने ताहिब को तोहफों व दुआओं से नवाजा. ताहिब ने अल्लाह का शुक्र अदा कर सबके साथ रोजा खोला और पूरी दुनिया में अमन-चैन की दुआ मांगी.

मिर्गी का दौरा पड़ने से रोजा नहीं टूटेगा : उलमा किराम

रमजान हेल्पलाइन नंबर 8604887862, 9598348521, 9956971232, 7860799059  पर जुमा को सवाल ओ जवाब का सिलसिला जारी रहा. लोगों ने नमाज, रोजा, जकात, फित्रा आदि के बारे में सवाल किए. उलमा किराम ने क़ुरआन व हदीस की रोशनी में जवाब दिया.

1. सवाल : रोजे की हालत में अगर मिर्गी के रोगी को दौरा पड़ जाए तो क्या रोजा टूट जाएगा? 
जवाब : रोजा नहीं टूटेगा.

2. सवाल : रोजे की हालत में बच्चे को दूध पिलाना कैसा क्या इससे भी रोजा टूट जाएगा? 
जवाब : नहीं. रोजे की हालत में बच्चे को दूध पिलाने में कोई हर्ज नहीं न ही इससे रोजा टूटता है और न ही वुजू.

3. सवाल : क्या खूनी बवासीर से रोजा टूट जाता है? 
जवाब : नहीं खूनी बवासीर से रोजे पर कोई असर नहीं पड़ता.

4. सवाल : क्या आंख में सुर्मा लगाने और सर में तेल लगाने से रोजा टूट जाता है?
जवाब : नहीं. आंख में सुर्मा लगाने और सर में तेल लगाने से रोजा नहीं टूटेगा अगरचे उसका मजा हलक में मालूम हो.

AZMI DESK

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